Rajasthan Assembly | Rajasthan Vidhansabha | वंदे मातरम् को लेकर घमासान, BJP का आरोप

जयपुर. राजस्थान विधानसभा के छठे सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायक दल के सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं होने पर सियासी घमासान छिड़ गया. सत्ता पक्ष ने कांग्रेस की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए और इसे वंदे मातरम् के गायन से बचने की कोशिश बताया. वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस विधायक बहिष्कार के कारण नहीं, बल्कि विधानसभा में प्रवेश से रोके जाने के कारण सदन तक नहीं पहुंच सके.
भाजपा के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कांग्रेस विधायकों के सदन में नहीं आने पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास अपनी बात रखने का पूरा मौका था. सरकार के खिलाफ कोई मुद्दा था तो उसे सदन में उठाया जा सकता था. गर्ग ने तंज करते हुए कहा कि संभवत कांग्रेस विधायक वंदे मातरम् के गायन में शामिल होने से बचने के लिए सदन में नहीं आए.
वंदे मातरम् पर भाजपा का आरोपसंसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने भी विपक्ष की गैरमौजूदगी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सत्र शुरू होने से पहले सर्वदलीय बैठक में सभी दलों के बीच विधानसभा की परंपराओं का पालन करने और सदन की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी को लेकर सहमति बनी थी. इसके बाद बिना किसी पूर्व सूचना के कांग्रेस विधायकों का सदन में नहीं आना उचित नहीं है. उन्होंने विपक्ष के इस कदम को लोकतंत्र की हत्या तक बताया.
कांग्रेस बोली, हमें गेट पर रोका गयाइन आरोपों पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस वंदे मातरम् का सम्मान करती है और गांधी, नेहरू तथा सरदार पटेल के समय से कांग्रेस के अधिवेशनों और कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का गायन होता रहा है. ऐसे में कांग्रेस पर वंदे मातरम् के अपमान का आरोप लगाना गलत है.
पलटवार में टीकाराम जूली ने क्या आरोप लगाएजूली ने आरोप लगाया कि विधानसभा पहुंचने पर कांग्रेस विधायकों को उस गेट से अंदर जाने से रोक दिया गया, जिसका इस्तेमाल विधायक सामान्य तौर पर करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें यह समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों किया गया. बाद में जब सत्ता पक्ष ने कांग्रेस पर वंदे मातरम् के गायन से बचने के आरोप लगाए तो उन्हें लगा कि यह पूरी साजिश का हिस्सा हो सकता है.
पहले गेट पर रोका फिर लगाया आरोपजूली ने कहा कि यदि गेट बंद नहीं किया जाता तो कांग्रेस विधायक सदन में पहुंचते. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले विधायकों को प्रवेश से रोका गया और फिर विपक्ष पर वंदे मातरम् के अपमान का आरोप लगा दिया गया. जूली के मुताबिक कांग्रेस विधायक इस मामले में विशेषाधिकार हनन का नोटिस लेकर आएंगे. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को विधानसभा में आने से रोकना गंभीर मामला है.
स्पीकर देवनानी ने जताई पीड़ाविधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सदन में विपक्ष की खाली सीटों को देखकर पीड़ा जताई. उन्होंने कहा कि विपक्ष को जनता से जुड़े मुद्दे सदन में उठाने का पूरा अधिकार और सम्मान है. ऐसे में सदन से दूर रहने के बजाय विपक्ष को अपनी बात विधानसभा के भीतर रखनी चाहिए. देवनानी ने सभी सदस्यों से सदन की कार्यवाही में भाग लेने की अपील की और कहा कि जो भी विषय और मुद्दे हैं, उन्हें सदन के अंदर रखा जाए, ताकि सत्ता पक्ष भी उन पर संज्ञान लेकर जवाब दे सके.
जूली ने उठाए शिक्षा, रोजगार और कानून-व्यवस्था के मुद्देटीकाराम जूली ने कहा कि जनता वंदे मातरम् के मुद्दे पर राजनीतिक विवाद नहीं चाहती, बल्कि शिक्षा, रोजगार, कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा चाहती है. उन्होंने सरकार से इन मामलों में जवाब मांगा और कहा कि विधानसभा का इस्तेमाल जनता की समस्याओं पर चर्चा के लिए होना चाहिए.
जूली ने मीडिया को लेकर क्या कहाजूली ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों और मीडिया पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं, ताकि सरकार की कमियां और कथित भ्रष्टाचार सामने न आए. उन्होंने कहा कि स्कूलों में जाने से रोका गया और विधानसभा पहुंचने पर भी रोक दिया गया. सरकार के इस कदम को उन्होंने पाप ढकने का ढक्कन बताया और कहा कि इस तरह के कानून को वापस लेना पड़ेगा.
पहले दिन दो विधेयक भी हुए पेश
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच विधानसभा सत्र के पहले दिन दो विधेयक भी सदन के पटल पर रखे गए. उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने गीतांजलि ग्लोबल विश्वविद्यालय जयपुर विधेयक, 2026 पेश किया. वहीं संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने राजस्थान वृक्ष संरक्षण विधेयक, 2026 सदन के पटल पर रखा. सदन में शोकाभिव्यक्ति के बाद कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई. हालांकि पहले ही दिन विपक्ष की गैरमौजूदगी ने विधानसभा का राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया. सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष को सदन में आकर सरकार से सवाल पूछने चाहिए, जबकि कांग्रेस का आरोप है कि उसे सदन तक पहुंचने से ही रोका गया.
आने वाले दिनों में इन बातों पर छिड़ सकती है बहसअब कांग्रेस की ओर से विशेषाधिकार हनन का नोटिस लाने की बात के बाद यह विवाद और आगे बढ़ सकता है. आने वाले दिनों में UCC समेत अलग-अलग विधेयकों और जनता से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव के आसार भी बने हुए हैं.



