ऊंटनी के दूध से साबुन बना रहे पाली के युवा किसान, जानें आप कैसे शुरू कर सकते हैं ये व्यवसाय?

Last Updated:September 19, 2026, 18:25 IST
How To Start Soap Bussiness : पाली के युवा किसान निर्मल चौधरी ने ऊंटनी के दूध को सिर्फ बेचने के बजाय इससे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट तैयार करने की पहल की है. उन्होंने ऊंटनी के दूध से प्राकृतिक साबुन बनाना शुरू किया, जिसकी बाजार में मांग बढ़ रही है. निर्मल के मुताबिक, दूध को दूर तक ताजा पहुंचाना चुनौती थी, इसलिए स्थानीय स्तर पर ही इसका इस्तेमाल करने का रास्ता चुना गया. इस काम से अब 35 से ज्यादा ऊंटपालक परिवार जुड़े हैं. स्थानीय महिलाओं को भी घर से साबुन तैयार करने और आमदनी का अवसर मिल रहा है. इस पहल ने ऊंट पालन से जुड़े परिवारों के लिए कमाई का एक नया रास्ता खोला है.
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पाली. राजस्थान के पाली जिले के युवा किसान निर्मल चौधरी ने ऊंटनी के दूध की उपयोगिता को समझते हुए एक शानदार मिसाल पेश की है. उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर इनोवेशन का रास्ता चुना और ऊंटनी के दूध से वैल्यू एडेड प्रोडक्ट के रूप में प्राकृतिक साबुन तैयार किया, जिसकी बाजार में अब जबरदस्त डिमांड है. निर्मल चौधरी ने ऊंटनी के दूध की उपयोगिता और इसके औषधीय गुणों को समझते हुए यह पहल शुरू की.
निर्मल ने सिर्फ दूध बेचने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि इससे वैल्यू एडेड ब्यूटी प्रोडक्ट यानी ऊंटनी के दूध का साबुन तैयार कर दिया. आज इस हर्बल साबुन की मांग बाजार में तेजी से बढ़ रही है. ऊंटनी का दूध स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है और आज बाजार में इसके चॉकलेट से लेकर मिल्क पाउडर तक कई प्रोडक्ट्स मौजूद हैं. लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऊंटनी के दूध का साबुन ही क्यों?
इसलिए केमल मिल्क से बने साबुन की डिमांडइस बारे में बात करते हुए निर्मल चौधरी ने बताया कि मिल्क पाउडर या चॉकलेट बनाने के लिए बहुत बड़े सेटअप और जटिल प्रक्रियाओं की जरूरत होती है. वहीं, साबुन एक ऐसा प्रोडक्ट है, जिसे घरेलू महिलाएं अपने घर पर ही आसानी से तैयार कर सकती हैं. ऊंटनी के दूध को शहरों तक पहुंचाना और उसे ताजा रखना एक बड़ी चुनौती थी, इसलिए स्थानीय स्तर पर ही इसके वैल्यू एडिशन (Value Addition) का रास्ता चुना गया.
इसलिए चुना साबुन बनाने का रास्तानिर्मल चौधरी ने कहा कि शुरुआत में जब हमने यह काम शुरू किया, तब दूध की खपत उतनी नहीं हो पा रही थी, जितनी हमने सोची थी. इसलिए हमने साबुन (Soap) बनाने पर ध्यान केंद्रित किया. साबुन बनाने में दूध और बटर की खपत ज्यादा होती है. ऊंटनी के दूध से बना यह साबुन त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद है. उनका कहना है कि यह खुजली और त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं में भी काफी असरदार है.
रोजगार और सामाजिक बदलावनिर्मल चौधरी के इस नवाचार से न केवल एक उपयोगी उत्पाद तैयार हो रहा है, बल्कि स्थानीय महिलाओं को घर बैठे रोजगार का जरिया भी मिल गया है. साबुन की बिक्री आसान है और लोग इसे काफी पसंद भी कर रहे हैं. वर्तमान में इस पहल से 35 से ज्यादा ऐसे परिवार जुड़े हुए हैं, जो ऊंट पालन करते हैं. इन्हीं परिवारों से ऊंटनी का दूध खरीदा जाता है और फिर उनकी मदद से साबुन तैयार किया जाता है. इससे पशुपालकों और महिलाओं दोनों को सीधा आर्थिक लाभ हो रहा है.
घर बैठे महिलाएं भी बन सकती हैं इस मुहिम का हिस्साजिन महिलाओं या परिवारों के पास ऊंट हैं, वे भी इस खास पहल से जुड़कर घर बैठे अच्छी आमदनी कर सकते हैं. ऊंटनी के दूध से साबुन बनाने का यह काम इतना आसान है कि महिलाएं इसे अपने घर पर ही तैयार कर सकती हैं. इस स्वरोजगार से जुड़ने के लिए वे मिल्क स्टेशन के ऑनर और युवा किसान निर्मल चौधरी से सीधे संपर्क कर सकती हैं. काम से जुड़ने की प्रक्रिया और अन्य सभी जरूरी जानकारियां मिल्क स्टेशन की वेबसाइट पर भी विस्तार से उपलब्ध हैं, जहां विजिट कर कोई भी इस बिजनेस मॉडल का हिस्सा बन सकता है.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
September 19, 2026, 18:25 IST



