Rajasthan

तिरंगे में घर लौटा देश का वीर सपूत, 16 साल के बेटे ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई, 15 साल BSF में की थी सेवा

Last Updated:August 16, 2026, 20:35 IST

Sikar Hindi News: आजादी के जश्न के बीच एक गांव में उस वक्त मातम छा गया, जब 15 साल तक देश की सेवा करने वाले BSF जवान का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा. जवान की अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन मौजूद रहे. माहौल गमगीन हो गया और हर आंख नम नजर आई. जवान के 16 वर्षीय बेटे ने अपने पिता को अंतिम विदाई दी, तो वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं. तिरंगे में लिपटे वीर सपूत को सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. ग्रामीणों ने भारत माता के जयकारे लगाकर जवान की देशसेवा और बलिदान को नमन किया.

Sikar News: सीकर जिले के खंडेला क्षेत्र के पीपलोदा का बास गांव में 15 अगस्त की शाम देशभक्ति के जज्बे के बीच ऐसा गम उतर आया, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. जिस दिन देश आजादी का पर्व मना रहा था, उसी दिन गांव ने अपने वीर सपूत BSF जवान राकेश कुमार मीणा को खो दिया. तिरंगे में लिपटी उनकी पार्थिव देह जब गांव पहुंची तो हर आंख नम हो गई. गलियों में देशभक्ति के नारे गूंज रहे थे, लेकिन हर चेहरे पर अपने जवान को खोने का दर्द साफ दिखाई दे रहा था.

राकेश कुमार मीणा सिर्फ वर्दी पहनकर ड्यूटी करने वाले जवान नहीं थे, बल्कि करीब 15 वर्षों तक देश की सुरक्षा और जिम्मेदारियों को निभाने वाले समर्पित सैनिक थे. वर्ष 2011 में BSF में कॉन्स्टेबल के पद पर भर्ती होने के बाद उनकी पहली तैनाती बेंगलुरु में हुई. इसके बाद उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं और वर्तमान में जम्मू-पलौड़ा क्षेत्र में सिटी कॉन्स्टेबल के रूप में सेवाएं दे रहे थे. वे DIG मुख्यालय से जुड़ी ड्यूटी भी संभाल रहे थे. उनकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा देश सेवा के नाम रहा.

लेकिन 29 अप्रैल को एक सड़क हादसे ने उनके जीवन की दिशा बदल दी. राजकार्य के सिलसिले में सीकर जाते समय बाइक के सामने अचानक कुत्ता आ जाने से उनका एक्सीडेंट हो गया. हादसा इतना गंभीर था कि सिर समेत शरीर के कई हिस्सों में गहरी चोटें आईं. उन्हें तत्काल फरीदाबाद के एशियन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. परिवार को उम्मीद थी कि उनका जवान बेटा और पिता जिंदगी की इस जंग को भी जीत लेगा, लेकिन करीब साढ़े तीन महीने तक चले इलाज के बाद 15 अगस्त को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और शाम को उनका निधन हो गया.

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राकेश की शहादत की कहानी सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं, बल्कि उस परिवार की कहानी है जिसने अपने बेटे को देश की सेवा के लिए समर्पित किया और आखिर में उसे तिरंगे में लिपटा वापस पाया. उनके निधन की खबर मिलते ही पीपलोदा का बास गांव में सन्नाटा छा गया. जिस जवान ने परिवार से दूर रहकर देश की जिम्मेदारी निभाई, उसके जाने के बाद घर में पत्नी और दो मासूम बेटों के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा खालीपन छोड़ गया. 16 वर्षीय अंशु और 12 वर्षीय अभिमन्यु अब पिता की यादों के सहारे आगे बढ़ेंगे.

अंतिम विदाई का सबसे भावुक दृश्य उस समय सामने आया, जब बड़े बेटे अंशु ने सैन्य सम्मान के बीच अपने पिता को मुखाग्नि दी. जिस पिता की उंगली पकड़कर बेटा जीवन की राह सीखता है, उसी पिता को अंतिम विदाई देने की जिम्मेदार 16 साल के बेटे के कंधों पर आ गई. अंशु ने पिता को सेल्यूट किया और फिर मुखाग्नि दी. यह दृश्य देखकर अंतिम यात्रा में शामिल ग्रामीणों, परिजनों और जवानों की आंखें भर आईं. छोटे बेटे अभिमन्यु के सिर से भी हमेशा के लिए पिता का साया उठ गया.

राकेश के पिता बंशीधर मीणा का भी पहले ही निधन हो चुका था. ऐसे में परिवार ने एक बार फिर अपने सबसे बड़े सहारे को खो दिया. एक तरफ मां और पत्नी के सामने जिंदगी की कठिन राह थी, तो दूसरी तरफ दो छोटे बेटों के सामने पिता के बिना भविष्य की चुनौती. राकेश की कमी परिवार कभी पूरी नहीं कर पाएगा, लेकिन उनके परिवार के पास यह गर्व हमेशा रहेगा कि उनका अपना देश की सेवा करते हुए हजारों किलोमीटर दूर जिम्मेदारी निभाता रहा और अंतिम समय तक एक जवान की तरह संघर्ष करता रहा.

जब राकेश की अंतिम यात्रा गांव की गलियों से निकली तो ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा के साथ उन्हें विदाई दी. तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह के आगे-आगे लोग देशभक्ति के नारे लगाते चल रहे थे. राकेश मीणा अमर रहे और भारत माता की जय के जयघोष से पूरा गांव गूंज उठा. गम के बीच ग्रामीणों के चेहरों पर अपने जवान के लिए सम्मान भी साफ दिखाई दे रहा था. यह अंतिम यात्रा गांव के लिए केवल एक शवयात्रा नहीं, बल्कि अपने उस बेटे को सलाम थी जिसने अपनी जिंदगी देश के नाम कर दो.

BSF के जवानों ने अपने साथी को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी. इंस्पेक्टर सदीक खान, हेड कॉन्स्टेबल हेमराज सिंह, कॉन्स्टेबल राकेश कुमार मीणा, व्हीकल मैकेनिक अजय कुमार और कॉन्स्टेबल संदीप कुमार सहित BSF के जवान मौजूद रहे. राकेश की अंतिम विदाई में खंडेला विधायक सुभाष मील, पूर्व मंत्री बंशीधर बाजिया, निवर्तमान प्रधान डॉ. गिरिराज सिंह सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए. सभी ने पुष्प अर्पित कर जवान को श्रद्धांजलि दी.

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August 16, 2026, 20:35 IST

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