क्या थी Asian Test Championship? WTC से पहले एशिया का ‘टेस्ट वर्ल्ड कप’, जब सचिन-द्रविड़ की टीम भी नहीं जीत पाई थी

नई दिल्ली: भारत दो बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेल चुका है और दोनों ही बार उसे रनर अप की ट्रॉफी से संतोष करना पड़ा. पहली बार न्यूजीलैंड तो दूसरी बार ऑस्ट्रेलिया ने हराया. पिछले साइकिल में तो टीम फाइनल तक में भी नहीं पहुंच पाई थी. भारत दो टेस्ट मैच की सीरीज खेलने श्रीलंका पहुंच चुका है. इस मर्तबा क्या होगा ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप से बहुत पहले एशिया में भी टेस्ट क्रिकेट का चैंपियन तय करने की कोशिश हुई थी. साल 1998-99 में एशियन टेस्ट चैंपियनशिप खेली.
एशियन टेस्ट चैंपियनशिप में कितनी टीम थी?1998-99 में खेले गए इस टूर्नामेंट का मकसद एशिया में टेस्ट क्रिकेट को बढ़ावा देने के साथ-साथ उपमहाद्वीप की बेस्ट टेस्ट टीम चुनना भी था. इसका आयोजन एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) ने किया था. इसमें भारत-पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी तीन बड़ी टीम थी. बांग्लादेश को तब तक टेस्ट दर्जा हासिल नहीं हुआ था.
WTC से कितना अलग था ATC?
सिर्फ 3 टीमें9 टेस्ट खेलने वाले देशकुल 4 टेस्ट मैचमैच दो साल का लीग सिस्टमनॉकआउट फॉर्मेटपॉइंट्स टेबलएक फाइनललीग के बाद फाइनललगभग दो महीनेदो साल का चक्र
ATC में कैसा था भारत का प्रदर्शनटूर्नामेंट का पहला मैच भारत और पाकिस्तान के बीच कोलकाता के ईडन गार्डंस में खेला गया था, जो कई मायनों में ऐतिहासिक था. पाकिस्तान ने भारत को 46 रन से हराया था. मैच का सबसे विवादित पल तब आया, जब सचिन तेंदुलकर रन आउट हो गए. शोएब अख्तर से टक्कर के बाद उन्हें आउट दिया गया था. इस फैसला का ईडन गार्डेंस में जमकर विरोध हुआ था. फैंस इस कदर गुस्सा गए थे कि मैच कुछ समय के लिए रोकना पड़ा था. पहला मैच हारने के बाद कोलंबो में श्रीलंका से दूसरा टेस्ट ड्रॉ खेलने के बाद भारत एशियन टेस्ट चैंपियनशिप से बाहर हो गया क्योंकि लाहौर में खेले गए तीसरे मैच में पाकिस्तान और श्रीलंका का मुकाबला भी बेनतीजा ही रहा था.
पाकिस्तान ने जीती थी एशियन टेस्ट चैंपियनशिप12 मार्च 1999 को ढाका में हुए टूर्नामेंट के फाइनल में पाकिस्तान ने श्रीलंका को एक पारी और 175 रन से हराते हुए एशियन टेस्ट चैंपियनशिप की ट्रॉफी अपने नाम की थी. तब पाकिस्तान शायद दुनिया की सबसे खतरनाक टेस्ट टीम में गिनी जाती थी, जिसके बैटिंग ऑर्डर में सईद अनवर, एजाज अहमद, इंजमाम-उल-हक, मोहम्मद यूसुफ (यूसुफ योहाना), मोइन खान (कप्तान), शाहिद अफरीदी सरीखे दिग्गज थे तो गेंदबाजी आक्रमण वसीम अकरम, सकलैन मुश्ताक, शोएब अख्तर (तेज रफ्तार का नया सितारा) जैसे दिग्गजों से सजा था.
भारत के पास भी महान खिलाड़ियों की कमी नहीं थीसचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ की त्रिमूर्ती को वीवीएस लक्ष्मण, कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन का पूरा सपोर्ट था. गेंदबाजी में अनिल कुंबले, वेंकटेश प्रसाद जैसे अनुभवी तेज गेंदबाज टीम को मजबूत बनाते थे तो हरभजन सिंह और आशीष नेहरा सरीखे दिग्गज भी उस टीम का हिस्सा थे, जो आगे चलकर महान गेंदबाजों की श्रेणी में आए, लेकिन विदेशी परिस्थितियों में भारत की कमजोरी उस दौर में साफ दिखाई देती थी. आज टीम के पास शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत, केएल राहुल सरीखे बल्लेबाज हैं. आज भारतीय बॉलिंग अटैक में जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, रवींद्र जडेजा सरीखे नगीने हैं.
दूसरे एडिशन का भारत ने किया था बहिष्कार2002 में जब एशियन टेस्ट चैंपियनशिप का दूसरा संस्करण हुआ, तब भारत ने इसका बहिष्कार कर दिया था क्योंकि दोनों देशों के बीच बढ़ती दूरियां और खराब होते राजनैतिक संबंध के चलते पहले तो भारत ने अपना मैच लाहौर जाकर खेलने से इनकार किया बाद में टूर्नामेंट से ही हट गया. बांग्लादेश इस एडिशन की चौथी टीम थी. बाद में बिजी इंटरनेशनल कैलेंडर, टीवी अधिकारों की समस्याएं और आईसीसी के बढ़ते प्रभाव के चलते टूर्नामेंट बंद करना पड़ा.



