Famous Temple: हवा में चट्टान पर टिका है यह शिवालय, इतिहास और प्रकृति का चमत्कार देखने पहुंचते हैं श्रद्धालु

होमताजा खबरधर्म
हवा में चट्टान पर टिका है यह शिवालय, 1200 साल पुराना मंदिर देख रह जाएंगे हैरान
Last Updated:August 18, 2026, 06:33 IST
Adharshila Mahadev Temple Bhilwara: भीलवाड़ा के पास पुर क्षेत्र में स्थित अधरशिला महादेव मंदिर अपनी अनोखी बनावट और करीब 1200 साल पुराने इतिहास के कारण श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. पहाड़ की विशाल चट्टान पर बना यह शिवालय पहली नजर में ऐसा दिखाई देता है, जैसे पूरा मंदिर हवा में टिका हुआ हो. मंदिर में शिव पंचायत विराजमान है और शिवलिंग के ऊपर की शिला बिना किसी दिखाई देने वाले सहारे के अधर में होने की बात स्थानीय लोग बताते हैं. मान्यता है कि यहां पूजा-अभिषेक करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. स्थानीय निवासी महिंद्र पायक के अनुसार, यहां राजस्थान और मध्य प्रदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर में रोजाना भगवान भोलेनाथ का सहस्त्रधारा अभिषेक और विशेष पूजा की जाती है. इसी परिसर में श्री चौरंगी नाथ महाराज की जीवित समाधि भी बताई जाती है.
ख़बरें फटाफट
भीलवाड़ा. सावन के मौके पर आज हम आपको भीलवाड़ा के पास एक ऐसा शिवालय के बारे बताने जा रहे हैं, जिसे देखकर पहली नजर में हर कोई हैरान रह जाता है. पहाड़ की एक विशाल चट्टान पर टिका अधरशिला महादेव मंदिर ऐसा नजर आता है, जैसे पूरा मंदिर हवा में लटका हुआ हो. करीब 1200 साल पुराने इस मंदिर को लेकर लोगों में गहरी आस्था है. खास बात यह है कि यहां धर्म और नेचर का ऐसा कनेक्शन देखने को मिलता है, जो इसे बाकी मंदिरों से अलग बनाता है.
पहाड़, चट्टान और उसके ऊपर बना शिवालय का नजारा किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगता. यही वजह है कि भीलवाड़ा और आसपास के इलाकों के साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं. कोई भगवान शिव के दर्शन के लिए आता है तो कोई इस अनोखी जगह और इसके इतिहास को करीब से देखने के लिए. अधरशिला महादेव मंदिर आज भी अपने रहस्य, मान्यताओं और नेचर की खूबसूरती के चलते लोगों के बीच खास आकर्षण बना हुआ है.
शहर से 15 किमी की दूरी पर है अधरशिला महादेव मंदिर
स्थानीय निवासी महिंद्र पायक ने लोकल18 को बताया कि भीलवाड़ा शहर से 15 किमी दूर पुर के निकट अधरशिला महादेव मंदिर है. यह मंदिर एक चट्टान पर टिका हुआ है, जिसके वजह से इसको अधरशिला महादेव मंदिर कहते हैं. इस मंदिर में राजस्थान, मध्य प्रदेश से शिव भक्त महादेव के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. यहां की मान्यता है कि यहां पर पूजा पाठ करने से भक्तों के सारे कष्ट, पीड़ा और दर्द दूर हो जाते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है.
मंदिर में विराजमान हैं शिव पंचायत
इस मंदिर में शिव पंचायत विराजमान है. शिवलिंग के ऊपर की शीला बिल्कुल अधर में है और कोई सपोर्ट नहीं है. रात्रि में जंगली जानवर आते हैं, लेकिन किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. प्रतिदिन यहां भगवान भोलेनाथ की सहस्त्रधारा कर विशेष शृंगार किया जाता है. भोले बाबा के शृंगार का विशेष महत्व नहीं है और वे निरंकारी हैं. इनके अभिषेक का विशेष महत्व होता है.
श्री चौरंगी नाथ महाराज का यहां है जीवित समाधि
स्थानीय निवासी महिंद्र पायक ने बताया कि भीलवाड़ा शहर के उपनगर पुर में स्थित अधरशिला महादेव मंदिर 1200 साल से अधिक प्राचीन है. यहां पर करीब 1200 साल पहले श्री चौरंगी नाथ महाराज ने तपस्या की थी. इसी मंदिर परिसर में उनकी जीवित समाधि भी है. यह एक दर्शनीय स्थान होने के साथ ही पर्यटन स्थल के रूप में भी काफी खूबसूरत है. यहां पर हर सोमवार और रविवार को शिव भक्त महादेव के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
और पढ़ेंLocation :
Bhilwara,Rajasthan
First Published :
August 18, 2026, 06:33 IST
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



