तेलंगाना CM को US जाने की इजाजत क्यों नहीं? मक्का पैक्ट पर बांग्लादेश की इच्छा… MEA ने हर सवाल का दिया जवाब

विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में शुक्रवार को कूटनीतिक गलियारों से जुड़े कई संवेदनशील और बड़े मुद्दों पर भारत का कड़ा रुख देखने को मिला. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के विदेश दौरे से लेकर पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर हुई कार्रवाई, बांग्लादेश के ‘मक्का पैक्ट’ में शामिल होने के संकेत और गंगा जल संधि पर विदेश मंत्रालय ने दोटुक अंदाज में सरकार का पक्ष साफ कर दिया. विदेश मंत्रालय के बयानों से साफ है कि भारत अपनी सुरक्षा, संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल को लेकर किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं है.
तेलंगाना सीएम का दौरा उचित नहींसबसे पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री के प्रस्तावित विदेश दौरे को लेकर उठे सवालों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्थिति स्पष्ट की. विदेश मंत्रालय ने तेलंगाना सीएम के अमेरिका दौरे को राजनीतिक मंजूरी देने से साफ इनकार कर दिया जबकि उनके ब्रिटेन (UK) दौरे को हरी झंडी दे दी गई है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि मुख्यमंत्रियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की विदेश यात्राओं के कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की जाती है. यह देखा जाता है कि दौरा उनके पद गरिमा और यात्रा के वास्तविक उद्देश्य के अनुरूप है या नहीं. अमेरिका दौरे का प्रस्तावित कार्यक्रम इन तय मानकों पर खरा नहीं उतरा, इसीलिए अनुमति नहीं दी गई.
पाकिस्तान में भारतीय हाई-कमीशन की सुरक्षानई दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर से कुछ ढांचे हटाए जाने की कार्रवाई पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि यह इस्लामाबाद में भारतीय मिशन के खिलाफ की गई कार्रवाई का अनुपातिक और जवाबी कदम था. विदेश मंत्रालय के अनुसार इस्लामाबाद में भारतीय हाई कमीशन के बाहर लगे पोल भारत के बार-बार अनुरोध के बावजूद हटा दिए गए थे, जिसके जवाब में भारत को भी उसी के अनुरूप एक्शन लेना पड़ा.
बांग्लादेश की मक्का पैक्ट वाली इच्छावहीं, बांग्लादेश द्वारा मक्का पैक्ट में शामिल होने की संभावना जताए जाने के मामले पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में हो रहे तमाम घटनाक्रमों पर बेहद करीबी और पैनी नजर बनाए हुए है. पाकिस्तान, साउदी अरब और तुर्की के बीच डिफेंस के क्षेत्र में ये मक्का पैक्ट हुआ है.
गंगा जल संधि को लेकर विदेश मंत्रालय ने याद दिलाया कि 1996 में 30 साल के लिए हुई इस संधि के तहत बनी संयुक्त समिति की बैठकें तकनीकी स्तर पर लगातार हो रही हैं और संयुक्त नदी आयोग के जरिए जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा जारी है. साथ ही अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की टिप्पणी का स्वागत करते हुए दोहराया गया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न व अविभाज्य अंग हैं.
सवाल-जवाब
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के अमेरिका दौरे को विदेश मंत्रालय ने मंजूरी क्यों नहीं दी?
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्रियों के विदेश दौरों की समीक्षा उनके पद और यात्रा के उद्देश्य के आधार पर होती है. तेलंगाना सीएम का अमेरिका दौरा इन मानकों के अनुरूप न होने के कारण नामंजूर किया गया, जबकि उनके ब्रिटेन दौरे को मंजूरी दे दी गई है.
पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर ढांचे हटाए जाने पर विदेश मंत्रालय ने क्या प्रतिक्रिया दी?
विदेश मंत्रालय ने इसे अनुपातिक और जवाबी कदम (Proportionate Measure) बताया. उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद में भारतीय हाई कमीशन के बाहर लगे पोल हटाने की पाकिस्तानी कार्रवाई के जवाब में ही भारत ने यह कदम उठाया है.
बांग्लादेश के ‘मक्का पैक्ट’ में शामिल होने के संकेतों पर भारत का क्या रुख है?
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया के तमाम घटनाक्रमों पर लगातार और बेहद बारीक नजर बनाए हुए है और स्थिति को ध्यान से मॉनिटर कर रहा है.



