Unique Temple: राजस्थान का अनोखा मंदिर, जहां देवी के रूप में होती है श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा की पूजा, अर्जुन से जुड़ी है खास मान्यता

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अनोखा मंदिर जहां देवी के रूप में होती है श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा की पूजा
Last Updated:October 20, 2026, 18:53 IST
Rajasthan Famous And Anoothe Temple: जालौर के भाद्राजून में स्थित प्राचीन धुम्बड़ा माताजी मंदिर महाभारत कालीन सुभद्रा और अर्जुन के गंधर्व विवाह से जुड़ा है. यहां सुभद्रा माता की पूजा देवी के रूप में होती है. नवरात्र की एकम से लेकर पूनम तक यहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होते हैं. इस दौरान मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल बन जाता है.
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जालौर. जालौर के भाद्राजून में एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जिसकी पहचान भगवान श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा से जुड़ी हुई है. स्थानीय लोग इस मंदिर को धुम्बड़ा माताजी के नाम से जानते हैं. यहां सुभद्रा माता की पूजा देवी के स्वरूप में की जाती है. मंदिर से जुड़ी मान्यता इसे महाभारत काल की कथा से जोड़ती है. यही वजह है कि भाद्राजून का यह धाम धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी खास माना जाता है.
मान्यता है कि इसी स्थान पर सुभद्रा और अर्जुन का गंधर्व विवाह हुआ था. कहा जाता है कि विवाह के बाद सुभद्रा ने कुछ समय इसी स्थान पर विश्राम किया था. स्थानीय परंपरा में इसी प्रसंग को मंदिर की स्थापना से जोड़कर देखा जाता है. यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि महाभारत की कथा से जुड़ी एक खास धरोहर भी है.
इतिहासकार ने लोकल18 को दी अनोखी जानकारीइतिहासकार बंशीलाल सोनी ने लोकल 18 को बताया कि यहां सुभद्रा और अर्जुन का गंधर्व विवाह हुआ था. उस समय सुभद्रा माता यहां रुकी थीं. तब से उनका यह प्राचीन मंदिर बना हुआ है. स्थानीय भाषा में लोग इन्हें डुंबाड़ा माताजी के नाम से जानते हैं. यह मंदिर बहुत प्राचीन और ऐतिहासिक है.
देवी के स्वरूप में होती है सुभद्रा माता की पूजाभाद्राजून के इस मंदिर की एक खास बात इसका स्थानीय नाम भी है. आमतौर पर भगवान श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा का नाम महाभारत की कथा में सुनने को मिलता है, लेकिन यहां उनकी पूजा माता के रूप में होती है. स्थानीय लोगों की आस्था में धुम्बड़ा माताजी का विशेष स्थान है. आसपास के क्षेत्र के लोग श्रद्धा के साथ यहां दर्शन करने पहुंचते हैं.
नवरात्र में उमड़ते हैं श्रद्धालुमंदिर से जुड़ी मान्यताओं के कारण नवरात्र के समय यहां श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ जाती है. नवरात्र की एकम से लेकर पूनम तक यहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होते हैं. इस दौरान मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल बन जाता है. आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
महाभारत की कथा से जुड़ी है मंदिर की पहचान
जालौर के भाद्राजून का यह मंदिर अपने आप में खास है. महाभारत की कथा से जुड़ी मान्यता और स्थानीय परंपरा ने धुम्बड़ा माताजी मंदिर को क्षेत्र की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है. यही वजह है कि यह मंदिर स्थानीय लोगों के साथ-साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Jalor,Jalor,Rajasthan
First Published :
October 20, 2026, 18:53 IST



