Sikar News | animal feed testing laboratory

Last Updated:June 25, 2026, 22:28 IST
Sikar News : सीकर जिला मुख्यालय पर पशु पोषाहार प्रयोगशाला शुरू हो गया है. अब यहीं चारे की गुणवत्ता जांच होगी. इससे समय और खर्च बचेगा. आगे प्रोटीन फाइबर वसा जांच की सुविधा भी मिलेगी. प्रयोगशाला प्रभारी डॉ. वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि अभी प्रथम चरण में पशुचारे में मौजूद मिट्टी, नमी और राख की मात्रा की जांच की जाएगी. यह जांच पशुपालकों को यह समझने में मदद करेगी कि उनके पशुओं को दिया जा रहा चारा कितना शुद्ध और उपयोगी है.
सीकर जिले के पशुपालकों के लिए राहत की खबर है. अब उन्हें अपने पशुओं के चारे की गुणवत्ता जांच करवाने के लिए जयपुर या अन्य बड़े शहरों की प्रयोगशालाओं के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी. क्यूंकि, यह सुविधा उन्हें सीकर शहर में ही मिलने वाली है. पशुपालकों की इस समस्या के समाधान के लिए जिला मुख्यालय पर स्थापित पशु पोषाहार प्रयोगशाला में चारे की गुणवत्ता जांच की सुविधा शुरू कर दी गई है. यहां कई तरह के नए उपकरण भी लगाए गए हैं.
इस सुविधा के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर ही चारे की गुणवत्ता का परीक्षण आसान हो सकेगा. इस सुविधा से पशुपालकों को समय, श्रम और धन तीनों की बचत होगी और उन्हें बेहतर सेवाएं भी मिल सकेगी. प्रयोगशाला प्रभारी डॉ. वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि अभी प्रथम चरण में पशुचारे में मौजूद मिट्टी, नमी और राख की मात्रा की जांच की जाएगी. यह जांच पशुपालकों को यह समझने में मदद करेगी कि उनके पशुओं को दिया जा रहा चारा कितना शुद्ध और उपयोगी है.
उन्होंने बताया कि कई बार चारे में अत्यधिक नमी या मिट्टी होने के कारण उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. नई व्यवस्था के जरिए ऐसी कमियों की समय रहते पहचान कर सुधार किया जा सकेगा. प्रयोगशाला के दूसरे चरण में और अधिक उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. प्रदेश स्तर से आधुनिक मशीनें मिलने के बाद चारे में प्रोटीन, फाइबर और वसा की जांच भी शुरू की जाएगी. ये तत्व पशुओं के पोषण और उत्पादकता के लिए बेहद अहम माने जाते हैं.
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पशु चारे में पोषण तत्वों की सटीक जांच होने से पशुपालकों को यह जानकारी मिलेगी कि उनके पशुओं को संतुलित आहार मिल रहा है या नहीं. इससे पशुओं के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा. डॉ. वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि करीब 16 लाख रुपये की लागत से से यह प्रयोगशाला विकसित की जाएगी. यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ पशुपालन क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की दिशा में मिल का पत्थर साबित होगी.
आपको बता दें कि अब तक पशुचारे के नमूनों की जांच के लिए विभाग को सैंपल जयपुर अथवा अन्य बड़े केंद्रों पर भेजने पड़ते थे. इस प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था और जांच रिपोर्ट मिलने में देरी होती थी. कई बार परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ता था. स्थानीय स्तर पर प्रयोगशाला शुरू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया अधिक सरल, तेज और सुविधाजनक बन जाएगी, जिससे पशुपालकों को समय पर सही जानकारी उपलब्ध हो सकेगी.
नई प्रयोगशाला शुरू होने से मिलावटी, घटिया अथवा पोषणहीन पशुचारे की पहचान करना आसान होगा. पशुपालक अपने चारे की गुणवत्ता की प्रमाणित जांच करवाकर यह सुनिश्चित कर सकेंगे कि उनके पशुओं को पर्याप्त और संतुलित पोषण मिल रहा है. इससे पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी, स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और दूध उत्पादन में भी वृद्धि होगी. गुणवत्तापूर्ण पशु आहार सीधे तौर पर पशुपालकों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
प्रभारी पोषण प्रयोगशाला डॉ. वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि जिला मुख्यालय पर तैयार की गई पशु पोषाहार प्रयोगशाला के लिए आवश्यक उपकरण प्राप्त हो चुके हैं और उन्हें स्थापित भी कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला पूरी तरह से शुरू होते ही पशुचारे के नमूनों की नियमित जांच प्रारंभ कर दी जाएगी. प्रारंभिक चरण में तीन प्रकार की जांच की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जबकि भविष्य में और उन्नत परीक्षण भी किए जाएंगे, जिससे जिले के पशुपालकों को व्यापक लाभ मिल सकेगा.
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