एक बहन पानी में दिखा रही दम, दूसरी कराटे में बरसा रही पंच, जोधपुर की दो बहनें लिख रहीं सफलता की इबारत

Last Updated:August 18, 2026, 11:31 IST
Jodhpur Sisters Success Story: जोधपुर की शिवांजना और मनुश्री की कहानी बहनों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और एक-दूसरे से सीखने की मिसाल है. बड़ी बहन शिवांजना तैराकी में 32 मेडल जीतकर राष्ट्रीय स्तर की तैयारी कर रही हैं. उनका सपना ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है. छोटी बहन मनुश्री ने शिवांजना से कराटे सीखा और इसे खेल के साथ आत्मरक्षा का जरिया बनाया. वह 15 मेडल जीत चुकी हैं और हाल ही में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक अपने नाम किया. मनुश्री लड़कियों के लिए सेल्फ डिफेंस को जरूरी मानती हैं. दोनों बहनों की सफलता में परिवार का लगातार प्रोत्साहन और संस्कार अहम रहे हैं. दादा धर्माराम चौधरी और पुखराज चौधरी की समाजसेवा की विरासत को परिवार आगे बढ़ा रहा है, वहीं दोनों बेटियां खेल उपलब्धियों से परिवार और शहर का नाम रोशन कर रही हैं.
ख़बरें फटाफट
जोधपुर. ब्लू सिटी जोधपुर की इन दो बहनों की कहानी सिर्फ मेडल जीतने की नहीं, बल्कि जुनून, मेहनत और एक-दूसरे से सीखते हुए आगे बढ़ने की है. डीपीएस स्कूल में पढ़ने वाली बड़ी बहन शिवांजना जहां तैराकी में अपनी रफ्तार से लगातार सफलता हासिल कर रही हैं, वहीं छोटी बहन मनुश्री कराटे और सेल्फ डिफेंस में अपनी ताकत और आत्मविश्वास का लोहा मनवा रही हैं. दोनों के खेल अलग हैं, लेकिन मंजिल एक है अपने परिवार और जोधपुर का नाम देश के बड़े मंच पर रोशन करना. दोनों बहनों की इस सफलता के पीछे परिवार के संस्कार और प्रोत्साहन की बड़ी भूमिका है.
बड़ी बेटी शिवांजना ने तैराकी को अपनी पहचान बनाया है. वह अब तक 32 मेडल अपने नाम कर चुकी हैं और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं. अब उनकी तैयारी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए चल रही है. शिवांजना का सपना सिर्फ मेडल तक सीमित नहीं है. वह ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर देश का नाम रोशन करना चाहती है. उनका मानना है कि खिलाड़ी को दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने प्रदर्शन और लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए.
बहन से सीखा कराटे, दिल्ली में जीता गोल्ड
छोटी बहन मनुश्री ने अपनी बड़ी बहन से कराटे सीखा और इसे सिर्फ खेल नहीं, बल्कि आत्मरक्षा का माध्यम बनाया. कड़ी मेहनत के दम पर वह अब तक 15 मेडल जीत चुकी हैं. पिछले सप्ताह दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए मनुश्री ने स्वर्ण पदक हासिल किया. उनका सपना अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है. मनुश्री का कहना है कि लड़कियों के लिए सेल्फ डिफेंस बेहद जरूरी है, क्योंकि माता-पिता हर समय साथ नहीं रह सकते. यही सोच उन्हें लगातार बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है.
दादाजी के संस्कारों को बेटियों ने दी नई उड़ान
जोधपुर के वरिष्ठ समाजसेवी स्व. धर्माराम चौधरी और स्व. पुखराज चौधरी भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके संस्कार और समाजसेवा की भावना परिवार में आज भी दिखाई देती है. उनकी पुत्रवधू मोनिका चौधरी समाजसेवा के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं, वहीं दोनों बेटियां अपनी उपलब्धियों से परिवार की पहचान को आगे बढ़ा रही हैं. खास बात यह है कि दोनों बहनों के बीच मुकाबला एक-दूसरे को हराने का नहीं, बल्कि एक-दूसरे को आगे बढ़ाने का है. एक पानी में अपनी रफ्तार से पहचान बना रही है तो दूसरी कराटे की ताकत से. दोनों के सपने बड़े हैं और परिवार को भरोसा है कि यही संस्कार और मेहनत एक दिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक जरूर पहुंचाएगी.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
और पढ़ेंLocation :
Jodhpur,Rajasthan
First Published :
August 18, 2026, 11:31 IST



