एक साल से 3 पैरों पर जी रही थी गाय, उदयपुर में हुआ ऐसा कमाल कि अब चारों पैरों पर दौड़ रही जिंदगी

उदयपुर. राजस्थान के राजसमंद जिले में एक गाय की जिंदगी बदलने वाली अनोखी कहानी सामने आई है. हाईवे पर हुए हादसे में अपना अगला पैर गंवा चुकी यह गाय पिछले एक साल से तीन पैरों के सहारे जिंदगी गुजारने के लिए विवश थी. गाय को लेकर गौशाला में देखरेख करने वाले भी परेशान थे, क्योंकि गाय को खड़े होने, चलने और बैठने में काफी दिक्कत होती थी. कई पशु चिकित्सकों ने घायल पैर को बचाने की कोशिश की, लेकिन गंभीर चोट के कारण आखिरकार उसे काटना पड़ा. इसके बाद गाय के लिए सामान्य जिंदगी जीना मुश्किल हो गया. हालांकि, गौशाला के लोगों ने उसकी देखभाल जारी रखी और मदद की तलाश करते रहे.
इसी बीच उदयपुर के नारायण सेवा संस्थान से संपर्क किया गया. दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग लगाकर नई जिंदगी देने वाले इस संस्थान ने पहली बार किसी गाय के लिए कृत्रिम पैर तैयार करने का फैसला किया. खास बात यह है कि संस्थान की टीम ने महज चार दिन में आधुनिक तकनीक और कार्बन फाइबर की मदद से गाय के लिए विशेष कृत्रिम पैर बना दिया. इसे लगाने के बाद गाय चारों पैरों के सहारे खड़ी हो सकी. इस कृत्रिम पैर की अनुमानित बाजार कीमत करीब एक लाख रुपये है, लेकिन गाय को यह सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई गई.
हाईवे पर हुए हादसे में तीन जगह से टूट गया था पैर
राजसमंद जिले के घोड़ाघाटी गांव में मुछाला महादेव मंदिर परिसर में गौशाला संचालित होती है. करीब एक साल पहले यहां की एक गाय हाईवे पर दुर्घटना का शिकार हो गई थी. हादसे में उसके अगले बाएं पैर में तीन जगह फ्रैक्चर हो गया था. मंदिर के पुजारी शंकर सिंह शक्तावत ने बताया कि गाय के पैर को बचाने के लिए कई डॉक्टरों से इलाज करवाया गया. तमाम प्रयासों के बावजूद पैर को बचाया नहीं जा सका और उसे काटना पड़ा. इसके बाद गाय करीब एक साल तक तीन पैरों के सहारे रही.
उदयपुर के नारायण सेवा संस्थान ने राजसमंद जिले में एक गाय को नई जिंदगी देने की अनोखी पहल की है
नारायण सेवा संस्थान ने पहली बार गाय के लिए बनाया कृत्रिम पैर
स्थानीय पशु चिकित्सकों की मदद से गाय की परेशानी नारायण सेवा संस्थान तक पहुंचाई गई. संस्थान के प्रोस्थेटिक्स एंड ऑर्थोटिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. मानस रंजन साहू ने बताया कि उनकी टीम के लिए किसी गाय का कृत्रिम पैर तैयार करना बिल्कुल नया अनुभव था. उन्होंने संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल से अनुमति मांगी. स्वीकृति मिलने के बाद टीम गौशाला पहुंची और गाय के कटे हुए पैर का नाप लिया. नारायण सेवा संस्थान अब तक 41,108 दिव्यांगजनों को नि:शुल्क मॉड्यूलर कृत्रिम अंग उपलब्ध करा चुका है, लेकिन गाय के लिए कृत्रिम पैर तैयार करने का यह पहला प्रयास था.
गाय करीब एक साल पहले हाईवे पर हुए हादसे में अपना अगला बायां पैर गंवा चुकी थी.
चार दिन में तैयार हुआ पैर, कार्बन फाइबर का किया इस्तेमाल
डॉ. साहू ने बताया कि गाय के पैर का सही आकार लेने के लिए फाइबर कास्ट तकनीक का इस्तेमाल किया गया. गाय के वजन को ध्यान में रखते हुए कृत्रिम पैर को मजबूत और हल्का बनाने के लिए कार्बन फाइबर का उपयोग किया गया. इसके अलावा जर्मन सामग्री और आधुनिक कलपुर्जों का भी इस्तेमाल हुआ. कृत्रिम पैर के सॉकेट के अंदर प्लास्टाजोट नाम की मुलायम सामग्री लगाई गई, ताकि गाय को पैर पहनने के दौरान दबाव और रगड़ से होने वाली परेशानी कम हो सके. संस्थान की तकनीकी टीम ने चार दिन में कृत्रिम पैर तैयार कर दिया.
गाय को कृत्रिम पैर लागने के बाद वह चारों पैरों के सहारे खड़ी हो सकी और अब चलने-फिरने लगी है
पैर लगते ही गाय की स्थिति में होने लगा सुधार
कृत्रिम पैर तैयार होने के बाद टीम दोबारा घोड़ाघाटी स्थित गौशाला पहुंची. यहां गाय को कृत्रिम पैर लगाया गया. पैर लगाने के बाद गाय चारों पैरों के सहारे खड़ी हो गई. करीब एक सप्ताह बाद गाय के चलने और बैठने में भी सुधार दिखाई दिया. अब वह आसपास के खेतों में घूम रही है. पुजारी शंकर सिंह शक्तावत ने बताया कि लंबे समय से गाय की परेशानी देखकर चिंतित थे. अब उसे बेहतर तरीके से चलते देखकर उन्हें खुशी हो रही है. नारायण सेवा संस्थान की मानें तो कृत्रिम पैर की अनुमानित बाजार कीमत करीब एक लाख रुपये हो सकती है. हालांकि, गाय के लिए इसे पूरी तरह नि:शुल्क तैयार किया गया है. संस्थान का अनुमान है कि उचित देखभाल के साथ कृत्रिम पैर करीब पांच साल तक उपयोग में आ सकता है.



