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संगीत की दुनिया की ‘महारानी’, जिसके आगे झुकते थे राजे-रजवाड़े, डिमांड पर अंग्रेजों को चलानी पड़ी ‘स्पेशल ट्रेन’!

Last Updated:June 26, 2026, 04:01 IST

गौहर जान को आज लोग भले नहीं जानते, मगर वे आजादी से पहले भारत की मशहूर शख्सियत थीं. उन्हें पहली सेलिब्रिटी गायिका बताया जाता है. उन्होंने साल 1902 में देश की पहली ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग करके इतिहास रचा था. उन्होंने 10 से ज्यादा भाषाओं में 600 से ज्यादा गाने गाए थे. गौहर जान अपनी बेमिसाल गायकी के साथ-साथ अपने रॉयल अंदाज के लिए भी मशहूर थीं. आप उनकी पॉपुलैरिटी का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि उन्हें एक कार्यक्रम में जाने के लिए उनकी स्पेशल ट्रेन की मांग तक पूरी की गई थी. उन्होंने साल 1911 में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम के सामने भी परफॉर्मेंस दी थी.

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वो गायिका, जिसके आगे झुकते थे राजे-रजवाड़े, खास डिमांड पर चलानी पड़ी थी ट्रेनZoomगौहर जान का असली नाम एंजेलिना योवर्ड था. (फोटो साभार: IANS)

नई दिल्ली: भारतीय संगीत के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिनके हुनर से एक नया दौर शुरू हुआ. उन्हीं में से एक बड़ा नाम हैं- गौहर जान. गौहर जान को भारत की पहली रिकॉर्डिंग स्टार और पहली सेलिब्रिटी गायिका माना जाता है. वह न सिर्फ अपनी बेमिसाल गायकी के लिए जानी जाती थीं, बल्कि अपनी ठाठ-बाठ और बेबाकी के लिए भी मशहूर थीं. गायिका की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि एक बार किसी रियासत के कार्यक्रम में जाने के लिए उन्होंने पूरी टीम के साथ सफर के लिए स्पेशल ट्रेन की मांग की थी, जिसे मान भी लिया गया था.

गौहर जान का जन्म 26 जून 1873 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में हुआ था और उनका असली नाम एंजेलिना योवर्ड था. उनके पिता रॉबर्ट विलियम योवर्ड एक इंजीनियर थे और मां विक्टोरिया हेमिंग्स संगीत और डांस की शौकीन थीं. बचपन में ही माता-पिता के अलग होने के बाद उनकी मां ने इस्लाम धर्म अपना लिया और अपना नाम मलका जान रख लिया. एंजेलिना का भी नाम बदलकर गौहर जान हो गया. बाद में मां-बेटी कोलकाता आ गईं, जहां गौहर ने उस दौर के बड़े-बड़े उस्तादों से शास्त्रीय संगीत और कथक सीखा. उन्होंने कम उम्र में ही दरभंगा राज के दरबार से अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी.

आवाज रिकॉर्ड करवाकर रचा इतिहास 20वीं सदी की शुरुआत में जब भारत में ग्रामोफोन तकनीक आई, तो साल 1902 में गौहर जान ने अपनी आवाज रिकॉर्ड करवाकर इतिहास रच दिया. उस जमाने में रिकॉर्डिंग का समय सिर्फ तीन मिनट का होता था, इसलिए उन्होंने लंबे शास्त्रीय गानों को छोटे समय में समेटने की गजब की कला सीखी. हर रिकॉर्डिंग के खत्म होने पर उनका शान से यह कहना कि ‘माय नेम इज गौहर जान’ उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया. उन्होंने साल 1902 से 1920 के बीच 10 से ज्यादा भाषाओं में 600 से भी अधिक गाने रिकॉर्ड किए, जो उस समय के हिसाब से एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड था.

आखिरी दिनों में बनीं दरबारी संगीतकारगौहर जान की दीवानगी ऐसी थी कि उस दौर में उनकी तस्वीरें पोस्टकार्डों पर छपती थीं और वह एक इवेंट के लिए भारी-भरकम फीस लेती थीं. उन्हें साल 1911 में दिल्ली दरबार में ब्रिटेन के सम्राट जॉर्ज पंचम के सामने परफॉर्म करने का मौका मिला, जो किसी भी कलाकार के लिए बहुत गर्व की बात थी. जिंदगी के आखिरी दिनों में वह मैसूर के महाराजा कृष्णराज वाडियार चतुर्थ के बुलावे पर वहां की दरबारी संगीतकार बनीं. हालांकि, उम्र बढ़ने के साथ उनकी सेहत बिगड़ने लगी और आखिरकार 17 जनवरी 1930 को मैसूर में इस महान गायिका ने दुनिया को अलविदा कह दिया.

About the AuthorAbhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें

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