Health

Surya Grahan 2026 : आखिर सूर्य ग्रहण में क्यों पशु-पक्षी और इंसान हो जाते हैं भावुक, क्या है आसमान के सबसे बड़े विस्मयकारी शो का रहस्य

Surya Grahan 2026 : 12 अगस्त को इस साल का सबसे बड़ा और लंबा सूर्य ग्रहण लगने वाला है. इस सूर्य ग्रहण के कारण आधा अमेरिका और आधे यूरोप की धरती पर दिन में अंधेरा छा जाएगा. जितना बड़ा सूर्य ग्रहण उतना बड़ा वैज्ञानिकों को मौका. इसलिए इस बार का यह आसमानी शो कई मायनों में अद्भुत होगा. सूर्य ग्रहण प्रकृति की एक अद्भुत और विस्मयकारी घटना है, जो मानवीय कौतूहल को गहराई तक झकझोर देती है. दिन के उजाले में अचानक छाने वाला अंधकार और सूर्य का ‘रिंग ऑफ फायर’ या ‘कोरोना’ का दृश्य न केवल मंत्रमुग्ध करता है, बल्कि खगोल विज्ञान के लिए खोज के नए द्वार खोलता है. कई अध्ययनों में इस बात के संकेत मिलते हैं कि जब सूर्य ग्रहण होता है तो धरती पर पाए जाने वाले जीव-जंतु बेहद भावुक हो जाते हैं. सूर्य के बाह्य वायुमंडल ‘कोरोना’ के रहस्यों और सौर हवाओं को समझने के लिए सूर्य ग्रहण आज भी वैज्ञानिकों के लिए सबसे दुर्लभ और अमूल्य अवसर है. इस लिहाज से देखें तो इस बार इंसानों पर बदलते व्यवहार और सूर्य को कोरोना को समझने का सुनहरा मौका है. हम यहां विज्ञान की खगोलीय घटना से लेकर पर्यावरण, पशु-पक्षियों के व्यवहार और इंसानी भावनाओं पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में पड़ताल करेंगे.

सूर्य के कोरोना का अध्ययन

12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण खगोल वैज्ञानिकों के लिए सूर्य के ‘कोरोना’ के छिपे रहस्यों को समझने का सबसे दुर्लभ और अनमोल मौका है. दरअसल, जब सूरज का पूरा हिस्सा चंद्रमा के उस तरफ छुप जाता है तो वैज्ञानिकों को इसके कोरोना को अच्छी तस्वीर मिलती है. इससे कई रहस्यों को जानने का मौका मिलता है. 1919 के पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान ही सर आर्थर एडिंगटन ने आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत को प्रमाणित किया था. कोरोना सूर्य का सबसे बाहरी वायुमंडल है. सामान्य दिनों में सूर्य की चमक इतनी तेज होती है कि उसका यह बाहरी चमकीला घेरा (कोरोना) दूरबीनों में सही से दिखाई नहीं देता. सूर्य की सतह का तापमान लगभग 5,500 सेंटीग्रेड होता है, लेकिन उसके बाहरी कोरोना का तापमान 10 लाख से 30 लाख डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. सतह से दूर जाने पर तापमान कम होने के बजाय लाखों गुना क्यों बढ़ जाता है, यह सौर विज्ञान की सबसे बड़ी अनसुलझी पहेलियों में से एक है. 12 अगस्त को जब चंद्रमा सूर्य के चमकदार मध्य भाग को पूरी तरह से ढक लेगा, तो सूर्य का अत्यंत चमकीला प्रकाश छिप जाएगा और उसका ‘कोरोना’ सफेद मोतियों के मुकुट की तरह आसमान में जगमगाने लगेगा. इस पल का वैज्ञानिक शक्तिशाली दूरबीनों से एक साथ एलाइन करके कोरोना के सबसे नज़दीकी डेटा एकत्र करेंगे. इस तरह वैज्ञानिकों के लिए यह सूर्य ग्रहण ऐसा प्राकृतिक कैमरों का शटर है, जो सूर्य के सबसे रहस्यमयी हिस्से कोरोना का एक्स-रे करके सौर तूफानों और अंतरिक्ष के मौसम को समझने में मदद करेगा.

कैसे पशु-पक्षियों पर होता है असर

अब तक की रिसर्च से यह पता चलता है कि सूर्य ग्रहण का इंसानों से ज्यादा जानवरों के व्यवहार पर असर पड़ता है. फ्रांस 24 ने स्पेन में सेविले यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं से इस बारे में विस्तार से बात की है. शोधकर्ताओं का कहना है कि दिन में जब अचानक अंधेरा छा जाता है तो जीव-जंतुओं पर तीव्र प्रभाव पड़ता है. पिछले कई ग्रहणों में 300 से ज्यादा शोधकर्ता जानवरों की आवाज और व्यवहार पर अध्ययन कर रहे हैं. इको इकलिप्स नाम के इस प्रोजेक्ट के तहत जानवरों पर सूर्य ग्रहण से 2 दिन पहले और दो दिन बाद तक साउंड रिकॉर्डर लगाए जा रहे हैं. इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि दिन के बीच अचानक अंधेरा होने पर अलग-अलग जानवर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं. इससे ग्रहण से पहले, ग्रहण के दौरान और ग्रहण के बाद में जानवरों की आवाजों और व्यवहार की तुलना की जाएगी. इसमें खासतौर पर पक्षियों और चमगादड़ों पर ध्यान दिया जाएगा. एक्सपर्ट का अनुमान है कि ग्रहण के दौरान शाम जैसा अंधेरा उन्हें रात होने का भ्रम दे सकता है. चूंकि यह ग्रहण शाम के शुरुआती समय में होगा, इसलिए संभावना है कि चमगादड़ सामान्य समय से काफी पहले सक्रिय हो जाएं.

पिछले ग्रहणों के दौरान किए गए अध्ययनों में भी जानवरों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. मधुमक्खियां बड़ी संख्या में तेजी से अपने छत्ते में लौट जाती हैं. प्राइमेट्स एक जगह इकट्ठा होकर आसमान की ओर संकेत करते हैं. दिन में सक्रिय रहने वाले पक्षी शांत हो जाते हैं, जबकि रात में सक्रिय रहने वाले पक्षी और अन्य जीव सक्रिय हो जाते हैं. हाथी, शेर, प्राइमेट्स और भालू जैसे अन्य जानवरों के व्यवहार पर भी नजर रखी जाएगी. यह पहल इबेरियन एसोसिएशन ऑफ जूज एंड एक्वेरियम्स के समन्वय में होगी. इसके तहत ग्रहण के दौरान दिन और रात में सक्रिय रहने वाले कई तरह के जानवरों के व्यवहार में होने वाले बदलावों को रियल टाइम में रिकॉर्ड किया जाएगा. स्पेन के करीब एक दर्जन चिड़ियाघर, जो ग्रहण के रास्ते में रणनीतिक स्थानों पर स्थित हैं, इस अध्ययन में हिस्सा लेंगे.

मानव शरीर और दिमाग पर प्रभाव

सूर्य ग्रहण का मानव शरीर और दिमाग पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस पर अध्ययन हो रहा है. हालांकि इस विषय पर उपलब्ध शोध अभी सीमित है. 2017 में अमेरिका में हुए सूर्य ग्रहण के दौरान कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने करीब 30 लाख सोशल मीडिया पोस्ट का अध्ययन किया. ये पोस्ट ग्रहण के पूर्णता वाले रास्ते के अंदर और बाहर रहने वाले लोगों की थीं. 2022 में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों ने पूर्ण ग्रहण देखा, उनमें विस्मय और आश्चर्य की भावना अधिक तीव्र थी. उनकी भाषा भी कम आत्म-केंद्रित और अधिक सामाजिक, सहयोगी, विनम्र और सामूहिक भावना वाली थी. 2023 में न्यू मैक्सिको में एक वलयाकार सूर्य ग्रहण के दौरान एक पायलट अध्ययन में लोगों के दिमाग और दिल की प्रतिक्रियाओं को मापने की कोशिश की गई. वलयाकार ग्रहण वह होता है जब चंद्रमा का दिखाई देने वाला आकार सूर्य से थोड़ा छोटा होता है. इस अध्ययन का नेतृत्व ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक केट रूसो और शोधकर्ता एंड्रयू डब्ल्यू. बेली ने किया. उन्होंने ग्रहण के समय मस्तिष्क की तरंगों में ऐसे बदलाव दर्ज किए, जो विस्मय की भावना से मेल खाते थे. हालांकि इन नतीजों को अभी शुरुआती और खोजपरक माना जा रहा है. अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ने इस काम को ग्रहण के दौरान बायोमेट्रिक तकनीक के जरिए विस्मय की भावना का अध्ययन करने की पहली कोशिश बताया. इस बार भी सूर्य ग्रहण के दौरान दुनिया भर के वैज्ञानिक ऐसे ही अध्ययन करेंगे. बार्सिलोना स्थित वाल डी हेब्रोन रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता इस डेटा का अध्ययन करेंगे. उनका उद्देश्य यह समझना है कि जब हजारों लोग एक ही समय में ग्रहण का अनुभव करते हैं तो उनके शरीर में क्या होता है. इसके अलावा इस घटना से पैदा होने वाली भावनाएं दिल की धड़कन और सांस लेने की प्रक्रिया को किस तरह प्रभावित करती हैं.

वर्ष 2026 का दूसरा और अंतिम पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 बुधवार को लगेगा. भारतीय समयानुसार यह ग्रहण रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj