‘मराठा पहचान या राजनीति? भाषा विवाद के बीच टैक्सी ड्राइवरों के सपोर्ट में गरजीं सेलिब्रिटी- ‘रोजी-रोटी का सवाल’

Last Updated:April 26, 2026, 20:41 IST
मुंबई में मराठी भाषा और पहचान को लेकर बहस विवाद का रूप ले रही है. सेलिब्रिटी ज्योतिषी जय मदान ने जोर दिया कि भाषा को लोगों को जोड़ने का जरिया होना चाहिए, न कि विवाद का. उन्होंने मुंबा देवी के प्रति श्रद्धा जताते हुए लोकल परंपराओं के सम्मान की बात कही. दूसरी ओर, शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने मराठी को गौरव बताते हुए ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए इसे जरूरी बताया ताकि यात्रियों को सुविधा हो. यह विवाद मीरा-भायंदर में ऑटो चालकों के लिए मराठी अनिवार्य करने के फैसले से उपजा है, जिस पर अब राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है.
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भाषा विवाद के चलते मुंबई की राजनीति गरमा गई है.
नई दिल्ली: मुंबई में भाषा और पहचान को लेकर छिड़ी बहस पर सेलिब्रिटी ज्योतिषी जय मदान और शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने खुलकर अपनी बात रखी है. जय मदान ने मुंबई की आस्था पर जोर देते हुए कहा कि यह शहर मुंबा देवी के आशीर्वाद से चलता है. उन्होंने सलाह दी कि जो भी लोग इस शहर में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, उन्हें मंदिर जाकर माथा जरूर टेकना चाहिए. भाषा विवाद पर उनका नजरिया साफ था कि किसी भी राज्य की लोकल भाषा का सम्मान होना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज के दौर में एआई और ट्रांसलेटर टूल्स की वजह से किसी भी भाषा को समझना बहुत आसान हो गया है, इसलिए भाषा को लोगों को जोड़ने का जरिया बनाना चाहिए, न कि आपस में लड़ने या तनाव पैदा करने का कारण.
वहीं, शिवसेना की शाइना एनसी ने मराठी भाषा को महाराष्ट्र का गौरव और असली पहचान बताया. उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी आनी ही चाहिए, ताकि यात्रियों को कोई परेशानी न हो. शाइना ने राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग भाषा के नाम पर ‘दादागिरी’ और ‘अवसरवाद’ की राजनीति कर रहे हैं. उनकी मानें, तो मराठी सीखना और बोलना स्टेट में रहने वालों के लिए अभिमान की बात होनी चाहिए. उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस भाषा को अपनाएं. उन्होंने समाज की सुरक्षा और राष्ट्रवाद पर बात करते हुए आरएसएस के योगदान और सामाजिक जागरूकता को भी जरूरी बताया.
दो हिस्सों में बंटी राजनीतियह पूरा विवाद तब और गरमाया जब, मीरा-भायंदर इलाके में ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने का फैसला लिया गया. इस प्रशासनिक कदम के बाद राजनीति दो हिस्सों में बंट गई है. एक पक्ष इसे लोकल संस्कृति और मराठी मानुस को मजबूत करने वाला फैसला मान रहा है. दूसरी तरफ, विरोध करने वालों का कहना है कि इससे बाहर से आए कामगारों पर बेवजह का दबाव बनेगा और उनके रोजगार पर संकट आ सकता है. फिलहाल, यह मुद्दा मुंबई की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक तरफ नियम हैं और दूसरी तरफ रोजी-रोटी का सवाल.
About the AuthorAbhishek NagarSenior Sub Editor
अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें
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Location :
Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
April 26, 2026, 20:41 IST



