Toll Update : फरवरी से लागू होगा टोल काटने का नया सिस्टम, इससे वाहन चालकों को फायदा होगा या नुकसान

Last Updated:September 11, 2026, 17:04 IST
New Toll System : सरकार ने फरवरी से नया टोल सिस्टम लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है. केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि अगले साल फरवरी से टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और सभी नेशनल हाईवे से बैरियर हटा दिए जाएंगे.फरवरी से बिना प्लाजा पर रुके ही टोल का भुगतान किया जा सकेगा.
नई दिल्ली. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को बताया कि भारत में फरवरी से राष्ट्रीय राजमार्गों पर बैंरियर-फ्री टोल शुरू हो जाएंगे. इससे वाहन चालकों को प्लाजा पर टोल देने के लिए रुकना नहीं पड़ेगा. ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026’ में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार अब फास्टैग को गाड़ी की नंबर-प्लेट पहचानने वाली तकनीक के साथ जोड़ने पर विचार कर रही है. वे टोल वसूलने के ऐसे सिस्टम की ओर बढ़ रहे हैं जो ज्यादा टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा और जिससे टोल कलेक्शन में भी काफी बढ़ोतरी होगी.
गडकरी ने कहा कि हम ऐसा टोल सिस्टम लागू करेंगे, जिनमें नंबर प्लेट और फास्टैग दोनों का इस्तेमाल होगा. उससे टोल की कमाई में सालाना 10,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी. उन्होंने कहा कि फास्टैग लागू होने के बाद टोल प्लाजा पर इंतजार का समय पूरी तरह खत्म हो जाएगा. एक समय ऐसा भी था, जब 12 मिनट और कुछ मामलों में 30 मिनट तक यहां रुकना पड़ता था. अब यह समय 80 से 90 फीसदी तक कम हो गया है. सरकार अब बाकी बचे समय को खत्म करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है.
कैसे काटा जाएगा टोलउन्होंने बताया कि प्रस्तावित सिस्टम से फास्टैग डेटा और गाड़ियों की नंबर प्लेट, दोनों का इस्तेमाल करके टोल कलेक्शन को मजबूत करने की उम्मीद है. नए सिस्टम से टोल वाले रास्तों पर गाड़ियों की पहचान और ट्रैकिंग बेहतर होगी. गडकरी ने कहा कि फास्टैग ने इंतजार का समय काफी कम करके और टोल प्लाजा पर कैश व छुट्टे पैसे की जरूरत को खत्म करके टोल कलेक्शन के तरीके को पहले ही बदल दिया है. अगला कदम यह पक्का करना है कि गाड़ियों को फीस देने के लिए टोल प्लाजा पर न रुकना पड़े. इसके बाद टोल प्लाजा का सही मकसद पूरा होगा.
आधुनिक होगी भुगतान व्यवस्थाकेंद्रीय मंत्री ने कहा कि टोल पेमेंट को आधुनिक बनाने और टोल प्लाजा पर अनुभव को बेहतर बनाने के सरकार के प्रयासों के तहत साल 2016 में फास्टैग लॉन्च किया गया था। फास्टैग के जरिए इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग की ओर भारत के कदम ने साफ नतीजे दिखाए हैं. इससे टोल कलेक्शन ज्यादा आसान, कुशल और पारदर्शी हो गया है. साल 2021 में फास्टैग को अनिवार्य कर दिया गया था, जिससे नेशनल हाईवे नेटवर्क पर कैश-बेस्ड पेमेंट से इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन की ओर बदलाव में तेजी आई.
अब रेडियो फ्रीक्वेंसी का होगा इस्तेमालगडकरी ने बताया कि फास्टैग को अनिवार्य करने के फायदे पहले ही साफ तौर पर दिख रहे हैं. लिहाजा सरकार अब बैरियर-फ्री टोलिंग के अगले चरण की ओर बढ़ रही है. फास्टैग रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है, ताकि जब गाड़ियां टोल प्लाजा से गुजरें, तो लिंक्ड अकाउंट से टोल चार्ज अपने-आप कट जाएं. इसे अपनाने से कैश पेमेंट पर निर्भरता कम हुई है और टोल कलेक्शन को सुव्यवस्थित करने में मदद मिली है.
About the AuthorPramod Kumar Tiwari
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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New Delhi,Delhi
First Published :
September 11, 2026, 17:04 IST



