Rajasthan

घूंघट और संघर्षों से निकलकर RPS बनीं; वकील विवाद से चर्चा में आईं, कौन हैं ‘थप्पड़बाज’ अफसर सीओ अंजू यादव? जानें

Last Updated:October 10, 2026, 11:51 IST

DSP Anju Yadav Story: किशनगढ़ में वकील से हुए विवाद के बाद चर्चा में आईं ट्रैफिक सीओ अंजू यादव का जीवन संघर्ष और सफलता की एक असाधारण गाथा है. हरियाणा के नारनौल में जन्मीं अंजू की शादी 2009 में हुई थी और वे घूंघट में रहती थीं. वर्ष 2021 में पति के निधन के बाद उन्होंने सिंगल मदर के रूप में संघर्ष किया, चार सरकारी शिक्षक नौकरियां हासिल कीं और अंततः RPSC RAS परीक्षा पास कर राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) में डीएसपी बनीं. वर्तमान में किशनगढ़ में ट्रैफिक सीओ के पद पर तैनात अंजू यादव के जीवन का यह सफर प्रेरणास्त्रोत रहा है.

ख़बरें फटाफट

Amazon Prime DayTop Deals Insideघूंघट और संघर्षों से निकलकर RPS बनीं, कौन हैं ‘थप्पड़बाज’ अफसर सीओ अंजू यादव?Zoomकभी घूंघट में रहती थीं, अब खाकी वर्दी में हैं CO अंजू यादव, जानिए पूरी कहानी

Ajmer: राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ शहर में हाल ही में वाहन पार्किंग को लेकर हुए एक विवाद के बाद ट्रैफिक सीओ (डीएसपी) अंजू यादव सुर्खियों में आ गई हैं. किशनगढ़ मुख्य बाजार में एडवोकेट बाबूलाल बागरिया के साथ हुई नोकझोंक और थप्पड़ मारने के आरोपों के बाद वकीलों के उग्र प्रदर्शन और तीन थानों के पुलिस जाब्ते की तैनाती ने इस मामले को तूल दे दिया है. इस प्रशासनिक और कानूनी विवाद के केंद्र में मौजूद अंजू यादव की वास्तविक कहानी एक ऐसी महिला अधिकारी की है, जिसने सामाजिक रूढ़ियों, घूंघट की चारदीवारी और पति के असामयिक निधन के गहरे आघात को पार करते हुए खाकी वर्दी और पुलिस सेवा में मुकाम हासिल किया है.

हरियाणा के नारनौल क्षेत्र के धौलेड़ा गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मीं अंजू यादव का शुरुआती जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है. उनके पिता लालाराम यादव किसान हैं तथा माता सुशीला देवी गृहणी हैं. चार बहनों में सबसे बड़ी होने के कारण उन पर पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी दबाव था. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से पूरी की और इसके बाद पत्राचार (डिस्टेंस लर्निंग) के माध्यम से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. पारंपरिक ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी होने के कारण वर्ष 2009 में 21 वर्ष की आयु में उनका विवाह राजस्थान के अलवर जिले स्थित गंडाला गांव में कर दिया गया, जहां उन्हें पारिवारिक व सामाजिक परंपराओं के तहत घूंघट में रहना पड़ता था.

पति के असामयिक निधन के बाद टूटी नहीं, सिंगल मदर बनकर संभाली जिम्मेदारी

वर्ष 2009 में 21 वर्ष की आयु में उनका विवाह राजस्थान के अलवर जिले स्थित गंडाला गांव में हुआ. पारंपरिक ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी होने के कारण शादी के बाद उन्हें पारिवारिक व सामाजिक परंपराओं के तहत घूंघट में रहना पड़ता था. वर्ष 2012 में उन्होंने एक बेटे मुकुलदीप को जन्म दिया और पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने करियर को भी संतुलित रखा. ससुराल पक्ष से अपेक्षित सहयोग न मिलने पर वे अपने बेटे के बेहतर भविष्य के लिए मायके लौट आईं. इसी दौरान वर्ष 2021 में बीमारी के कारण उनके पति नित्यानंद का असामयिक निधन हो गया. इस वज्रपात से टूटने के बजाय उन्होंने एक सिंगल मदर के रूप में अपने बेटे के खातिर खुद को पूरी तरह मजबूत करने का फैसला किया.

शिक्षक से लेकर चार सरकारी नौकरियां और फिर आरपीएस (RPS) तक का सफरआत्मनिर्भर बनने के लिए उन्होंने अपनी रुकी हुई पढ़ाई दोबारा शुरू की और कड़ी मेहनत के बल पर एक के बाद एक चार सरकारी नौकरियां हासिल कीं. वर्ष 2016 में वे मध्य प्रदेश के भिंड स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में शिक्षिका बनीं. इसके बाद उन्होंने राजस्थान और दिल्ली के सरकारी स्कूलों में भी करीब 5 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया. अध्यापन के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा का लक्ष्य रखा और RPSC RAS 2021 की परीक्षा की तैयारी में जुट गईं. अपनी अटूट मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने पहले ही प्रयास में विधवा श्रेणी के अंतर्गत 1725वीं रैंक हासिल कर राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) में सफलता प्राप्त की. राजस्थान पुलिस अकादमी में कड़े प्रशिक्षण के बाद मई 2024 में पासिंग आउट परेड के साथ वे आधिकारिक तौर पर डिप्टी एसपी बन गईं.

किशनगढ़ में ट्रैफिक सीओ के रूप में तैनाती और मौजूदा विवादवर्तमान में अजमेर जिले के किशनगढ़ में ट्रैफिक सीओ के पद पर सेवाएं दे रही अंजू यादव अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं. हाल ही में किशनगढ़ मुख्य बाजार की सिटी रोड पर नो-पार्किंग में वाहन खड़ा करने को लेकर एक वाहन चालक और एडवोकेट बाबूलाल बागरिया के साथ उनका विवाद हो गया. आरोप है कि तीखी बहस के दौरान अधिकारी ने आपा खो दिया और थप्पड़ जड़ दिया, जिसके बाद वकीलों ने चक्काजाम कर दिया. हालांकि यह प्रशासनिक मामला फिलहाल जांच के दायरे में है, लेकिन उनका यह प्रेरणादायक जीवन सफर आज भी लाखों महिलाओं के लिए हिम्मत और संघर्ष की एक बड़ी मिसाल बना हुआ है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

और पढ़ेंLocation :

Ajmer,Ajmer,Rajasthan

First Published :

October 10, 2026, 11:51 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj