Singapore PM Salary Hike : दुनिया के सबसे अमीर प्रधानमंत्री को मिली 64% सैलरी हाइक, ट्रंप से 7 गुना ज्यादा पैसा, तुरंत जनता को किया खुश

दुनिया के सबसे अमीर प्रधानमंत्री की कमाई अब और बढ़ गई है. उनकी सैलेरी में इतना तगड़ा इजाफा हुआ है कि पूरी दुनिया हैरान रह गई है. इस प्रधानमंत्री की सैलेरी दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी 7 गुना ज्यादा है. ये हैरान कर देने वाला मामला सिंगापुर का है, जहां के प्रधानमंत्री लॉरेंस वॉन्ग को 64 परसेंट सैलरी हाइक मिली है. हालांकि, वॉन्ग के दुनिया के सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले लीडर बनते ही एक मुसीबत भी आ खड़ी हुई. ये बात कई लोगों को पसंद नहीं आई और बगावती सुर उठने लगे. यहां पर प्रधानमंत्री ने मामला तुरंत संभाला और एक ऐसा ऐलान किया जिससे विरोधी भी खुश कर दिया.
सिंगापुर के अमीर प्रधानमंत्री को कितनी मिलेगी सैलरी?
सरकार ने प्रधानमंत्री लॉरेंस वॉन्ग के वेतन में 64 प्रतिशत का भारी इजाफा किया है, जिसके बाद अब उनकी सालाना कमाई 2.2 मिलियन सिंगापुर डॉलर से बढ़कर सीधे 3.6 मिलियन सिंगापुर डॉलर यानी करीब 26.9 करोड़ रुपए हो जाएगी. 15 साल बाद हुए इस ऐतिहासिक बदलाव के बाद वॉन्ग की सैलरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से भी कई गुना ज्यादा हो चुकी है.
इस भारी सैलरी हाइक के बाद सिंगापुर की आम जनता के बीच बड़ी बहस छिड़ गई है. विवाद को बढ़ता देख पीएम वॉन्ग ने ये बड़ा ऐलान किया है कि वो अपनी बढ़ी हुई सैलरी का पूरा हिस्सा अगले 5 सालों तक किसी चैरिटी में दान करेंगे.
15 साल बाद सैलरी में हुआ 64% का बड़ा उछाल
सिंगापुर सरकार के नए फैसले के मुताबिक, प्रधानमंत्री लॉरेंस वॉन्ग की सैलरी में ये बढ़ोत्तरी 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रही है. अब तक उन्हें हर साल 2.2 मिलियन सिंगापुर डॉलर मिलते थे. नए सैलरी फ्रेमवर्क के तहत अब ये बढ़कर 3.6 मिलियन सिंगापुर डॉलर हो जाएगा. अमेरिकी डॉलर में कहें तो ये रकम लगभग 2.85 मिलियन डॉलर बनती है. अगर इसे भारतीय रुपयों में समझें तो ये लगभग 26.9 करोड़ रुपये सालाना बैठती है. इसका सीधा मतलब ये है कि सिंगापुर के पीएम को हर महीने करीब 3 लाख सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 2.25 करोड़ रुपए सैलरी मिलेगी.
दुनिया के ताकतवर नेताओं से तुलना में कहां खड़े हैं वॉन्ग?
वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सालाना 4 लाख अमेरिकी डॉलर यानी करीब 3.3 करोड़ रुपए सैलरी मिलती है. यानी सिंगापुर के पीएम की कमाई अमेरिकी राष्ट्रपति से लगभग सात गुना ज्यादा है.
इसी तरह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को हर साल करीब 2 लाख 30 हजार डॉलर यानी लगभग 1.9 करोड़ रुपए मिलते हैं.
हांगकांग के चीफ एग्जीक्यूटिव को लगभग 7 लाख 19 हजार डॉलर और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति को करीब 6 लाख 6 हजार डॉलर सालाना दिए जाते हैं.
इन सभी दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए लॉरेंस वॉन्ग दुनिया में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले सरकारी प्रमुख बन गए हैं.
आखिर क्यों सिंगापुर अपने नेताओं को देता है इतनी भारी सैलरी?
अक्सर ये सवाल उठता है कि सिंगापुर जैसा छोटा सा देश अपने नेताओं को इतनी मोटी सैलरी क्यों देता है? सिंगापुर सरकार का इस पर बहुत साफ नजरिया रहा है. उनका मानना है कि देश चलाने के लिए प्राइवेट सेक्टर से सबसे काबिल और होशियार लोगों को राजनीति में लाना बेहद जरूरी है.
अगर राजनीति में कम पैसे मिलेंगे तो देश के बड़े एक्सपर्ट्स, वकील और बिजनेसमैन सरकारी सेवा में आने से कतराएंगे. इसके अलावा सिंगापुर का मानना है कि नेताओं को अच्छी सैलरी देने से भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का खतरा बहुत हद तक खत्म हो जाता है. सिंगापुर में नेताओं की सैलरी तय करने के लिए देश के टॉप 1000 सबसे ज्यादा कमाने वाले नागरिकों की कमाई को बेंचमार्क माना जाता है.
सिंगापुर की आम जनता और नेताओं की कमाई में कितना बड़ा फर्क?
सिंगापुर में भले ही प्रति व्यक्ति आय अच्छी हो, लेकिन आम जनता और नेताओं की सैलरी के बीच का अंतर काफी बड़ा है. साल 2025 के आंकड़ों के मुताबिक सिंगापुर में एक आम नागरिक की औसत मासिक कमाई यानी मीडियन सैलरी करीब 5,775 सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 4.31 लाख रुपये महीना थी.
वहीं दूसरी तरफ देश के प्रधानमंत्री को हर महीने करीब 2.25 करोड़ रुपये मिलेंगे. इस बड़े अंतर की वजह से ही सिंगापुर की जनता, नेताओं की सैलरी पर सवाल उठाती है. पीएम लॉरेंस वॉन्ग ने भी माना कि नेताओं की सैलरी एक बेहद सेंसेटिव मुद्दा है, लेकिन उन्होंने कहा कि ये फैसला देश को बेहतर नेतृत्व देने के लिए जरूरी है.
विवाद से बचने के लिए पीएम ने उठाया बड़ा कदम
जनता के मूड और सैलरी हाइक को लेकर हो रही चर्चा को समझते हुए प्रधानमंत्री लॉरेंस वॉन्ग ने एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि सैलरी में जो 64% का इजाफा हुआ है, उस बढ़ी हुई रकम को वो अगले 5 सालों तक अपने पास नहीं रखेंगे बल्कि किसी चैरिटी में दान कर देंगे. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ये मुद्दा सिर्फ पैसों का नहीं है. ये इस बात से जुड़ा है कि सिंगापुर को आने वाले समय में सबसे काबिल लीडरशिप मिलती रहे. उन्होंने कहा कि देश को आगे ले जाने और जनता की सेवा करने के लिए सही लोगों को चुनना बहुत जरूरी है.
सिर्फ पीएम ही नहीं, बाकी मंत्रियों का भी बढ़ेगा लिफाफा
सिंगापुर में सिर्फ प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि सरकार के बाकी मंत्रियों की सैलरी में भी बदलाव किया जा रहा है. किसी जूनियर मंत्री की बेसिक बेंचमार्क सैलरी को 1.1 मिलियन सिंगापुर डॉलर से बढ़ाकर 1.8 मिलियन सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 13.4 करोड़ रुपए तय किया गया है. हालांकि सरकार ने कहा है कि सभी मंत्रियों को तुरंत 1.8 मिलियन डॉलर नहीं मिलेंगे. शुरुआत में उनके काम और जिम्मेदारी के हिसाब से 9 फीसदी तक की ही बढ़ोतरी होगी. पीएम वॉन्ग का अनुमान है कि इस सरकारी कार्यकाल के अंत तक ज्यादातर मंत्रियों की सालाना सैलरी 1.35 मिलियन सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 10.1 करोड़ रुपए के आसपास पहुंच जाएगी.
सिंगापुर में सैलरी हाइक का इतिहास और चुनौतियां
सिंगापुर में राजनेताओं की सैलरी में आखिरी बार बड़ा बदलाव साल 2012 में हुआ था, जब जनता के विरोध के बाद मंत्रियों की सैलरी में 36 फीसदी की भारी कटौती की गई थी. इसके बाद 2017 में कमेटी ने सैलरी बढ़ाने की सिफारिश की थी, लेकिन सरकार ने उसे टाल दिया था. फिर 2023 में भी आर्थिक अनिश्चितता के कारण इस फैसले को रोक दिया गया था.
अब 15 साल बाद दिसंबर 2025 में बनी इंडिपेंडेंट कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सैलरी बढ़ाने का ये फैसला लिया गया है. हालांकि, एक्पर्ट्स का कहना है कि बहुत ज्यादा सैलरी होने से नेता आम जनता के सुख-दुख से दूर होकर सिर्फ अमीर वर्ग के करीब महसूस करने लग सकते हैं. भले ही सिंगापुर में भ्रष्टाचार के मामले बहुत कम आते हैं, फिर भी 2024 में पूर्व परिवहन मंत्री एस. ईश्वरन को भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल जाना पड़ा था.
कॉर्पोरेट स्टाइल में सरकार चलाने का अनोखा मॉडल
सिंगापुर का ये मॉडल दुनिया के बाकी देशों से बिल्कुल अलग है. जहां ज्यादातर देशों में नेताओं की सैलरी को लेकर राजनीति होती है और उसे कम से कम रखने का दिखावा किया जाता है, वहीं सिंगापुर साफ तौर पर कॉर्पोरेट स्टाइल में सरकार को चलाता है.
सिंगापुर का मानना है कि अगर देश को तरक्की के रास्ते पर आगे ले जाना है, तो दुनिया के सबसे होशियार लोगों को राजनीति में लाना ही होगा और उसके लिए उन्हें सही कीमत देनी ही पड़ेगी. लॉरेंस वॉन्ग की ये नई सैलरी अब पूरी दुनिया में चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है.



