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Sikar | Onion Farming | सीकर की लाइफलाइन है प्याज की खेती, 60 हजार परिवारों की रोजी-रोटी, हर साल 400 करोड़ का कारोबार

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सीकर की लाइफलाइन है प्याज की खेती, 60000 परिवारों से 400 करोड़ का कारोबार

Last Updated:July 08, 2026, 19:08 IST

Sikar Me Pyaaj Ki Kheti : सीकर जिला शिक्षा के साथ मीठे प्याज उत्पादन में भी अग्रणी है. 22 हजार हेक्टेयर में 74-75 लाख मीट्रिक टन प्याज उत्पादन होता है, जिससे 60 हजार से अधिक परिवारों को रोजगार मिलता है. अनुमान के अनुसार जिले में हर साल करीब 400 करोड़ रुपए का प्याज कारोबार होता है. यह नकदी फसल होने के कारण किसानों के हाथ में सीधे पैसा पहुंचाती है.

सीकर. शेखावाटी का सीकर जिला सिर्फ शिक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि मीठे प्याज के उत्पादन के लिए भी पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखता है. जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में प्याज की खेती को रीढ़ की हड्डी माना जाता है. यही वजह है कि यहां के मीठे प्याज की खेती को जिले की लाइफलाइन कहा जाता है. यहां हजारों परिवारों की आय, स्थानीय मंडियों की रौनक और बाजार में नकदी का प्रवाह काफी हद तक इसी फसल पर निर्भर रहता है. यहां उगने वाले प्याज की मांग केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, असम सहित कई राज्यों में रहती है.

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट और उन्नत किसान नरेंद्र धायल ने बताया कि सीकर जिले में हर साल करीब 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज की खेती की जाती है. अनुकूल जलवायु और किसानों के अनुभव के कारण यहां औसतन 340 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन होता है. इसी के चलते सीकर में हर वर्ष लगभग 74 से 75 लाख मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन होता है. यह उत्पादन न केवल राजस्थान की जरूरत पूरी करता है, बल्कि दूसरे राज्यों की मंडियों तक भी पहुंचता है.

60 हजार से अधिक परिवारों की आजीविका का आधारप्याज की खेती जिले के 60 हजार से अधिक किसान परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है. बुवाई से लेकर खुदाई, छंटाई, भंडारण और परिवहन तक हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है. ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार पूरे साल की आर्थिक योजना इसी फसल से होने वाली आय के आधार पर बनाते हैं. इसलिए प्याज से जुड़ी किसी भी सरकारी योजना या नीति का सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है.

हर साल करीब 400 करोड़ रुपए का कारोबारआर्थिक दृष्टि से भी प्याज सीकर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. अनुमान के अनुसार जिले में हर साल करीब 400 करोड़ रुपए का प्याज कारोबार होता है. यह नकदी फसल होने के कारण किसानों के हाथ में सीधे पैसा पहुंचाती है, जिससे स्थानीय बाजारों में खरीदारी बढ़ती है और व्यापार को गति मिलती है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सीकर की अर्थव्यवस्था में प्याज का योगदान किसी बड़े औद्योगिक क्षेत्र से कम नहीं है.

किसान खुद तैयार करते हैं बीजकिसान नरेंद्र धायल ने बताया कि सीकर जिले का प्याज अन्य क्षेत्रों में होने वाले प्याज की तुलना में अधिक स्वादिष्ट और मीठा होता है. इसका कारण यहां की जलवायु और किसानों द्वारा अपनाई जाने वाली पारंपरिक खेती की पद्धति है. उन्होंने बताया कि यहां के किसान प्याज की खेती के लिए बीज बाजार से खरीदकर नहीं लाते, बल्कि अपने खेतों में ही प्याज की पौध तैयार करते हैं. यही कारण है कि यहां के प्याज के साथ-साथ उसकी पौध की भी दूसरे राज्यों में भारी मांग रहती है.

भंडारण सुविधाएं बढ़ें तो मिलेगा बेहतर लाभकिसान नरेंद्र धायल ने बताया कि यदि किसानों को पर्याप्त भंडारण सुविधाएं मिलें तो वे फसल को कम कीमत पर बेचने के बजाय उचित समय तक सुरक्षित रख सकेंगे. इससे उन्हें बेहतर दाम मिलेंगे और उनकी आय में बढ़ोतरी होगी. साथ ही बाजार में कीमतों का संतुलन भी बना रहेगा. यही वजह है कि किसान संगठन प्याज भंडारण से जुड़ी योजनाओं को और मजबूत बनाने की मांग कर रहे हैं. उनका मानना है कि सीकर जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक जिले में भंडारण क्षमता बढ़ाना किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था, दोनों के लिए बेहद जरूरी है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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