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Agriculture : महंगे कीटनाशक छोड़िए, नीम की पत्तियों से घर पर बनाएं नीमास्त्र, इन खतरनाक कीटों से फसल को बचाने में मिलेगी मदद

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नीम की पत्तियों से घर पर बनाएं नीमास्त्र, कीटों से फसल को बचाने में मिलेगी मदद

Last Updated:September 19, 2026, 20:03 IST

How To Make Homemade Pest Control For Crops: जालोर के लखाणी जैविक फार्म में किसान बलवंत सिंह नीमास्त्र बना रहे हैं. यह नीम, गोबर और गोमूत्र से बनता है, जो माहू, सफेद मक्खी जैसे रस चूसक कीटों को नियंत्रित करता है. इसमें करीब 5 से 10 किलो नीम सामग्री के साथ लगभग 2 किलो देशी गाय का गोबर और 5 से 10 लीटर गोमूत्र मिलाया जाता है.

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जालोर. फसल में कीटों का प्रकोप बढ़ते ही किसानों के सामने सबसे बड़ी चिंता फसल को नुकसान से बचाने की होती है. खासकर माहू, सफेद मक्खी, थ्रिप्स और हरे तेले जैसे रस चूसक कीट पौधों को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे में किसान रासायनिक कीटनाशकों के साथ-साथ देसी विकल्पों का भी इस्तेमाल करते हैं. जालोर जिले की सायला तहसील के लखाणी जैविक फार्म में किसान बलवंत सिंह नीमास्त्र तैयार कर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल फसल में कीट नियंत्रण के लिए किया जाता है.

लखाणी जैविक फार्म के किसान बलवंत सिंह ने लोकल 18 को बताया कि नीमास्त्र तैयार करने के लिए सबसे पहले नीम की पत्तियां या नीम की गिरी ली जाती है. इसमें करीब 5 से 10 किलो नीम सामग्री के साथ लगभग 2 किलो देशी गाय का गोबर और 5 से 10 लीटर गोमूत्र मिलाया जाता है. इसके बाद इस मिश्रण को करीब 200 लीटर पानी में अच्छी तरह मिलाया जाता है.

तुरंत फसल पर इस्तेमाल न करेंमिश्रण तैयार होने के बाद इसे तुरंत फसल पर इस्तेमाल नहीं किया जाता. सामान्य तौर पर इसे करीब 24 से 48 घंटे तक रखा जाता है. इस दौरान घोल को बीच-बीच में हिलाया जाता है, ताकि सभी सामग्री अच्छी तरह मिल सके. तय समय के बाद घोल को छान लिया जाता है और फिर इसका इस्तेमाल फसल पर छिड़काव के लिए किया जाता है.

इन कीटों के नियंत्रण में किया जाता है इस्तेमालनीमास्त्र का उपयोग मुख्य रूप से माहू, सफेद मक्खी, थ्रिप्स, जैसिड यानी हरे तेले और मिलीबग जैसे रस चूसक कीटों के नियंत्रण में किया जाता है. इसके अलावा छोटे और शुरुआती अवस्था के कुछ इल्ली वर्ग के कीटों पर भी इसका प्रभाव हो सकता है.

कीटों की गतिविधि कम करने में मददनीमास्त्र का इस्तेमाल कीटों की खाने और अंडे देने की गतिविधि को कम करने में मदद के लिए किया जाता है. यही वजह है कि किसान इसे फसल की सुरक्षा के लिए देसी उपाय के तौर पर इस्तेमाल करते हैं.

About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…

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Jalor,Jalor,Rajasthan

First Published :

September 19, 2026, 20:03 IST

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