Priyadarshini Inspiring Story: दादा के दो सितारों ने जगाया था देशसेवा का सपना, वर्दी से प्रेरित पोती ने ‘वायुवीर’ में टॉप कर किया कमाल

Last Updated:September 16, 2026, 05:54 IST
Inspiring Success Story Of Priyadarshini Rajpurohit From Barmer: राजस्थान के बाड़मेर जिले के रामसर गांव की बेटी प्रियदर्शिनी राजपुरोहित ने वायुवीर परीक्षा में पूरे भारत में पहली रैंक हासिल की है. पिता किशनसिंह मनिहारी की दुकान चलाते हैं और दादा बीएसएफ में सब-इंस्पेक्टर रहे हैं. दादा की वर्दी से प्रेरित होकर प्रियदर्शिनी ने सीमित संसाधनों के बावजूद यह मुकाम हासिल किया. बाड़मेर के पीजी कॉलेज से बीएससी और एनसीसी सी सर्टिफिकेट प्राप्त करने वाली प्रियदर्शिनी ने पहले प्रयास में असफल होने के बाद दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया टॉप कर जिले का नाम रोशन किया है.
राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक छोटे से सरहदी गांव रामसर की रहने वाली प्रियदर्शिनी राजपुरोहित ने पूरे देश में अपने जिले का नाम रोशन किया है. प्रियदर्शिनी ने वायुवीर परीक्षा में ऑल इंडिया प्रथम रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती है. जिस मिट्टी को कभी बेटियों की शिक्षा और उनके विकास के लिए बहुत मुश्किल माना जाता था, उसी मिट्टी से निकलकर इस बेटी ने आसमान छूने का काम किया है. प्रियदर्शिनी की इस कामयाबी ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे बाड़मेर जिले का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया है.
भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे रामसर गांव में जन्मी प्रियदर्शिनी का बचपन गांव की अन्य आम बच्चियों जैसा ही रहा था. उनके पिता किशनसिंह गांव में ही मनिहारी की एक छोटी सी दुकान चलाकर अपने घर का गुजारा करते हैं. परिवार में संसाधनों की हमेशा कमी रही, लेकिन उनके हौसलों में कभी कोई कमी नहीं आई. उनके सपने बहुत अलग और बड़े थे. प्रियदर्शिनी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव से ही पूरी की और उसके बाद बाड़मेर के पीजी कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने एनसीसी में भी हिस्सा लिया और वहां से ‘सी’ सर्टिफिकेट हासिल किया.
प्रियदर्शिनी के लिए सफलता की राह इतनी आसान नहीं थी. उनके दादा बागसिंह, जो सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे, उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बने. बचपन से ही अपने दादा के कंधे पर सजे सितारों को देखकर प्रियदर्शिनी के मन में भी देश सेवा का जज्बा पैदा हुआ. दादा की वर्दी ने उनके भीतर एक आग जला दी थी कि उन्हें भी बड़े होकर इसी तरह देश की रक्षा करनी है. इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने वायुवीर परीक्षा की तैयारी शुरू की.
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हालांकि, अपने पहले प्रयास में प्रियदर्शिनी को सफलता नहीं मिल पाई. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. अपनी गलतियों से सीख लेते हुए उन्होंने दोगुनी मेहनत और लगन के साथ दोबारा तैयारी की. सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी मेहनत रंग लाई और दूसरे ही प्रयास में उन्होंने वायुवीर परीक्षा में ऑल इंडिया में पहली रैंक हासिल कर सफलता की एक नई इबारत लिख दी. उनका यह सफर युवाओं के लिए एक बड़ी सीख है.
हाल ही में जब प्रियदर्शिनी अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वापस अपने गृह जिले बाड़मेर लौटीं, तो स्थानीय लोगों और उनके परिजनों ने उनका बहुत ही भव्य स्वागत किया. हर कोई इस बेटी की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा था. अपनी सफलता पर बात करते हुए प्रियदर्शिनी ने कहा कि उनके दादा के कंधे पर लगे दो सितारे बचपन से ही उनके लिए एक बड़ी प्रेरणा रहे हैं. उन्होंने हमेशा दादा को देखकर वर्दी पहनने और देश की सेवा करने का जो सपना देखा था, वह अब पूरा हो गया है. उन्होंने कहा कि जिस वर्दी को उन्होंने हमेशा सपने में देखा था, उसे पहनकर वह पूरी ईमानदारी, निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ देश और समाज की सेवा करेंगी.
प्रियदर्शिनी की यह शानदार कामयाबी अब पूरे इलाके की बेटियों और युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुकी है. जिस सरहदी क्षेत्र में अक्सर संसाधनों और सुविधाओं का रोना रोया जाता था, वहां की एक बेटी ने अपनी जिद और जुनून से यह साबित कर दिया है कि सफलता किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती. वायुवीर के रूप में उनकी इस नई उड़ान ने गांव की अन्य लड़कियों को भी घर की दहलीज से बाहर निकलकर अपने सपने साकार करने की एक नई उम्मीद दी है. उनका यह सफर बताता है कि अगर बेटियां ठान लें, तो वे किसी भी क्षेत्र में सर्वोच्च मुकाम हासिल कर देश का गौरव बढ़ा सकती हैं.
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September 16, 2026, 05:54 IST



