Health

दादी-नानी के नुस्खों में बेहद खास यह चीज, गले और सांस की तकलीफ में देती है राहत, जानिए कैसे करती है यह काम

Mulethi Health Benefits: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादा लोगों की दिनचर्या ऐसी बन चुकी है कि वे अपने लिए समय ही नहीं निकाल पाते हैं. सुबह उठना, जल्दी-जल्दी नाश्ता करना, दिनभर धूल-धुएं और प्रदूषण के बीच रहना और फिर रात को थककर सो जाना, इन सबका धीरे-धीरे असर सेहत पर होने लगता है. सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलने लगता है और गले में हर वक्त भारीपन या अटकाव महसूस होता है, लेकिन लोग इसे मामूली थकान समझकर अनदेखा कर देते हैं. जब यही परेशानी रोज का हिस्सा बन जाती है, तो चिंता बढ़ने लगती है. आयुर्वेद में सदियों से इन सभी समस्याओं का सरल और प्राकृतिक उपाय बताया गया है. अब सवाल है कि आखिर सांस और गले से जुड़ी समस्याएं बढ़ती क्यों हैं? मुठेली सेहत के लिए कैसे फायदेमंद? आइए जानते हैं इस बारे में-

सांस और गले से जुड़ी समस्याएं क्यों बढ़ती हैं?

आयुर्वेद के अनुसार, सांस और गले से जुड़ी समस्याएं तब बढ़ती हैं, जब शरीर में कफ बढ़ जाता है और श्वसन नलियों में सूजन या जकड़न आ जाती है. इस स्थिति में ऐसी औषधियों की जरूरत होती है जो कफ को संतुलित करें, सूजन को कम करें और गले को आराम दें. इन्हीं गुणों के कारण मुलेठी को आयुर्वेद में एक खास स्थान दिया गया है. इसे संस्कृत में यष्टिमधु कहा जाता है, यानी ऐसी औषधि जिसका स्वाद मीठा हो और जो शरीर पर सकारात्मक प्रभाव छोड़े.

मुलेठी खराश और सूखी खांसी में कैसे फायदेमंद?

मुलेठी का उपयोग भारत में बहुत पुराने समय से होता आ रहा है. दादी-नानी के घरेलू नुस्खों में गले की खराश, सूखी खांसी या आवाज बैठने पर मुलेठी देने की आदत आज भी कई घरों में देखी जा सकती है. आयुर्वेद का मानना है कि मुलेठी शरीर की अंदरूनी गर्मी को शांत करती है और गले की सूखी परत को नमी देती है. इसके अंदर मौजूद प्राकृतिक तत्व गले और सांस की नली में जमा सूजन को धीरे-धीरे कम करने में मदद करते हैं.

मुलेठी सेहत के लिए कैसे करती है काम?

जब सांस की नली में सूजन या बलगम जम जाता है, तो सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है और गले में भारीपन बना रहता है. मुलेठी इस बलगम को हटाने का काम करती है. इसके नियमित और सीमित सेवन से सांस की नली खुलने लगती है और व्यक्ति को सांस लेने में राहत महसूस होती है. मुलेठी गले की अंदरूनी परत पर एक तरह की सुरक्षात्मक परत बनाती है, जिससे जलन और खराश कम होती है.

आयुर्वेद के अनुसार, मुलेठी पूरे श्वसन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है. बदलते मौसम में जिन लोगों को बार-बार खांसी, जुकाम या सांस की तकलीफ हो जाती है, उनके लिए यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करने में मददगार मानी जाती है. इसके प्राकृतिक तत्व शरीर को धीरे-धीरे संतुलन में लाने का काम करते हैं, जिससे समस्या बार-बार उभरने की संभावना कम हो सकती है.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj