Famous Temple: 800 साल पुराना सोने का झूला, साल में एक बार खुलती है तिजोरी, जानें बंशीवाला मंदिर की अनोखी कहानी

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800 साल पुराना सोने का झूला, साल में एक बार होते हैं बंशीवाला के दर्शन
Last Updated:August 18, 2026, 07:45 IST
Nagar Seth Banshiwala Temple Nagaur: नागौर का नगर सेठ श्री बंशीवाला मंदिर इन दिनों वार्षिक झूलोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं से गुलजार है. इस आयोजन की सबसे खास पहचान करीब 800 साल पुराना स्वर्णमंडित झूला है, जिस पर भगवान बंशीवाला को विराजमान कराया जाता है. बताया जाता है कि सदियों पुराने इस झूले को अब तक एक बार भी मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ी. पूरे साल इसे सुरक्षा तिजोरी में रखा जाता है और साल में सिर्फ एक बार झूलोत्सव के दौरान निकाला जाता है. झूले के 100 से ज्यादा हिस्सों को जोड़कर तैयार करने में करीब डेढ़ घंटे का समय लगता है. मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के साथ रुक्मिणी और राधा जी विराजमान हैं. मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, पहले यहां गाय के स्वयं दूध देने की घटना के बाद जमीन से शिवलिंग प्रकट हुआ था, जिसके बाद पातालेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना हुई.
नागौर शहर के काठड़ियों का चौक स्थित प्रसिद्ध नगर सेठ श्री बंशीवाला मंदिर में वार्षिक झूलोत्सव का भव्य शुभारंभ हो गया है. उत्सव शुरू होते ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है. रोजाना पुजारी दीक्षांत द्वारा भगवान नगर सेठ का विशेष श्रृंगार किया जा रहा है. भगवान जो करीब 800 वर्ष पुराने स्वर्णमंडित झूले पर विराजमान किया जाता है. साल में केवल एक बार होने वाले इस विशेष आयोजन को लेकर भक्तों में खासा उत्साह है.
मंदिर में भगवान बंशीवाला को जिस झूले पर विराजमान कराया जाता है, वह करीब आठ शताब्दी पुराना बताया जाता है. दुर्लभ लकड़ी से बने इस झूले पर सोने की बेहद बारीक और कलात्मक परत चढ़ाई गई है.0 इसकी सबसे खास विशेषता इसके दोनों मुख्य खंभों पर बनाए गए 12 छोटे-छोटे उप-झूले हैं. इस झूला महोत्सव के दौरान भगवान बंशीवाला के विशेष दर्शन श्रद्धालुओं को रोजाना शाम सवा छह बजे से रात करीब 10:30 बजे तक होंगे.
करीब चार घंटे तक भक्त भगवान को झूले में विराजमान देखकर दर्शन कर सकेंगे. इस दौरान मंदिर में भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया जा रहा है. छोटी तीज से बड़ी तीज तक चलने वाली यह परंपरा श्रद्धालुओं के लिए सालभर में मिलने वाला विशेष अवसर है. इसी कारण आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचते हैं. इस ऐतिहासिक झूले से जुड़ी सबसे खास बात यह है कि करीब 800 वर्षों के लंबे इतिहास में इसे एक बार भी मरम्मत की आवश्यकता नहीं पड़ी.
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झूले को पूरे साल सुरक्षा तिजोरी में सुरक्षित रखा जाता है और साल में केवल एक बार विशेष आयोजन के दौरान बाहर निकाला जाता है. इसे तिजोरी से बाहर निकालने के बाद इसके 100 से अधिक छोटे-बड़े हिस्सों को आपस में जोड़कर व्यवस्थित तरीके से स्थापित किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में कारीगरों को करीब डेढ़ घंटे यानी 90 मिनट का समय लगता है. झूले को जोड़ने और स्थापित करने की प्रक्रिया बेहद सावधानी से पूरी की जाती है.
इसके प्रत्येक हिस्से को निर्धारित क्रम में लगाया जाता है, ताकि सदियों पुरानी संरचना को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे. आपको बता दें कि नगर सेठ श्री बंशीवाले मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की पत्नी रुक्मिणी और राधा जी का एक साथ मंदिर बना हुआ है. इस मंदिर की स्थापना से पहले यहां पर एक चमत्कारिक घटना हुई, जिसके बाद यहां पर बंशीवाला मंदिर की स्थापना हुई. मंदिर के पुजारी दीक्षांत बताते है कि करीब 800 साल इस मंदिर की स्थापना हुई थी. यहां पर बंशीवाला मंदिर से पहले पातालश्वेर महादेव मंदिर की स्थापना हुई.
ऐसा बताते है कि यहां पर पहले पहाड़ था और गाय चरने के लिए आती थी. लेकिन हमेशा एक गाय अपना दूध खुद से निकाल देती थी, तो इसका पता लगाने के लिए गाय का पीछा किया गया. पता चला कि जिस जमीन में शिवलिंग था, वहां पर गाय अपने आप दूध दे देती थी. इसके बाद पहाड़ की खुदाई की गई और यहां जमीन से शिवलिंग प्रकट हुआ. उसके बाद यहां पर पातालश्वेर महादेव मंदिर की स्थापना की गई. इसके बाद यहां श्री बंशीवाले मंदिर में भगवान श्री कृष्ण के साथ पत्नी रुक्मिणी और राधा जी को स्थापित किया गया.
First Published :
August 18, 2026, 07:45 IST



