बागेश्वर धाम की प्रेरणा से अनोखी शादी, गायों को छप्पन भोग, गोशाला में वैदिक मंत्रों के बीच लिए सात फेरे

Last Updated:April 23, 2026, 12:06 IST
Rajasthan Unique Wedding: उदयपुर के सांवलियाजी कस्बे में एक अनोखी शादी ने सभी का ध्यान आकर्षित किया. श्री सांवलियाजी मंदिर मंडल के कर्मचारी राजेंद्र शर्मा की पुत्री आयुषी का विवाह पारंपरिक होटल या डेस्टिनेशन वेडिंग के बजाय गोशाला में संपन्न हुआ. यह निर्णय बागेश्वर धाम के संत धीरेन्द्र शास्त्री की प्रेरणा से लिया गया, जिनका मानना है कि विवाह जैसे पवित्र संस्कार मंदिर या गोशाला में होने चाहिए क्योंकि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है. चिकारड़ा गांव स्थित श्री महावीर गोशाला में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नाथद्वारा से आए दूल्हे निखिल के साथ सात फेरे हुए. इस दौरान बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग मौजूद रहे और पूरा माहौल धार्मिक एवं भक्तिमय रहा. परिवार ने इसे समाज को संस्कृति और गोसेवा का संदेश देने का प्रयास बताया. कार्यक्रम में गोमाता की पूजा और छप्पन भोग का भी विशेष आयोजन किया गया.हर तरफ धार्मिक उत्साह देखने को मिला.
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उदयपुर. आज के समय में जहां शादियां बड़े होटल और डेस्टिनेशन वेडिंग में हो रही हैं, वहीं जिले के सांवलियाजी कस्बे में एक परिवार ने अपनी बेटी की शादी को खास बनाने के लिए अलग रास्ता चुना. यहां एक अनोखी शादी गोशाला में संपन्न हुई, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया. यह अनूठा विवाह श्री सांवलियाजी मंदिर मंडल के कर्मचारी राजेंद्र शर्मा की पुत्री आयुषी का था. परिवार ने यह फैसला बागेश्वर धाम के संत धीरेन्द्र शास्त्री की प्रेरणा से लिया.
संत का मानना है कि विवाह जैसे पवित्र संस्कार मंदिर या गोशाला में होने चाहिए, क्योंकि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है. इसी सोच के साथ उदयपुर के सांवलियाजी से करीब 8 किलोमीटर दूर चिकारड़ा गांव स्थित श्री महावीर गोशाला में पूरे विधि-विधान से विवाह की रस्में निभाई गईं. नाथद्वारा से दूल्हा निखिल बारात लेकर पहुंचे और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गोशाला परिसर में ही सात फेरे हुए. इस दौरान बड़ी संख्या में परिजन, रिश्तेदार और स्थानीय लोग मौजूद रहे.
गायों की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद हुई शादी की रश्म
विवाह की सबसे खास बात यह रही कि रस्मों से पहले गोशाला में मौजूद गायों की विधिवत पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद गायों को छप्पन भोग अर्पित किया गया. पूरे आयोजन के दौरान “गोमाता की जय” और “श्री सांवलिया सेठ” के जयकारों से माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा. परिवार के सदस्यों का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ शादी करना नहीं था, बल्कि समाज को एक सकारात्मक संदेश देना भी था. उनका मानना है कि जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों पर भी धर्म, संस्कृति और सेवा भाव को प्राथमिकता दी जा सकती है. इस आयोजन के जरिए उन्होंने गोसेवा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की है.
श्री सांवलिया सेठ को एक किलो चांदी का चढ़ाया सिंहासन
राजेंद्र शर्मा ने बताया कि वे पहले भी कई बार धीरेन्द्र शास्त्री से मिल चुके हैं और उन्हें सांवलियाजी आने का निमंत्रण दे चुके हैं. उनके विचारों से प्रभावित होकर ही उन्होंने यह निर्णय लिया. हालांकि शादी में संत शामिल नहीं हो पाए, लेकिन उनकी प्रेरणा पूरे आयोजन में साफ नजर आई. इसके अलावा, परिवार की आस्था श्री सांवलिया सेठ मंदिर में भी गहरी है. शादी के अवसर पर मंदिर में भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया गया और करीब एक किलो चांदी से बना सिंहासन भी भेंट किया गया.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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Location :
Udaipur,Rajasthan
First Published :
April 23, 2026, 12:06 IST


