शाहरुख के साथ 1992 में डेब्यू करने वाला स्टारकिड, पर्दे पर नहीं जमा पाया धाक, दिव्या भारती भी नहीं बचा पाईं करियर

Last Updated:April 24, 2026, 12:00 IST
साल 1992 बॉलीवुड के लिए बदलाव का साल था, जहां शाहरुख खान ने ‘दीवाना’ से धूम मचाई, वहीं मशहूर प्रोड्यूसर-डायरेक्टर बृज सदाना के बेटे कमल सदाना ने ‘बेखुदी’ से डेब्यू किया. कमल को उस जमाने का सबसे होनहार स्टारकिड माना जाता था. उनके पास चॉकलेटी लुक्स और काफी टैलेंटेड भी माना जाता था. ‘बेखुदी’ से कमल के साथ-साथ काजोल ने भी फिल्मी पर्दे पर कदम रखा था. बाद में, कमल को दिव्या भारती जैसी सुपरस्टार का भी सपोर्ट मिला, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. जहां शाहरुख ‘बादशाह’ बन गए, वहीं कमल सदाना अपनी शुरुआती सफलता को बड़े करियर में बदलने में नाकाम रहे.
नई दिल्ली. कमल सदाना ने 1992 में फिल्म ‘बेखुदी’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की. यह फिल्म आज भी काजोल के डेब्यू के लिए याद की जाती है. इस फिल्म में कमल सदाना को एक चॉकलेटी हीरो के तौर पर दिखाया गया था. हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर एवरेज रही, लेकिन कमल के चॉकलेटी लुक्स ने उन्हें लाइमलाइट में ला दिया. उसी साल शाहरुख खान ने भी इंडस्ट्री में एंट्री की और इंडस्ट्री में दोनों के बीच तुलना होने लगी.
कमल सदाना के करियर का सबसे बड़ा पल 1993 में आया, जब वे फिल्म ‘रंग’ में दिखे. उस समय दिव्या भारती बॉलीवुड की सबसे बड़ी सेंसेशन थीं. फिल्म के गाने ‘तुझे ना देखूं तो चैन’ ने पूरे देश में धूम मचा दी थी. फिल्मके गाने जरूर सुपरहिट रहे, लेकिन यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर एवरेज रही, इसके बावजूद उस वक्त सभी को ऐसा लगा कि कमल सदाना का करियर जरूर ऊंचाइयों पर पहुंचेगा.
लेकिन, बदकिस्मती से दिव्या भारती की अचानक मौत ने न सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री को चौंका दिया, बल्कि कमल सदाना के लिए सफलता के दरवाजे भी धीरे-धीरे बंद कर दिए. कमल सदाना को एक भी ऐसी फिल्म नहीं मिली, जो उन्हें ए-लिस्ट एक्टर्स की कैटेगरी में पहुंचा सके.
Add as Preferred Source on Google
‘रंग’ के बाद, कमल ‘बाली उमर को सलाम’, ‘हम सब चोर हैं’ और ‘रॉक डांसर’ जैसी फिल्मों में दिखे, जो दर्शकों को थिएटर तक खींचने में नाकाम रहीं. 90 के दशक के बीच तक, शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान की लहर ने कई दूसरे उभरते सितारों के करियर को किनारे कर दिया. कमल सदाना भी इस कॉम्पिटिशन में खुद को साबित नहीं कर पाए.
कमल सदाना की जिंदगी पर्सनली बहुत चैलेंजिंग थी. एक बार खुग उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया था कि उनके जन्मदिन पर उनके प्रोड्यूसर-डायरेक्टर पिता बृज सदाना ने परिवार पर गोली चला दी, जिसमें उनकी मां और बहन की मौत हो गई. इस भयानक घटना ने कमल को मानसिक रूप से हिलाकर रख दिया था, जिसका असर उनकी प्रोफेशनल लाइफ पर भी पड़ा.
अक्सर कहा जाता है कि अगर किसी एक्टर के पास दिव्या भारती जैसा लकी चार्म हो, तो उसका करियर चमक सकता है. ‘रंग’ में दोनों की केमिस्ट्री बहुत अच्छी थी, लेकिन कमल सदाना को उसका फायदा नहीं मिला. दिव्या भारती के निधन के बाद कमल एक हिट को तरसते रह गए और उनका भविष्य अंधकारमय हो गया.
जब एक्टिंग नहीं चली, तो कमल ने डायरेक्शन और प्रोडक्शन की ओर रुख किया. उन्होंने ‘विक्टोरिया नंबर 1’ डायरेक्ट की. उन्होंने ‘203’ (रीमेक) और ‘रोर: टाइगर्स ऑफ द सुंदरबंस’ जैसी फिल्में बनाईं. हाल के सालों में, वह कुछ वेब सीरीज और फिल्मों (जैसे ‘पीपा’) में छोटे लेकिन असरदार रोल में दिखे हैं, लेकिन वह कभी भी उस मेनस्ट्रीम सुपरस्टारडम तक नहीं पहुंच पाए जिसकी उनसे 1992 में उम्मीद की गई थी.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।First Published :
April 24, 2026, 12:00 IST



