जवाई में सख्त नियमों का शिकंजा! हर सफारी गाड़ी में GPS जरूरी, लेपर्ड से छेड़छाड़ पर भरना पड़ेगा भारी जुर्माना

Last Updated:May 02, 2026, 13:50 IST
Jawai Leopard Safari Regulations : जवाई में लेपर्ड संरक्षण और अनियंत्रित पर्यटन पर रोक के लिए प्रशासन सख्त हो गया है. नई SOP के तहत सभी सफारी वाहनों में GPS लगाना अनिवार्य होगा और नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना लगेगा. 60 दिन के ट्रांजिशन पीरियड में पंजीकरण और निगरानी व्यवस्था पूरी की जाएगी. प्रशासन का मकसद जवाई में बढ़ते शोर, भीड़ और वन्यजीवों पर पड़ रहे असर को नियंत्रित करना है.
एसओपी (SOP) की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद रिसॉर्ट संचालकों और वाहन स्वामियों को 60 दिन का समय दिया जाएगा. इस ‘ट्रांजिशन पीरियड’ के दौरान सभी गाड़ियों का पंजीकरण, जीपीएस इंस्टॉलेशन और ड्राइवरों से शपथ पत्र लेने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. डीसीएफ कस्तूरी प्रशांत सुले और उनकी टीम द्वारा तैयार की गई इस योजना में समझाइश का दौर खत्म होते ही नियमों को चरणबद्ध तरीके से पूरी कठोरता के साथ लागू किया जाएगा.
नई व्यवस्था के तहत अब जवाई में चलने वाले सभी सफारी वाहनों में जीपीएस (GPS) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है. निगरानी को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने एक बाहरी एजेंसी को नियुक्त करने का फैसला लिया है, जो जीपीएस डेटा की मॉनिटरिंग करेगी. इससे डेटा के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म हो जाएगी.बेहतर प्रबंधन के लिए पूरे जवाई क्षेत्र को चार अलग-अलग क्लस्टरों में बांटा गया है, ताकि हर संवेदनशील इलाके और गांव पर पैनी नजर रखी जा सके.
जवाई की पहाड़ियों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह रही है कि सरकारी रिकॉर्ड में ये ‘राजस्व भूमि’ के रूप में दर्ज हैं, न कि वन भूमि के रूप में. इसी कानूनी लूपहोल का फायदा उठाकर कई रिसॉर्ट्स को एनओसी (NOC) मिल गई. रिकॉर्ड में जहाँ जंगल नहीं था, वहां लेपर्ड की सक्रिय गुफाएं और ब्रीडिंग साइट्स मौजूद थीं. बाली क्षेत्र के कोठार गांव जैसे उदाहरण बताते हैं कि पहाड़ियों के ठीक ऊपर निर्माण कार्य होने से लेपर्ड्स ने अपनी मांद छोड़ दी है, जो वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी चिंता का विषय है.
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इको-टूरिज्म’ से बदलकर ‘शो-टूरिज्म’ हो गया था. सीजन के दौरान एक साथ 300 से ज्यादा जिप्सियों का शोर, फ्लैशलाइट्स और गुफाओं के बाहर बढ़ती भीड़ ने लेपर्ड्स के व्यवहार को प्रभावित किया है. नई व्यवस्था का लक्ष्य इसी शोर और अनियंत्रित पर्यटन को खत्म करना है. प्रशासन का मानना है कि इन बदलावों से न केवल प्रकृति का संतुलन बना रहेगा, बल्कि जवाई की वैश्विक पहचान एक जिम्मेदार पर्यटन स्थल के रूप में बनी रहेगी.
नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में ‘जवाई सफारी एंड इको-टूरिज्म कोऑर्डिनेशन कमेटी’ का गठन किया गया है. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9 के तहत अब कई गतिविधियों को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है. इसमें नाइट सफारी, लेपर्ड को पास बुलाने के लिए मांस डालना (बैटिंग), चारा डालना, ड्रोन उड़ाना और जीपीएस के साथ छेड़छाड़ करना शामिल है. नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन को तुरंत ब्लैकलिस्ट करने के साथ-साथ 25 हजार रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा.
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