Vach Plant Benefits: आयुर्वेद में खास है वच का पौधा, जानिए इसकी जमीन के अंदर की गांठ का इस्तेमाल

Last Updated:October 21, 2026, 17:45 IST
आयुर्वेद में कई ऐसे पौधों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनकी जड़ या जमीन के अंदर मौजूद हिस्से को पारंपरिक औषधीय तैयारियों में उपयोग किया जाता है. वच भी ऐसा ही एक पौधा है, जिसका वैज्ञानिक नाम Acorus calamus है. गोंडा के वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति ने इसके पारंपरिक इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी है. हालांकि, इसका सेवन करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. आइए जानते हैं वच से जुड़ी खास बातें.
गोंडा: भारत में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से किया जाता रहा है. वच भी ऐसा ही एक पौधा है. इसकी खास पहचान जमीन के अंदर मौजूद मोटी गांठ यानी राइजोम है, जिसका उपयोग पारंपरिक औषधीय तैयारियों में किया जाता है. वच का वैज्ञानिक नाम Acorus calamus है. वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति ने लोकल 18 से बातचीत में इस पौधे की विशेषताओं और पारंपरिक इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी.
वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति के अनुसार, वच का पौधा नमी वाली जगहों पर अच्छी तरह विकसित होता है. इसकी पत्तियां लंबी और पतली होती हैं, जबकि जमीन के अंदर मौजूद मोटी गांठ को राइजोम कहा जाता है. आयुर्वेदिक परंपरा में इसी हिस्से का इस्तेमाल औषधीय तैयारियां बनाने में किया जाता है.
वैद्य के मुताबिक, आयुर्वेदिक परंपरा में वच का इस्तेमाल पाचन से जुड़ी कुछ समस्याओं के लिए किया जाता रहा है. गैस, अपच और पेट से संबंधित परेशानियों में भी इसके प्रयोग का उल्लेख मिलता है. हालांकि, इसका इस्तेमाल किस मात्रा में और किस तरीके से किया जाना चाहिए, यह व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है.
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वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति ने बताया कि पारंपरिक चिकित्सा में वच का प्रयोग अनिद्रा जैसी समस्या में भी किया जाता है. इसके अलावा, बच्चों में हकलाने की समस्या के लिए भी इसके पारंपरिक इस्तेमाल का उल्लेख मिलता है. हालांकि, इन समस्याओं में वच की प्रभावशीलता और सुरक्षा को लेकर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है.
वैद्य के अनुसार, पारंपरिक चिकित्सा में वच का इस्तेमाल ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याओं के लिए भी किया जाता है. हालांकि, उच्च या निम्न रक्तचाप गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है. ऐसे में डॉक्टर की सलाह के बिना निर्धारित दवाएं बंद करके केवल वच का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. किसी भी तरह का प्रयोग करने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है.
वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति के मुताबिक, पारंपरिक प्रयोगों में वच की 3 से 5 ग्राम तक मात्रा का उल्लेख मिलता है. हालांकि, इसे सभी लोगों के लिए सेवन की सामान्य सलाह नहीं माना जाना चाहिए. इसकी सुरक्षित मात्रा और इस्तेमाल का तरीका व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर कर सकता है. औषधीय पौधा होने के बावजूद वच का मनमाने तरीके से सेवन करना उचित नहीं है. खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किसी बीमारी के लिए दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या में इसका इस्तेमाल करने से पहले योग्य डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है.
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October 21, 2026, 17:45 IST



