नेताओं के वादों से टूटा भरोसा, ग्रामीणों ने खुद उठाया फावड़ा, श्रमदान से तैयार कर दी आधा किमी सड़क

Last Updated:June 28, 2026, 14:04 IST
Nagaur Voluntary Road Construction: नागौर जिले के मेड़ता सिटी उपखंड के लाम्बा जाटान और सोडास गांव के ग्रामीणों ने सरकारी इंतजार छोड़कर सामुदायिक सहयोग से आधा किलोमीटर सड़क बना दी. वर्षों तक सड़क निर्माण की मांग के बावजूद समाधान नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने श्रमदान, आर्थिक सहयोग और संसाधन जुटाकर रास्ता तैयार किया. बरसात में कीचड़ और गंदे पानी से लोगों का आवागमन मुश्किल हो जाता था. इस अभियान में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया. ग्रामीणों की इस पहल ने सामाजिक एकजुटता की मिसाल पेश करते हुए सरकारी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए.
नागौर जिले के मेड़ता सिटी उपखंड के लाम्बा जाटान और सोडास गांव के ग्रामीणों ने सामुदायिक एकजुटता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने सरकारी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए. वर्षों तक सड़क निर्माण की मांग करने के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला तो ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर आधा किलोमीटर सड़क बनाने का निर्णय लिया. सभी ने श्रमदान, आर्थिक सहयोग और संसाधनों के जरिए मिलकर रास्ते को उपयोगी बनाया, जिससे आने-जाने की बड़ी समस्या दूर हो गई.
सड़क की बदहाली से ग्रामीण लंबे समय से परेशान थे. लाम्बा जाटान से सोडास जाने वाले मार्ग पर करीब एक किलोमीटर तक घुटनों तक कीचड़ और नालियों का गंदा पानी भरा रहता था. बरसात के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते थे. पैदल चलना तो दूर, दुपहिया वाहन निकालना भी मुश्किल हो जाता था. स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और किसानों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था, जिससे ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो रहा था.
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग की. सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाए गए और चुनाव के समय नेताओं से भी सड़क बनवाने का वादा लिया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला. लगातार उपेक्षा से परेशान होकर ग्रामीणों ने तय किया कि अब सरकार का इंतजार करने के बजाय अपने स्तर पर समाधान निकालना ही बेहतर होगा. इसके बाद गांव में बैठक कर सामूहिक निर्णय लिया गया.
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बैठक में हर परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग देने का संकल्प लिया. किसी ने श्रमदान किया, किसी ने ट्रैक्टर-ट्रॉली उपलब्ध कराई तो किसी ने सड़क पर डालने के लिए मुरम और अन्य निर्माण सामग्री जुटाई. कई लोगों ने श्रमिकों के लिए औजार दिए, जबकि कुछ ग्रामीण भोजन और पेयजल की व्यवस्था में जुट गए. देखते ही देखते पूरा गांव सड़क निर्माण अभियान में शामिल हो गया और सामूहिक प्रयास से काम तेजी से आगे बढ़ने लगा.
सड़क निर्माण के दौरान गांव की महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई. आधे ग्रामीण खेतों में कृषि कार्य करते रहे, जबकि बाकी लोगों ने सड़क निर्माण में श्रमदान किया. महिलाओं ने घरों में भोजन तैयार कर श्रमिकों तक पहुंचाया. बच्चों ने भी छोटे-छोटे कार्यों में सहयोग देकर जिम्मेदारी निभाई. पूरे अभियान में गांव के लोगों की एकजुटता, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना साफ दिखाई दी, जिसने सभी को प्रेरित किया.
ग्रामीणों का यह प्रयास आज सामुदायिक सहभागिता की मिसाल बन गया है. आधा किलोमीटर सड़क तैयार होने से लोगों को राहत मिली है और बरसात के मौसम में आवागमन पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर सरकार सड़क बना देती तो उन्हें यह कदम नहीं उठाना पड़ता. बावजूद इसके उन्होंने यह साबित कर दिया कि जब पूरा समाज एक लक्ष्य के लिए साथ खड़ा हो जाए तो बड़े से बड़ा काम भी अपने दम पर पूरा किया जा सकता है.
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