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काली हल्दी में छिपे हैं कई औषधीय गुण, सूजन और पाचन से जुड़ी दिक्कतों में है रामबाण..जानिए इसके अनगिनत फायदे जो शायद ही हो आपको मालूम

गोंडा: काली हल्दी एक दुर्लभ औषधीय पौधा मानी जाती है. यह देखने में सामान्य हल्दी जैसी होती है, लेकिन इसका अंदरूनी हिस्सा गहरे नीले या काले रंग का होता है. इसी विशेषता के कारण इसे काली हल्दी कहा जाता है. आयुर्वेद में इसका उपयोग लंबे समय से पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है. आज भी कई लोग इसे अपने घरेलू और आयुर्वेदिक उपचारों का हिस्सा मानते हैं.

लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति ने बताया कि काली हल्दी का उपयोग पारंपरिक रूप से सूजन, शरीर के दर्द, त्वचा संबंधी समस्याओं और पाचन से जुड़ी कुछ परेशानियों में किया जाता है. कई लोग इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक मानते हैं.

वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति के अनुसार काली हल्दी में कई प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जिनकी वजह से आयुर्वेद में इसका विशेष महत्व है. इसका उपयोग कई आयुर्वेदिक तैयारियों में किया जाता है. कुछ लोग इसका लेप बनाकर त्वचा पर भी लगाते हैं. हालांकि, किसी भी औषधीय पौधे का उपयोग बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए.

डॉक्टर की सलाह है जरूरी

विष्णु दत्त प्रजापति बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से कोई बीमारी है या वह पहले से किसी दवा का सेवन कर रहा है, तो काली हल्दी का उपयोग करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए. गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को भी बिना सलाह इसका सेवन नहीं करना चाहिए.

विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि आज के समय में काली हल्दी की मांग लगातार बढ़ रही है. इसके औषधीय महत्व के कारण कई किसान इसकी खेती की ओर भी रुचि दिखा रहे हैं. बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलने से यह किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक अच्छा साधन बन सकती है.

सूजन या हल्के दर्द में फायदेमंद

विष्णु दत्त प्रजापति ने बताया कि शरीर में सूजन या हल्के दर्द की स्थिति में कुछ आयुर्वेदिक उपचारों में काली हल्दी का उपयोग किया जाता है। कई लोग इसका लेप बनाकर भी लगाते हैं. वहीं, त्वचा संबंधी कुछ समस्याओं में भी इसका पारंपरिक उपयोग बताया गया है. लेकिन यदि किसी व्यक्ति को एलर्जी, जलन या कोई गंभीर त्वचा रोग है, तो उसे बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए.

पाचन तंत्र के लिए लाभकारी

पाचन संबंधी परेशानियों में भी काली हल्दी का उपयोग कुछ आयुर्वेदिक नुस्खों में किया जाता है. हालांकि यदि पेट की समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. वैद्य का कहना है कि किसी भी औषधीय पौधे का सही लाभ तभी मिलता है, जब उसका उपयोग सही मात्रा और सही तरीके से किया जाए.

वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति का कहना है कि काली हल्दी आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान रखती है, लेकिन इसे चमत्कारी दवा नहीं समझना चाहिए. किसी भी स्वास्थ्य समस्या में सही इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। सही जानकारी और उचित मात्रा में उपयोग करने पर ही इसका सुरक्षित लाभ लिया जा सकता है.

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