Taramira Farming Tips: कम पानी और कमजोर जमीन में तारामीरा की खेती, जानें बुवाई से कटाई का तरीका

Last Updated:October 09, 2026, 11:08 IST
Learn the complete process of taramira farming: नागौर में कम बारिश और कमजोर मिट्टी के कारण रबी सीजन में तारामीरा की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है. इसकी बुवाई सितंबर मध्य से अक्टूबर मध्य तक होती है. हल्की दोमट मिट्टी और आरटीएम-314, टी-27 जैसी उन्नत किस्मों का उपयोग कर किसान कम पानी और सीमित खर्च में बेहतर उत्पादन ले सकते हैं. बुवाई के 140 से 142 दिन बाद फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है. सिंचाई के सीमित साधनों वाले मारवाड़ क्षेत्रों में यह फसल किसानों की आजीविका बढ़ाने और मुनाफा कमाने का प्रमुख साधन है.
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Nagaur: राजस्थान के नागौर जिले में कम बारिश और सीमित सिंचाई के कारण खेती करना किसानों के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है. इस भौगोलिक और पर्यावरणीय स्थिति को देखते हुए, रबी सीजन में तारामीरा की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन और लाभकारी विकल्प बनकर सामने आई है. यह एक ऐसी उपयोगी तिलहनी फसल है जो न केवल बहुत कम पानी में पककर तैयार हो जाती है, बल्कि कम उपजाऊ और हल्की जमीन में भी शानदार पैदावार देती है. नागौर के किसान अपनी बंजर होती जमीनों पर तारामीरा की बुवाई करके अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. इस फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह विपरीत परिस्थितियों में भी अपना अस्तित्व बनाए रखती है और किसानों को नुकसान से बचाती है.
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह और दिनेश जाखड़ के अनुसार, तारामीरा की सफल खेती के लिए बुवाई का सही समय बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसकी बुवाई खेत में उपलब्ध नमी और तापमान पर काफी हद तक निर्भर करती है. कृषि विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बारानी क्षेत्रों में सितंबर के मध्य से लेकर अक्टूबर के मध्य तक का समय तारामीरा की बुवाई के लिए सबसे आदर्श माना जाता है. नागौर जिले में किसान मानसून के बाद खेतों में बची हुई नमी का सही आकलन करके बुवाई की योजना आसानी से बना सकते हैं. यदि बुवाई में बहुत अधिक देरी की जाती है, तो फसल की प्राकृतिक बढ़वार और अंतिम उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. इसलिए, खेत में पर्याप्त नमी रहते हुए समय पर बुवाई करना फायदेमंद साबित होता है.
खेत की तैयारी और मिट्टी का चुनावतारामीरा की शानदार पैदावार के लिए हल्की दोमट मिट्टी को सबसे उपयुक्त माना जाता है. यह फसल उन क्षेत्रों में भी आसानी से उगाई जा सकती है, जहां दूसरी पारंपरिक फसलों का उत्पादन बहुत सीमित रहता है. हालांकि, किसानों को अत्यधिक अम्लीय या बहुत अधिक क्षारीय मिट्टी में इस फसल को लगाने से बचना चाहिए. बुवाई से पहले खेत की एक या दो बार अच्छी तरह से जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए. इसके बाद खेत में पाटा लगाकर मिट्टी की नमी को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है. इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि खेत में कहीं भी जलभराव न हो, क्योंकि इससे पौधों की जड़ों का विकास रुक सकता है.
उन्नत किस्में और बीज की सही मात्राबेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए किसानों को तारामीरा की प्रमाणित और उन्नत किस्मों का ही चयन करना चाहिए. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, आरटीएम-314, टी-27 और आरटीएम-2002 जैसी उन्नत किस्में तारामीरा की खेती के लिए सबसे शानदार मानी जाती हैं. एक हेक्टेयर खेत में बुवाई के लिए औसतन 5 से 6 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है. बीजों को छिटकवां विधि की जगह कतारों में बोना अधिक लाभदायक रहता है. कतार से कतार के बीच की दूरी लगभग 40 से 45 सेंटीमीटर रखनी चाहिए और बीजों को मिट्टी में करीब 3 से 5 सेंटीमीटर की गहराई पर बोना चाहिए.
खाद, उर्वरक और सिंचाई प्रबंधनअच्छे उत्पादन के लिए खेत में बुवाई से पहले मिट्टी की वैज्ञानिक जांच करवाना एक समझदारी भरा कदम है. इससे खेत में मौजूद पोषक तत्वों की सटीक जानकारी मिल जाती है और उर्वरक का सही उपयोग किया जा सकता है. तारामीरा की फसल में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और आवश्यकतानुसार अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व देने से फसल की बढ़वार तेज होती है. जहां तक सिंचाई की बात है, तारामीरा एक कम पानी वाली फसल है. यदि सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, तो पहली सिंचाई बुवाई के 40 से 50 दिन बाद फूल आने से ठीक पहले करनी चाहिए. दूसरी सिंचाई फलियों में बीज भरते समय की जा सकती है.
निराई-गुड़ाई और फसल की कटाईखरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 20 से 25 दिन बाद खेत में निराई-गुड़ाई करना बहुत जरूरी है. तारामीरा की यह फसल लगभग 140 से 142 दिनों में पककर पूरी तरह तैयार हो जाती है. जब फलियां पक जाएं और बीज पूरी तरह परिपक्व हो जाएं, तब सही समय पर इसकी कटाई कर लेनी चाहिए. कटाई में ज्यादा देरी करने से फलियों के चटकने और बीज झड़ने का खतरा बना रहता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Nagaur,Nagaur,Rajasthan
First Published :
October 09, 2026, 11:08 IST



