Rajasthan

उदयपुर की धड़कन है मोती चौहट्टा! मोतियों के आभूषणों की वो बेमिसाल परंपरा जिसे देखने दूर-दूर से आते हैं लोग

Last Updated:April 30, 2026, 10:14 IST

Moti Chohatta Market Udaipur: उदयपुर का मोती चौहट्टा बाजार शहर की ऐतिहासिक विरासत और पारंपरिक मोतियों की कारीगरी का एक जीवंत उदाहरण है. सदियों पुराना यह बाजार आज भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है, जहाँ मोतियों के आभूषणों की कला को पीढ़ियों से संजोकर रखा गया है. शहरवासियों और पर्यटकों के बीच यह बाजार अपनी शुद्धता और अद्वितीय डिजाइनों के लिए पहली पसंद बना हुआ है. यहाँ की संकरी गलियों में मिलने वाली मोतियों की चमक न केवल राजस्थान की संस्कृति को दर्शाती है, बल्कि स्थानीय हस्तशिल्प को भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती प्रदान करती है.

मोती चौहट्टा बाजार की खासियत यह है कि यहां सदियों से मोतियों का काम होता आ रहा है. पुराने समय में जब राजशाही का दौर था, तब इस बाजार को महाराणा के समय बसाया गया था. उस दौर में यहां के कारीगर राजपरिवार के लिए विशेष आभूषण तैयार किया करते थे, जिसकी पहचान आज भी कायम है.

बाजार में आपको मोतियों से बनी चूड़ियां, नेकलेस, मालाएं और कई तरह के आकर्षक आभूषण आसानी से मिल जाएंगे. शादी-ब्याह हो या कोई खास मौका, यहां के गहनों की मांग हमेशा बनी रहती है. खास बात यह है कि यहां के डिजाइन पारंपरिक होने के साथ-साथ आधुनिकता का भी मेल रखते हैं.

स्थानीय कारीगर मोहम्मद अकबर अली बोहरा बताते हैं कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से इसी काम से जुड़ा हुआ है. उनके अनुसार, उनके पूर्वज भी इसी बाजार में बैठकर मोतियों की कारीगरी किया करते थे और आज वे उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. उनका कहना है कि इस काम में धैर्य और हुनर दोनों की जरूरत होती है.

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झीलों की नगरी उदयपुर अपने ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत के लिए देशभर में मशहूर है. इसी विरासत का एक अहम हिस्सा है. मोती चौहट्टा बाजार, जो वर्षों से मोतियों की कारीगरी के लिए पहचाना जाता है. यह बाजार न सिर्फ व्यापार का केंद्र है, बल्कि यहां की परंपराएं और हुनर भी पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित हैं.

मोती चौहट्टा बाजार सिर्फ खरीदारी का स्थान नहीं, बल्कि उदयपुर की सांस्कृतिक पहचान का एक जीवंत उदाहरण है. यहां की गलियों में आज भी पुरानी परंपराओं की झलक देखने को मिलती है, जो इस बाजार को खास बनाती है. यही कारण है कि यह बाजार समय के साथ बदलते हुए भी अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है.

हालांकि बदलते समय के साथ बाजार को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है. मशीनों से बनने वाले आभूषण और बड़े ब्रांड्स के आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, लेकिन फिर भी हाथों से बनी ज्वेलरी की खास पहचान आज भी बरकरार है. लोग आज भी यूनिक और पारंपरिक डिजाइनों के लिए यहां का रुख करते हैं.

यहां सोने और चांदी के साथ-साथ आर्टिफिशियल मोतियों की ज्वेलरी भी बड़े स्तर पर बनाई जाती है. समय के साथ डिजाइन और स्टाइल में बदलाव जरूर आया है, लेकिन कारीगरी की बारीकी और गुणवत्ता में आज भी कोई कमी नहीं आई है. यही वजह है कि यह बाजार आज भी शहरवासियों की पहली पसंद बना हुआ है.

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April 30, 2026, 10:14 IST

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