Patharchatta Benefits: घर में लगा ये पौधा पथरी समेत कई समस्याओं में आता है काम, जानिए इसके फायदे

Last Updated:October 17, 2026, 14:57 IST
Patharchatta Plant Benefits: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी का तराई इलाका अपनी हरियाली और प्राकृतिक संपदा के लिए जाना जाता है. यहां कई औषधीय पौधे भी पाए जाते हैं, जिनमें पत्थरचट्टा प्रमुख है. इसे पाषाणभेद और पणफुट्टी के नाम से भी जाना जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम Kalanchoe pinnata है. यह पौधा घर के आंगन, गमले या बगीचे में आसानी से उगाया जा सकता है. लखीमपुर खीरी की आयुष चिकित्सक डॉ. ऋचा श्रीवास्तव ने लोकल 18 को इसके पारंपरिक औषधीय इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी. हालांकि, किसी बीमारी के इलाज के लिए इसका सेवन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है.
लखीमपुर खीरी. उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी जिला अपनी हरियाली और प्राकृतिक संपदा के साथ कई औषधीय पौधों के लिए भी जाना जाता है. इन्हीं पौधों में पत्थरचट्टा भी शामिल है. इसे पाषाणभेद, पर्णबीजी और पणफुट्टी के नाम से भी जाना जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम Kalanchoe pinnata है, जबकि इसे Bryophyllum pinnatum के नाम से भी पहचाना जाता है. इस पौधे को घर के आंगन, गमले या बगीचे में आसानी से उगाया जा सकता है. अनुकूल परिस्थितियों में यह तेजी से बढ़ता है और इसकी पत्तियों से नए पौधे भी तैयार हो जाते हैं.
लखीमपुर खीरी की आयुष चिकित्सक डॉ. ऋचा श्रीवास्तव ने लोकल 18 को बताया कि पत्थरचट्टा की पत्तियों और उनके रस का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से औषधीय उद्देश्यों के लिए किया जाता है. हालांकि, किसी भी औषधीय पौधे का सेवन करने से पहले व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय सलाह को ध्यान में रखना जरूरी है.
डॉ. ऋचा ने बताया कि पत्थरचट्टा का इस्तेमाल किडनी की पथरी, सूजन और पाचन से जुड़ी समस्याओं के लिए पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है. इस पौधे में एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुणों वाले कुछ यौगिक पाए जाते हैं. आयुर्वेद में भी इसका इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है. हालांकि, किडनी की पथरी को घोलने या बाहर निकालने में इसकी प्रभावशीलता को लेकर पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. इसलिए इसे पथरी का प्रमाणित इलाज नहीं मानना चाहिए.
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पत्थरचट्टा में मौजूद कुछ जैव सक्रिय यौगिकों के कारण इसे सूजन और दर्द से जुड़ी समस्याओं के लिए भी उपयोगी माना जाता है. पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल गठिया, गाउट और दूसरी सूजन संबंधी परेशानियों में किया जाता रहा है. हालांकि, इन समस्याओं में इसके लाभ की पुष्टि के लिए और वैज्ञानिक शोध की जरूरत है. हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए भी इस पौधे के इस्तेमाल का दावा किया जाता है, लेकिन इसे डॉक्टर की ओर से दी गई दवाओं का विकल्प नहीं मानना चाहिए.
डॉ. ऋचा ने बताया कि पत्थरचट्टा का इस्तेमाल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन में सुधार और बवासीर जैसी समस्याओं में राहत के लिए भी पारंपरिक तौर पर किया जाता है. हालांकि, इन सभी लाभों के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं. पौधे में मौजूद पोषक तत्वों और जैव सक्रिय यौगिकों के आधार पर इसके कुछ संभावित स्वास्थ्य लाभों का अध्ययन किया गया है, लेकिन इसके प्रभाव व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं.
पत्थरचट्टा की ताजी पत्तियों का रस निकालकर या पत्तियों का सेवन करके इसका इस्तेमाल करने की सलाह कुछ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में दी जाती है. कुछ लोग इसके रस को पानी या काढ़े के साथ भी लेते हैं. हालांकि, इसकी एक से दो चम्मच मात्रा या सुबह खाली पेट सेवन करने को सुरक्षित और प्रभावी मानने के लिए पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए. खासकर किडनी, लिवर या ब्लड प्रेशर से जुड़ी बीमारी होने पर डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है.
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October 17, 2026, 14:57 IST



