सूरजमुखी की खेती से बढ़ सकती है किसानों की कमाई, बुवाई से पहले जानें बीज और सिंचाई का पूरा गणित

Last Updated:October 23, 2026, 08:32 IST
Sunflower Cultivation Tips: भीलवाड़ा जिले के किसान पारंपरिक खेती के साथ फूलों की खेती में भी अपनी पहचान बना रहे हैं. यहां गुलाब, मोगरा और गेंदे की खेती प्रमुख रूप से की जाती है. अब रबी सीजन में किसान सूरजमुखी की खेती को भी एक नए विकल्प के रूप में देख सकते हैं. कृषि विभाग के उद्यान विशेषज्ञ डॉ. शंकर सिंह राठौड़ के मुताबिक, सूरजमुखी के बीजों से तेल तैयार किया जाता है, जिसके कारण बाजार में इसकी मांग बनी रहती है. इसकी खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है. किसानों को बुवाई से पहले स्थानीय जलवायु के अनुसार सही समय, प्रमाणित बीज, सिंचाई और खाद प्रबंधन की जानकारी लेनी चाहिए. फूल आने और बीज बनने के दौरान खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना भी जरूरी है.
भीलवाड़ा: फूलों की खेती के रूप में भीलवाड़ा और यहां के किसान अपनी एक अलग पहचान बना रहे हैं. भीलवाड़ा में खास तौर पर गंदे और गुलाब की खेती बड़े पैमाने पर होती है. इसके अलावा कई विभिन्न प्रकार के फूलों की भी खेती की जाती है. रफी का सीजन शुरू हो गया है और आने वाले समय में अगर किसान कुछ नई और अलग खेती करने का सोच रहे हैं तो सूरजमुखी के फूल की खेती उनके लिए एक बेहतर ऑप्शन हो सकती है. यह कम समय में किसानों को अच्छा उत्पादन और मुनाफा देती है. सूरजमुखी के बीजों से तेल तैयार किया जाता है, जिससे बाजार में इसकी मांग बनी रहती है.
सर्दियों में इसकी खेती करने से पहले किसानों को मिट्टी, बीज, बुवाई के समय और सिंचाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. अच्छी पैदावार के लिए खेत में पानी की निकासी सही होनी चाहिए और फसल को जरूरत के अनुसार खाद व पानी देना चाहिए. भीलवाड़ा कृषि विभाग के उद्यान डिपार्टमेंट के डॉ. शंकर सिंह राठौड़ ने बताया कि भीलवाड़ा शुरू से ही फूलों की खेती के रूप में अग्रणी रहा है. भीलवाड़ा के किस पारंपरिक खेती के साथ-साथ फूलों की खेती को भी प्राथमिकता देते हैं, जिसके तौर पर भीलवाड़ा में गुलाब, मोगरे और गेंदे की फूलों की खेती सबसे ज्यादा की जाती है. इसके अलावा किसान अगर रबी के सीजन में सूरजमुखी की खेती करें तो यह बेहतर समय है. सूरजमुखी की खेती के लिए ऐसी जमीन अच्छी मानी जाती है, जहां पानी की निकासी ठीक हो.
दोमट मिट्टी में सूरजमुखी की मिलती है अच्छी पैदावार
उन्होंने बताया कि उपजाऊ दोमट मिट्टी में इसकी फसल अच्छी हो सकती है. खेत में पानी भरने से पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है, इसलिए बुवाई से पहले खेत को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी है. सूरजमुखी की बुवाई का समय क्षेत्र की जलवायु, तापमान और सिंचाई की सुविधा पर निर्भर करता है. सर्दियों के दौरान बुवाई करने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सही समय की जानकारी लेना जरूरी है. किसानों को अपने क्षेत्र के अनुकूल और प्रमाणित बीजों का चयन करना चाहिए. बीज खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और पैकेट पर दी गई जानकारी जरूर देखनी चाहिए.
सूरजमुखी में जरूरत के अनुसार ही करें सिंचाई
सूरजमुखी की फसल में जरूरत के अनुसार सिंचाई करना जरूरी है. खासकर पौधों में फूल आने और बीज बनने के समय खेत में नमी की कमी नहीं होनी चाहिए. हालांकि खेत में अधिक पानी भरने से बचना चाहिए. उद्यान डिपार्टमेंट के डॉक्टर शंकर सिंह राठौड़ ने बताया कि राजस्थान सरकार किसानों को कृषि और बागवानी से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता देती है. किसान सिंचाई के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसे उपकरणों पर मिलने वाले अनुदान की जानकारी भी ले सकते हैं.About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Bhilwara,Rajasthan
First Published :
October 23, 2026, 08:32 IST



