हाथियों की ताकत से भी नहीं हिला पत्थर, राजा ने झुककर करवाया मंदिर निर्माण

Last Updated:August 16, 2026, 13:56 IST
Kota Jharkhand Mahadev Temple: कोटा के नांता स्थित झाड़खंड महादेव मंदिर में सावन के महीने में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. सैकड़ों साल पहले नांता गढ़ के राजा के हाथियों द्वारा भी न हिलाए जा सकने वाले पत्थर को स्वयंभू शिवलिंग मानकर यहाँ मंदिर और बावड़ी का निर्माण कराया गया था. बिना जलहरी वाले इस चमत्कारी स्वयंभू शिवलिंग पर आज भी सांकलों के निशान देखे जा सकते हैं.
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Kota Jharkhand Mahadev Temple: कोटा का झाड़खंड महादेव मंदिर, जहां हाथियों की ताकत से भी नहीं हिला था शिवलिंग
Kota: पवित्र सावन के महीने में राजस्थान के कोटा स्थित प्रसिद्ध झाड़खंड महादेव मंदिर में हर-हर महादेव के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है. नांता क्षेत्र में स्थित इस अति प्राचीन और चमत्कारी मंदिर में तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लग रहा है. भोलेनाथ के भक्त दूध, दही, जल, बेलपत्र, आंक, धतूरा और भांग से शिवलिंग का अभिषेक कर अपनी मनोकामनाएं मांग रहे हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में यह पूरा क्षेत्र घने जंगलों और झाड़ियों से घिरा हुआ था, जिसके कारण इस मंदिर का नाम ‘झाड़खंड महादेव’ पड़ा. यह स्थान सदियों से संत-महात्माओं की तपोभूमि भी रहा है, जिसकी गवाही मंदिर परिसर में मौजूद संतों की समाधियां देती हैं.
इस ऐतिहासिक मंदिर की सबसे अद्भुत और दिलचस्प कहानी नांता गढ़ के राजा से जुड़ी हुई है. किंवदंती है कि सैकड़ों साल पहले जब राजा अपने काफिले के साथ शिकार पर निकले थे, तो रास्ते में एक विशेष पत्थर से टकराकर उनके घोड़ों के पैर फिसल गए. रास्ता साफ करने के लिए राजा ने पत्थर को हटाने का आदेश दिया. कारीगरों के साथ-साथ शक्तिशाली हाथियों को बुलाया गया और भारी लोहे की सांकलों से पत्थर को बांधकर खींचने की कोशिश की गई. कहा जाता है कि हाथियों की सूंड तक छिल गई और पूरी ताकत लगाने के बाद भी पत्थर टस से मस नहीं हुआ.
राजा ने माना शिव का चमत्कार, मंदिर और ऐतिहासिक बावड़ी का कराया निर्माण
अथक प्रयासों के विफल होने पर राजा को अहसास हुआ कि यह कोई सामान्य पत्थर नहीं, बल्कि भगवान शिव की दिव्य शक्ति का संकेत है. राजा ने तुरंत महादेव के समक्ष समर्पण किया और उसी स्थान पर एक भव्य मंदिर व ऐतिहासिक बावड़ी का निर्माण करवाया. मंदिर में रखी एक विशेष मूर्ति में आज भी नांता गढ़ के राजा को रथ पर सवार और भगवान शिव के सामने नतमस्तक होते हुए दर्शाया गया है. स्थानीय लोगों का दावा है कि आज भी उस स्वयंभू शिवलिंग पर हाथियों द्वारा बांधी गई लोहे की सांकलों के गहरे निशान दिखाई देते हैं.
बिना जलहरी का मूल स्वयंभू शिवलिंग है मंदिर की मुख्य खासियत
मंदिर के पुजारी के अनुसार, यहाँ विराजमान मुख्य आराध्य मूल स्वयंभू शिवलिंग धरती से स्वयं प्रकट हुआ था. इस शिवलिंग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सामान्य मंदिरों की तरह जलहरी (अर्घा) नहीं है. मंदिर का शांत, सुरम्य और हरा-भरा प्राकृतिक वातावरण भक्तों की भक्ति को और अधिक गहरा कर देता है. सावन के महीने में न केवल आसपास के ग्रामीण इलाकों से, बल्कि पूरे कोटा शहर से हजारों श्रद्धालु बाबा झाड़खंड महादेव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Kota,Kota,Rajasthan
First Published :
August 16, 2026, 13:55 IST



