राष्ट्रपति कलाम ने किया था सम्मानित, 100% साक्षरता से बदली गांव की पहचान, पक्षियों की सेवा की 100 साल पुरानी परंपरा

Last Updated:November 02, 2026, 16:44 IST
झुंझुनूं का बख्तावरपुरा करीब 250 साल पुराना गांव है, जिसे 2007 में राजस्थान का पहला निर्मल गांव घोषित किया गया था. राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी गांव को सम्मानित कर चुके हैं. 100% साक्षरता के साथ यहां आज भी हजारों पक्षियों को रोज दाना डालने की 100 साल पुरानी परंपरा निभाई जा रही है.
झुंझुनूं/ सत्यप्रकाश सोनी. खेतड़ी रियासत के दौर में बसा बख्तावरपुरा आज अपनी अलग पहचान रखता है, करीब ढाई सौ साल पहले खेतड़ी के राजा बख्तावर सिंह ने इस गांव की स्थापना की थी. कभी खेती-किसानी के लिए पहचाने जाने वाले इस गांव ने समय के साथ स्वच्छता और शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई. वर्ष 2007 में प्रदेश के पहले निर्मल गांव का खिताब मिलने के बाद बख्तावरपुरा का नाम पूरे प्रदेश में चर्चा में आया. नई दिल्ली के अंबेडकर भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने गांव के तत्कालीन सरपंच महेंद्र कटेवा को यह पुरस्कार प्रदान किया था. इसके अगले साल 2008 में गांव को जल संरक्षण के लिए भी सम्मान मिला.
गांव के बुजुर्गों के अनुसार रियासतकाल में खेतड़ी जागीर के अधीन 555 गांव थे, इनमें बख्तावरपुरा भी शामिल था. गांव की बसावट की शुरुआत खुडाना गांव के गढ़ में रहने वाले कटेवा परिवार के लोगों से हुई. ये लोग यहां आकर खेती करने लगे, धीरे-धीरे दूसरी जातियों के परिवार भी यहां बसते गए और गांव का विस्तार होता गया. खेतड़ी के राजा बख्तावर सिंह के नाम पर ही इसका नाम बख्तावरपुरा रखा गया. समय के साथ कटेवा परिवार के लोगों ने खेती के साथ सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई. गांव में आज करीब साढ़े चार हजार की आबादी है, यहां साक्षरता दर 100 प्रतिशत बताई जाती है. खेती और नौकरी लोगों की आय के प्रमुख साधन हैं.
सोखते गड्ढे और शौचालय बनवाकर बदली गांव की तस्वीर
बख्तावरपुरा को निर्मल गांव बनाने में तत्कालीन सरपंच महेंद्र कटेवा की अहम भूमिका रही, उन्होंने गांव में स्वच्छता को लेकर कई काम करवाए. घरों में शौचालय बनवाए गए, पानी के उचित निस्तारण के लिए सोखते गड्ढे तैयार करवाए गए. बरसाती पानी का सदुपयोग करने की व्यवस्था की गई, इसके साथ ही मिनी सचिवालय का निर्माण करवाया गया. इन प्रयासों का असर यह हुआ कि वर्ष 2007 में बख्तावरपुरा को प्रदेश का पहला निर्मल गांव घोषित किया. राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से सम्मान मिलना गांव के लिए बड़ी उपलब्धि रही. इसके बाद वर्ष 2008 में जल संरक्षण के क्षेत्र में भी गांव को अवार्ड मिला.
पक्षियों के लिए अनाज देना नहीं भूलते ग्रामीण
बख्तावरपुरा की पहचान केवल स्वच्छता और साक्षरता तक सीमित नहीं है, गांव के पास बख्तावरपुरा, कंवरपुरा और विजयपुर की सीमा पर बाबा नत्थूराम की करीब 100 साल पुरानी कुटिया है. यहां रोजाना सुबह-शाम हजारों पक्षियों के लिए दाना डाला जाता है. तीनों गांवों के लोगों की इस परंपरा से जुड़ी आस्था आज भी बनी हुई है. कुटिया समिति के प्रवक्ता कपिल कटेवा काशी बताते हैं कि मकर संक्रांति पर युवाओं की टोली तीनों गांवों में घर-घर जाकर पक्षियों के लिए अनाज एकत्र करती है. गांव में किसी परिवार में शादी या दशोठण जैसा मांगलिक आयोजन होता है तो भी कुटिया में पक्षियों के लिए अनाज दिया जाता है. ग्रामीण इसे अपनी परंपरा और सेवा का हिस्सा मानते हैं.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
और पढ़ेंLocation :
Jhunjhunu,Rajasthan
First Published :
November 02, 2026, 16:44 IST



