कोटा का लड़का, अजमेर की लड़की…सोशल मीडिया पर शुरू हुआ प्यार बना जिंदगी की कहानी, सबके लिए बना मिसाल

कोटा: कोटा निवासी शुभम यादव साल 2012 में अपनी भुआ के घर अजमेर गए थे. भुआ का घर दरगाह बाज़ार इलाके में था. उनके फूफाजी ने सैनी समाज में किसी को मुंहबोली बहन बनाया हुआ था. इसी आने-जाने के दौरान शुभम की मुलाकात भावना से हुई. धीरे-धीरे बातचीत दोस्ती में बदल गई, और दोस्ती प्यार में. लेकिन किस्मत को कुछ और मंज़ूर था.
भावना के पिता नहीं थे. जब परिवार को रिश्ते की खबर मिली, तो सब नाराज़ हो गए. एक दिन भावना के भाई ने उसका फ़ोन छीन लिया और लड़की बनकर शुभम से तस्वीरें मांगीं. इसके बाद भावना का कॉलेज जाना बंद करवा दिया गया, फ़ोन छीन लिया गया और हर संपर्क तोड़ दिया गया. भावना ने शुभम को मैसेज भेजा: “मैं यहां बहुत परेशान हूं, मुझे ले जाओ वरना मैं जान दे दूंगी.” उसने सल्फ़ास तक खा लिया और कुछ समय अस्पताल में भर्ती रही. उसकी ज़िंदगी जैसे ठप हो गई.
प्यार ने दी हिम्मतएक दिन भावना ने हिम्मत दिखाई. कॉलेज जाने के बहाने घर से निकली और नसीराबाद पहुंच गई. उसने शुभम को पहले से सूचना दे दी थी. अगले दिन शुभम अपने दोस्त के साथ नसीराबाद पहुंचा. दोनों जूस की दुकान पर मिले. भावना को रोते देख शुभम की आंखें भर आईं. शुभम बोले, “मेरे पास कुछ नहीं—न घर, न पैसे… तुम कैसे रहोगी?” भावना ने कहा, “बस तुम्हारे साथ रहना है. किराए के मकान में भी चल जाएगा, काम हम मिलकर करेंगे.”
कोटा की राह और नई शुरुआतबिना देर किए दोनों बस से कोटा पहुंचे. शुभम ने पिताजी से कहा, “मैं अजमेर से भावना को लाया हूं. अब या तो साथ दो या मैं घर छोड़ दूंगा.” पिताजी ने बेटे का साथ दिया: “कोटा आ जाओ, शादी करवा दूंगा.” बस स्टैंड पर पिताजी पहले से मौजूद थे. रेलवे स्टेशन के पास मंदिर में फेरे हुए, और नई ज़िंदगी शुरू हुई. कुछ समय बाद पुलिस आई, दोनों को डेढ़ महीने फ़रारी में रहना पड़ा. अंत में परिवार ने रिश्ता मान लिया.
संघर्ष से सफलताशादी के बाद बेटी हुई, एक साल बाद बेटा. आज उनके एक बेटा और एक बेटी हैं—ज़िंदगी की सबसे बड़ी खुशी. किराए के मकान से शुरुआत की. सात साल बाद अपना मकान बनाया, फिर कार खरीदी.
मेहनत और प्यार की मिसालआज शुभम अपना मेडिकल स्टोर चलाते हैं और कोटा में परिवार के साथ रहते हैं. परिवार पूरी तरह खुशहाल है. भावना का मायका, जो पहले नाराज़ था, अब शुभम को बेटे जैसी इज़्जत देता है. दोनों बच्चे, सुख-समृद्धि और प्यार से भरा जीवन जी रहे हैं. “सच्चा प्यार वही, जो हर मुश्किल, दूरी और डर पर जीत हासिल कर ले.” शुभम-भावना की कहानी प्रेम नहीं, विश्वास, संघर्ष और सफलता की जीवंत मिसाल है.



