Rajasthan

Success Story: 52 की उम्र, 18 हजार फीट की ऊंचाई और 122 KM की दौड़, सीकर के पवन ढाका ने रचा इतिहास

Last Updated:September 13, 2026, 10:12 IST

Pawan Dhaka Success Story: सीकर के 52 वर्षीय पवन ढाका ने लद्दाख सिल्क रूट अल्ट्रा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 52 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में पहला स्थान हासिल किया है. करीब 122 किलोमीटर लंबी इस अल्ट्रा रेस में धावकों को समुद्र तल से 11 हजार से 18 हजार फीट तक की ऊंचाई पर दौड़ना पड़ा. बेहद कम ऑक्सीजन, कड़ाके की ठंड, पहाड़ी चढ़ाई-उतराई और मौसम की चुनौती के बावजूद पवन ने रफ्तार बनाए रखी. उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें ट्रॉफी के साथ 1.75 लाख रुपए की पुरस्कार राशि मिली. पवन इससे पहले 2025 में भी इस रेस में हिस्सा लेकर अपने आयु वर्ग में प्रथम स्थान हासिल कर चुके हैं.

सीकर. उम्र 52 के पार हो चुकी थी, सामने 122 किलोमीटर की लंबी दौड़ थी और रास्ता भी ऐसा, जहां हर कदम के साथ सांसों की चुनौती बढ़ती जाती है. समुद्र तल से 11 हजार से लेकर करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई, बेहद कम ऑक्सीजन, कड़ाके की ठंड और पहाड़ी रास्ते… इन मुश्किलों के बीच सीकर के पवन ढाका ने ऐसा प्रदर्शन किया कि हर कोई उनकी हिम्मत को सलाम कर रहा है. पवन ने लद्दाख सिल्क रूट अल्ट्रा में 52 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में पहला स्थान हासिल किया है.

लद्दाख की पहाड़ियों में आयोजित इस अल्ट्रा रेस का सफर सामान्य मैराथन से बिल्कुल अलग था. करीब 122 किलोमीटर का रास्ता समुद्र तल से 11 हजार से 18 हजार फीट की ऊंचाई के बीच था. जैसे-जैसे धावक ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं, हवा में ऑक्सीजन कम होती जाती है. ऐसे में लंबे समय तक दौड़ना शरीर के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. इसके साथ ही पहाड़ी चढ़ाई-उतराई, ठंड और मौसम में अचानक बदलाव ने भी रेस को कठिन बनाया.

52 की उम्र के बाद भी नहीं छोड़ी रफ्तार

पवन ढाका ने 52 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के प्रतिभागियों के बीच उन्होंने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया. उनकी इस उपलब्धि के साथ उन्हें ट्रॉफी और 1.75 लाख रुपए की पुरस्कार राशि भी मिली. पवन की जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि अल्ट्रा रेस में केवल तेज दौड़ना ही काफी नहीं होता, बल्कि शरीर को लंबे समय तक लगातार मेहनत करने के लिए तैयार रखना पड़ता है.

ऑक्सीजन कम था लेकिन हौसला रहा बुलंद

पवन के मुताबिक लद्दाख की ऊंचाई पर मैदानी इलाकों की तुलना में ऑक्सीजन का स्तर काफी कम रहता है. इसका सीधा असर शरीर की क्षमता पर पड़ता है. 122 किलोमीटर जैसी लंबी दूरी में शरीर के साथ दिमाग की भी परीक्षा होती है. ऐसे हालात में खुद को नियंत्रित रखना, एनर्जी बचाना और लगातार आगे बढ़ते रहना सबसे बड़ी चुनौती होती है. पवन ने बताया कि वे इससे पहले 2025 में भी इसे मेराथन में भाग ले चुके हैं. इसमें भी उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया था.

लंबे समय से कर रहे थे तैयारी

पवन लंबे समय से नियमित रनिंग और एंड्योरेंस ट्रेनिंग कर रहे हैं. उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ के लिए फिटनेस पर लगातार काम किया. पहाड़ी अभ्यास, नियमित रनिंग और अनुशासित ट्रेनिंग को अपनी तैयारी का हिस्सा बनाया. उनका मानना है कि किसी भी लंबी और कठिन रेस में सफलता अचानक नहीं मिलती, बल्कि इसके पीछे लंबे समय की मेहनत होती है. इससे पहले भी पवन ढाका कई लंबी दूरी की प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं और कई मेडल जीत चुके हैं.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

और पढ़ेंLocation :

Sikar,Rajasthan

First Published :

September 13, 2026, 10:12 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj