Nana Patekar Final Rites After Sunset: नाना पाटेकर का क्यों आधी रात में किया गया अंतिम संस्कार? बेटे मल्हार के लिए थे परेशान, आखिरी बार कहे थे 15 शब्द

Last Updated:October 09, 2026, 06:15 IST
Why Nana Patekar Final Rites After Sunset: नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में परिवार ने जल्दबाजी क्यों की, इसे लेकर अब बेटे मल्हार पाटेकर ने वजह बताई है. वहीं, पिता से हुई आखिरी बातचीत को याद करते हुए मल्हार ने बताया कि नाना साहब उनकी तबीयत को लेकर परेशान थे. बेटे की बीमारी ने उन्हें चिंता में डाल दिया था. आखिरी बातचीत में उन्होंने मल्हार को अपनी सेहत का ख्याल रखने की सलाह दी थी.
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नाना पाटेकर पंचतत्व में विलीन हो गए.
नई दिल्ली. हिंदी और मराठी सिनेमा के शिखर पुरुष नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे. 8 अक्टूबर की देर रात पुणे के पास डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस ‘नानाची वाड़ी’ के पास उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ. परिवार, दोस्तों व फिल्म जगत के दिग्गजों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी. पर्दे पर अपनी दमदार अदाकारी से लोगों के दिलों पर राज करने वाले नाना की अंतिम झलक फैंस नहीं देख पाए. कई सेलेब्स और फैंस उनके अंतिम दर्शन नहीं कर पाए. लोगों को उम्मीद थी कि परिवार उनके पार्थिव शरीर के दर्शन के लिए रखेगा. लेकिन परिवार में देर रात को ही अंतिम संस्कार कर उन्हें अंतिम विदाई दे दी. अब उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने खुलासा किया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया और पिता से आखिरी बार जब उन्होंने बात की तो वो क्यों परेशान और चिंता में थे.
8 अक्टूबर की देर रात हुए अंतिम संस्कार के साथ ही हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज एक्टर पंचतत्व में विलीन हो गए. नाना के बेटे मल्हार ने भारी मन से अंतिम संस्कार की विधिवत तरीके से सारी प्रक्रिया पूरी की. उन्होंने नाना के पैर छूकर उन्हें अंतिम विदाई दी. मंत्रोच्चार के साथ सभी रस्में अदा की गईं. इस दौरान उनकी पत्नी नीलकांति भी गमगीन नजर आईं. लेकिन सभी के मन में ये सवाल कि आखिर क्यों देर रात ही परिवार ने उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया.
आधी रात में क्यों हुआ अंतिम संस्कार?
पिता को आखिरी विदाई देते वक्त बेटे मल्हार बेहद भावुक नजर आए. मल्हार पाटेकर ने बताया कि उनके पिता का अंतिम संस्कार सूर्यास्त के बाद क्यों किया गया. परंपराओं के अनुसार, सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है. अंतिम संस्कार के बाद मीडिया से बातचीत में मल्हार ने इसकी वजह बताई. उन्होंने कहा कि परिवार गोवा में था और नाना पाटेकर के पार्थिव शरीर को गांव स्थित फार्महाउस तक लाने में काफी समय लग गया. परिवार को उम्मीद थी कि वे जल्दी पहुंच जाएंगे, लेकिन लंबी यात्रा के कारण देरी हुई. मल्हार ने कहा, ‘हम गोवा में थे और उनके पार्थिव शरीर को गांव स्थित फार्महाउस लाना था. हमें लगा था कि हम जल्दी पहुंच जाएंगे, लेकिन इसमें कुछ समय लग गया. उनका निधन सुबह-सुबह हुआ था और तब तक काफी समय बीत चुका था. पार्थिव शरीर को ज्यादा देर तक रखना उचित नहीं था. इसलिए हमें सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार करना पड़ा.’
‘नाना साहब जैसे लोग वास्तव में कभी नहीं जाते’
मल्हार ने पिता को याद करते हुए यह भी कहा कि नाना साहब जैसे लोग वास्तव में कभी नहीं जाते. अपने काम और उपलब्धियों के जरिए वे हमेशा लोगों के बीच जिंदा रहते हैं. उनके मुताबिक, नाना का नजरिया हमेशा एक जैसा रहा. वह चाहते थे कि लोग इंसानियत के नाम पर एकजुट हों और दुनिया को बेहतर बनाने के लिए काम करें. यहां देखे वीडियो
इस बात से परेशान थे नाना पाटेकर
नाना पाटेकर के बेटे मल्हार ने पिता के साथ हुई आखिरी बातचीत का जिक्र करते हुए भावुक कर देने वाली बात बताई. उन्होंने बताया कि निधन से पहले जब उनकी नाना साहब से बात हुई थी, तब नाना खुद से ज्यादा मुझे लेकर फिक्रमंद थे. मल्हार ने बताया मेरी तबीयत कुछ दिनों से खराब चल रही थी. वह इसे लेकर वो परेशान थे. आखिरी बातचीत में नाना ने बेटे से कहा था, ‘मेरे लिए बस इतना ही काफी है कि तू बस अपनी तबीयत का ध्यान रख.’ पिता के ये शब्द बताते हैं कि बेटे की सेहत उनके लिए कितनी अहम थी. जिंदगी भर अपनी बेबाकी और मजबूत शख्सियत के लिए पहचाने जाने वाले नाना के इस रूप ने उनके चाहने वालों को भावुक कर दिया. यहां देखे वीडियो
पिता के सपनों को पूरा करेंगे मल्हार
मल्हार ने यह भी साफ किया कि नाना पाटेकर के सामाजिक कार्यों को रुकने नहीं दिया जाएगा. नाना पाटेकर नाम फाउंडेशन के जरिए जल संरक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे थे. मल्हार के मुताबिक, उनके पिता ने आगे के कामों को लेकर लोगों को जिम्मेदारियां सौंप रखी थीं. उन्होंने बताया कि मराठवाड़ा में प्रस्तावित काम को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री से भी बातचीत हुई है. फाउंडेशन के सीईओ गणेश थोरात के मार्गदर्शन में काम जारी है. मल्हार ने कहा कि उनके पिता जिस बड़े स्तर पर काम करना चाहते थे, उस लक्ष्य को पूरा करना अब परिवार और उनसे जुड़े लोगों की जिम्मेदारी है.
About the AuthorShikha Pandey
15 साल पहले पत्रकारिता से शुरू हुआ शिखा पाण्डेय का सफर आज भी उसी जुनून के साथ जारी है. दिसंबर 2019 में न्यूज18 हिंदी से जुड़ने के बाद वह चीफ सब एडिटर के रूप मे…
Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh
First Published :
October 09, 2026, 06:15 IST



