ग्राउंड रिपोर्ट: स्क्रीन टाइम घटा, ग्रीन टाइम बढ़ा; नवाचार से स्कूल में बच्चे सीख रहे खेती की तकनीक

जयपुर. शहरों में बढ़ते शहरीकरण और बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम के बीच शिक्षा को प्रकृति से जोड़ने की एक सराहनीय पहल जयपुर के मुरलीपुरा स्थित स्वामी विवेकानंद विद्या मंदिर विद्यालय में शुरू की गई है. हमारी टीम ने विद्यालय के संस्थापक ताराचंद पारीक से मुलाकात कर इस नवाचार को नजदीक से समझा और उनसे बातचीत की. पारीक ने लोकल 18 को बताया कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि 2047 के विकसित भारत की नींव तैयार करने का माध्यम है.
आज के बच्चे तकनीक और एआई के दौर में तेजी से बौद्धिक रूप से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन इसका नकारात्मक पक्ष यह है कि उनका अधिकांश समय मोबाइल और स्क्रीन की नीली रोशनी में बीत रहा है. उन्होंने बताया कि हाल ही में जारी राष्ट्रीय रिपोर्ट में औसतन 3 से 4 घंटे प्रतिदिन स्क्रीन टाइम का आंकड़ा सामने आया, जिसने उन्हें गहराई से सोचने को प्रेरित किया.
स्क्रीन टाइम कम कर ग्रीन टाइम बढ़ाने का निर्णय
इसी चिंता से जन्मी सोच को अमल में लाते हुए उन्होंने बच्चों का स्क्रीन टाइम कम कर ग्रीन टाइम बढ़ाने का निर्णय लिया. इसके लिए विद्यालय की छत पर रूफटॉप गार्डनिंग की शुरुआत की गई. इस कार्य में छत की बागवानी के विशेषज्ञ एवं रूफटॉप मॉडल इनोवेटर गजानंद अग्रवाल का सहयोग लिया गया. उनकी मदद से 5 फीट लंबी, 2 फीट चौड़ी और 1 फीट ऊंची कुल 23 क्यारियां तैयार की गईं, जिनमें गाजर, मटर, मिर्च, टमाटर, गोभी, मूली, शलजम, धनिया, चना, जौ सहित विभिन्न सब्जियां और अनाज उगाए गए हैं.
इस पहल का उद्देश्य बच्चों और उनके अभिभावकों को मिट्टी से जोड़ना, कृषि के प्रति रुचि जगाना और भविष्य में कृषि को रोजगार के रूप में देखने की सोच विकसित करना है. पारीक ने बताया कि आज शहरी बच्चों को कृषि का व्यावहारिक ज्ञान लगभग नहीं मिल पाता, जबकि विद्यालय इस कमी को दूर करने का सशक्त माध्यम बन सकते हैं.
ऑर्गेनिक और प्लांट-बेस्ड फूड की मांग तेजी से बढ़ी
रूफटॉप मॉडल इनोवेटर गजानंद अग्रवाल ने बताया कि कोविड-19 के बाद ऑर्गेनिक और प्लांट-बेस्ड फूड की मांग तेजी से बढ़ी है. छत की बागवानी न केवल शुद्ध और ताजी सब्जियां उपलब्ध कराती है, बल्कि मानसिक तनाव कम करने, परिवार के साथ समय बिताने और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है. उन्होंने बताया कि छत पर बागवानी से गर्मियों में घर के तापमान में 5 से 7 डिग्री तक कमी आ सकती है और कार्बन उत्सर्जन भी घटता है.



