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पति-पत्नी में अंडरस्टैंडिंग हो तो हैप्पी कटता है जीवन, पर कितना? अगर ये आदतें बिगड़ी तो घट जाती है बायलॉजिकल उम्र

Last Updated:October 22, 2026, 16:07 IST

Husband Wife Happy Life Risk: अधिकांश पति-पत्नी को अक्सर नोंक-झोंक करते दिखते हैं. लेकिन कुछ कपल ऐसे होते हैं जिनमें अंडरस्टैंडिंग बहुत अच्छी होती है और उनका जीवन खुशहाल होता है. उपर से लोगों को लगता है कि इनके लिए सब कुछ बेहतर ही होगा. निश्चित रूप से अगर सब कुछ सही है तो अच्छा होगा लेकिन ऐसे कपल सेहत को लेकर बेफिक्र हो जाते हैं. अगर सेहत को लेकर कुछ गलतियां करेंगे तो इससे बायलॉजिकल उम्र भी घट जाएगी.Amazon Prime DayTop Deals Insideपति-पत्नी में अंडरस्टैंडिंग हो तो हैप्पी कटता है जीवन, पर कितना?  Zoomरिश्तों में खुशहाली क्या सेहत के लिए भी है फायदेमंद. Photo : AI

Husband Wife Happy Life Risk: अगर कोई कपल बहुत खुश जीवन जी रहा है और पति-पत्नी के बीच अंडरस्टैंडिंग भी अच्छा है तो निश्चित रूप से ऐसे कपल की बायलॉजिकल उम्र भी बढ़ जाएगी. मतलब ऐसे कपल के शरीर की अंदरुनी ताकत या शरीर के अंग वास्तविक उम्र से ज्यादा जवान होते हैं. लेकिन यह चीजें उन कपल पर लागू होता है जिनकी लाइफस्टाइल और खान-पान अच्छी हो. यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा एट बर्मिंघम के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में इस बात की पड़ताल की है कि क्या खुशहाल पति-पत्नी सेहत के मामलों में भी अच्छे होते हैं. इसमें कपल के खुशहाल जीवन, उनकी लाइफस्टाइल, उनके खान-पान, नींद की आदत, तनाव आदि के पैमाने पर माप लिया गया. इसके बाद पाया गया कि अगर खुशहाल पति-पत्नी के बीच अंडरस्टैंडिंग ज्यादा है तो उनमें बायलॉजिकल उम्र तो बढ़ जाती है लेकिन यह बात उन कपल पर लागू होता है जो अपनी सेहत को लेकर भी अलर्ट रहते हैं.

खुशहाल कपल में बुढ़ापा देरे से
टीओआई की खबर में शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि जो कपल खुश रहते हैं. दोनों के बीच तालमेल अच्छी है. किसी बात को लेकर दोनों में तनाव नहीं होता. और इन सबके साथ उनकी हेल्दी आदतें हैं तो निश्चित रूप से उनमें बायलॉजिंग एजिंग धीमे हो जाती है. अध्ययन में कहा गया है कि रिश्ते की खुशी के साथ अगर हेल्दी आदतें हैं तो ऐसे लोगों में बुढ़ापा देर से आती है. शोधकर्ताओं ने 40 से 87 वर्ष की आयु के 107 विवाहित या साथ रहने वाले जोड़ों पर यह अध्ययन किया. उन्होंने रिश्ते की गुणवत्ता, नींद, डाइट और शारीरिक गतिविधि का आकलन किया. इसके बाद उनमें बायलॉजिकल एजिंग को मापने के लिए उनके खून के सैंपल की जांच की गई है. इनमें देखा गया कि जिन कपल के जीवन की गुणवत्ता अच्छी थी उनमें डीएनए मेथिलरेशन आधारित एजिंग क्लॉक बेहतर था. उनकी कोशिकाओं में p16INK4a मार्कर ज्यादा पाए गए. साथ ही उनके डीएनए के टेलोमेयर की लंबाई भी बहुत धीमी गति से घटी. कोशिकाओं में p16INK4a मार्कर का मतलब है कि कोशिकाएं जल्दी बूढ़ी नहीं होगी.

खुशहाल मैरिड लाइफ के साइड इफेक्ट

इस रिश्तों की खुशहाली का एक दूसरा पहलू भी था. अध्ययन में पाया गया कि कुछ कपल खुशहाल तो थे लेकिन उनकी दिनचर्या हेल्दी नहीं थी. उनका खान-पान खराब था और वह एक्सरसाइज को भी उतना महत्व नहीं देते थे. उनकी बायलॉजिकल एज में कोई खास फर्क नहीं देखा गया. इसे इस तरह से समझिए. कुछ कपल के बीच अंडरस्टैंडिंग काफी अच्छी होती है. लेकिन उनकी आदतें खराब हो जाती है. जैसे पति-पत्नी पूरी दिन घर में बैठे रहते हैं. उनमें साथ में स्क्रीन देखने की प्रवृति बढ़ जाती है. साथ में वे अनहेल्दी खाना खाते हैं. पिज्जा-बर्गर का अक्सर ऑर्डर कर देते हैं. बाहर का खाने की प्रवृति बढ़ जाती है. हमेशा साथ में समय तो बिताते हैं लेकिन एक्सरसाइज नहीं करते. शादी के बाद यह प्रवृति और बढ़ जाती है. इन सब अनहेल्दी कारणों से उनमें क्रोनिक बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है और फिर बायलॉजिकल एज भी घट जाती है. इसलिए शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि ये निष्कर्ष शुरुआती चरण के हैं. यह अध्ययन केवल संबंधों को दर्शाता है. इस बात का प्रमाण नहीं कि एक खुशहाल शादी या विशेष आदतें सीधे तौर पर बायलॉजिकल में बदलाव का कारण बनती हैं.

कपल एक-दूसरे को इस तरह कर सकते हैं प्रोत्साहित

इस अध्ययन में खुशहाल कपल को तीन तरह की सलाह दी गई. उन्हें रोजाना अपनी शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए कहा गया, डाइट को संतुलित करने को कहा गया और पर्याप्त नींद लेने को कहा गया. अध्ययन में कहा गया कि कपल नियमित रूप से टहलने जा सकते हैं, एक साथ साइकिल चला सकते हैं या ऐसी गतिविधियां चुन सकते हैं जिनका वे दोनों आनंद लेते हैं. इसके साथ ही सोने का एक सुसंगत समय तय करना चाहिए, देर रात तक स्क्रीन का उपयोग कम करना चाहिए और ऐसी दिनचर्या से बचना चाहिए जो बार-बार नींद में खलल डालती है. इसके बाद कपल साथ मिलकर भोजन की योजना बनाएं. पौष्टिक भोजन की खरीदारी करना और ज्यादा समय घर पर खाना बनाने को प्राथमिकता देना चाहिए. कभी-कभार पसंद की चीजें खाने को पूरी तरह से बंद करने की आवश्यकता नहीं है. बस यह ध्यान रखना होगा कि समय के साथ ऐसी आदतें न बन जाएं.

About the AuthorLakshmi Narayan

With 20 years of extensive experience in Hindi journalism, Lakshmi Narayan is a distinguished media professional and digital team leader at Network18, managing edit…

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October 22, 2026, 16:07 IST

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