Karauli News: सुख-सुविधाओं से भरा परिवार, लेकिन दिल में बसी आध्यात्मिकता, दो बहनों ने चुना संन्यास जैसा जीवन

Last Updated:October 16, 2026, 18:39 IST
Karauli News: नागपुर की सगी बहनें कविता और प्रिया ने सुख-सुविधाओं से भरे जीवन और करियर की दौड़ से अलग आध्यात्मिकता की राह चुनी. बीएससी और IT की पढ़ाई करने वाली प्रिया ने 21 साल की उम्र में ईश्वरीय सेवा को अपना लक्ष्य बनाया. अब दोनों ब्रह्माकुमारी बहनें राजस्थान के करौली में राजयोग मेडिटेशन और आध्यात्मिक ज्ञान के जरिए लोगों को शांति का संदेश दे रही हैं.
जिस उम्र में युवा अपने करियर, नौकरी, रिश्तों और बेहतर भविष्य के सपने संजोते हैं, उसी उम्र में महाराष्ट्र के नागपुर की दो सगी बहनों ने सांसारिक जीवन की चकाचौंध से दूरी बनाकर आध्यात्मिकता का रास्ता चुन लिया. सुख-सुविधाओं से संपन्न परिवार में पली-बढ़ीं कविता और प्रिया ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपना पूरा जीवन ईश्वरीय सेवा के लिए समर्पित कर दिया हैं.
अब दोनों ब्रह्माकुमारी बहनों के रूप में राजस्थान के करौली में लोगों को आत्मा और परमात्मा का संबंध समझाने के साथ राजयोग मेडिटेशन और आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश दे रही हैं.दोनों बहनों का कहना है कि उनके जीवन का अब कोई व्यक्तिगत लक्ष्य नहीं, बल्कि एक ही संकल्प है—परमात्मा का दिव्य संदेश अधिक से अधिक आत्माओं तक पहुंचाना और लोगों को शांति का अनुभव कराना हैं.
आज के दौर में पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं की पहली प्राथमिकता अच्छी नौकरी, करियर और सफलता हासिल करना होती है. लेकिन कविता और प्रिया ने जीवन के लिए बिल्कुल अलग राह चुनी. दोनों ने अपनी पढ़ाई पूरी की और इसके बाद ईश्वरीय ज्ञान के मार्ग पर चलने का निर्णय लिया.
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छोटी बहन प्रिया बताती हैं कि उनके माता-पिता पहले से ही इस ज्ञान मार्ग से जुड़े हुए थे. परिवार के वातावरण में बचपन से ही उन्हें आध्यात्मिकता को करीब से समझने का अवसर मिला. वहीं उनकी बड़ी बहन कविता पहले ही इस सेवा में समर्पित हो चुकी थीं. बड़ी बहन को देखकर प्रिया के मन में भी इस मार्ग को समझने और अपनाने की इच्छा पैदा हुई. फिर जैसे-जैसे उन्होंने इस ज्ञान को समझा और इसका अनुभव किया, उनके मन में आध्यात्मिक जीवन के प्रति रुचि बढ़ती चली गई.
इसके बाद पढ़ाई पूरी होते ही प्रिया ने 21 वर्ष की उम्र में ईश्वरीय सेवा का रास्ता चुन लिया. उन्होंने बीएससी और आईटी की पढ़ाई की है.प्रिया कहती हैं कि अब उनकी इच्छा है कि दुनिया की अधिक से अधिक आत्माओं तक परमात्मा का संदेश पहुंचे और तनाव, चिंता तथा परेशानियों से जूझ रहे लोगों को मन की शांति का रास्ता मिल सके.
बड़ी बहन कविता की कहानी भी किसी प्रेरणादायक सफर से कम नहीं है. कविता बताती हैं कि बचपन में उनकी दादी इस ज्ञान मार्ग से जुड़ी हुई थीं. दादी को देखकर उनके मन में भी आध्यात्मिक जीवन को समझने की जिज्ञासा पैदा हुई.उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इस ज्ञान को अपने जीवन में अपनाकर इसका व्यावहारिक अनुभव किया तो उन्हें भीतर से काफी सकारात्मक अनुभूति हुई. और फिर धीरे-धीरे यह मार्ग उनके जीवन का हिस्सा बन गया.
कविता बताती हैं कि उनके परिवार में माता-पिता के अलावा तीन बहनें हैं. उनका कोई भाई नहीं है. परिवार से उन्हें हमेशा आध्यात्मिक ज्ञान को समझने और जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिली.तीनों बहनों में सबसे पहले कविता ने इस ज्ञान मार्ग को अपनाया. बड़ी बहन को इस राह पर चलते देखकर छोटी बहन प्रिया भी प्रभावित हुईं और उन्होंने भी ईश्वरीय सेवा का रास्ता चुन लिया. वहीं दूसरी बहन ने विवाह के बाद गृहस्थ जीवन अपना लिया.
यें दोनों सगी बहननें नागपुर के एक सुखी-संपन्न परिवार से आती हैं. उनके पिता कोयला क्षेत्र की कंपनी डब्ल्यूसीएल में अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं.परिवार में सुख-सुविधाओं की कमी नहीं होने के बावजूद दोनों बहनों ने व्यक्तिगत सुख और भौतिक जीवन की बजाय आध्यात्मिकता को अपने जीवन का आधार बनाया. अब उनका जीवन लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान देने, राजयोग सिखाने और समाज में शांति का संदेश फैलाने के लिए समर्पित है.
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October 16, 2026, 11:33 IST



