एम्स में रेजिडेंट की मौत पर डॉक्टरों का आक्रोश, ओपीडी बंद, जांच कमेटी बनी फिर भी आंदोलन जारी

जोधपुर. राजस्थान के जोधपुर एम्स में रेजिडेंट डॉ. रामनरेश यादव की मौत के बाद अस्पताल में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. घटना के विरोध में एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर और अन्य चिकित्सक विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं. हड़ताल का सबसे ज्यादा असर ओपीडी सेवाओं पर पड़ा है और मरीजों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है. एम्स प्रशासन की ओर से परिसर में एनाउंसमेंट कर ओपीडी सेवाएं प्रभावित होने की जानकारी मरीजों को दी जा रही है. ऑपरेशन और दूसरी चिकित्सा सेवाओं पर भी आंदोलन का असर बताया जा रहा है. इस बीच रेजिडेंट डॉक्टरों ने एम्स परिसर में व्हीलचेयर और स्ट्रेचर लगाकर प्रवेश मार्ग बंद कर दिया.
मंगलवार को ड्यूटी के दौरान एनस्थीसिया विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर रामनरेश यादव की मौत हुई थी. इसके बाद डॉक्टरों ने कैंडल मार्च निकालकर श्रद्धांजलि दी और मामले की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई. एम्स प्रशासन ने घटना के कारणों की जांच के लिए डीन एकेडमिक की अध्यक्षता में आंतरिक समिति बनाई है. पुलिस भी मामले की जांच कर रही है. रेजिडेंट डॉक्टरों की शिकायतों और समस्याओं की सुनवाई के लिए अलग समिति गठित की गई है, लेकिन इसके बावजूद आंदोलन फिलहाल जारी है.
ओटी ड्यूटी से निकले, बाथरूम में मिले अचेत
जानकारी के अनुसार मंगलवार को एनस्थीसिया विभाग में तैनात रेजिडेंट डॉक्टर रामनरेश यादव ड्यूटी के दौरान अचानक ओटी से चले गए थे. करीब दोपहर 1 बजे वह एम्स के रेस्ट रूम स्थित बाथरूम में अचेत अवस्था में मिले. साथी डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. घटना की सूचना पुलिस को दी गई. पुलिस ने शव को एम्स की मॉर्च्युरी में रखवाकर परिजनों को सूचना दी. मौके से एक इंजेक्शन और सिरिंज मिलने की बात सामने आई है. इसके आधार पर शुरुआती स्तर पर इंजेक्शन के ओवरडोज की आशंका जताई गई, हालांकि मौत की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.
जोधपुर एम्स से MBBS करने के बाद यहीं से कर रहे थे PG
रामनरेश यादव 29 वर्ष के थे और अलवर के बड़ा जोड़ के पास के रहने वाले बताए गए हैं. उन्होंने जोधपुर एम्स से ही MBBS की पढ़ाई पूरी की थी और इसी संस्थान में एनस्थीसिया विषय में PG कर रहे थे. उनके बड़े भाई दिल्ली एम्स में डॉक्टर हैं, जबकि उनके पिता गांव में रहते हैं. घटना के बाद साथी डॉक्टरों और रेजिडेंट्स में गहरा दुख और आक्रोश देखने को मिला है.
कैंडल मार्च निकालकर उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
रामनरेश यादव की मौत के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने देर रात एम्स परिसर में कैंडल मार्च निकाला. डॉक्टरों ने दिवंगत साथी को श्रद्धांजलि दी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की. रेजिडेंट्स का कहना है कि घटना की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर जिम्मेदारी सामने आती है तो उचित कार्रवाई की जानी चाहिए. सोशल मीडिया पर भी डॉक्टर के परिवार को 5 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग उठाई जा रही है.
भावुक साथी डॉक्टर ने उठाए व्यवस्था पर सवाल
इसी बीच सोशल मीडिया पर एक रेजिडेंट डॉक्टर का भावुक वीडियो भी सामने आया है. वीडियो में वह अन्य डॉक्टरों, फैकल्टी मेंबर्स और शिक्षकों से एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील करता दिखाई दे रहा है. उसने सवाल उठाया कि मामले में कार्रवाई क्यों नहीं हो रही और डॉक्टर अपने साथी, फैकल्टी और छात्रों के साथ खड़े क्यों नहीं हो सकते. रेजिडेंट ने लंबे समय तक ड्यूटी और काम के दबाव का भी जिक्र किया. उसने कहा कि डर के कारण कई लोग चुप रहते हैं और अब एक-दूसरे की गलती तलाशने के बजाय सामूहिक रूप से आगे आने की जरूरत है. उसने यह भी कहा कि वह खुद घटना की जानकारी होने के बावजूद तत्काल सामने नहीं आया और इसे लेकर खुद को भी जिम्मेदार मानता है.
प्रशासन ने बनाई दो समितियां
रेजिडेंट डॉक्टरों के विरोध के बाद एम्स प्रशासन ने घटना के कारणों की जांच के लिए डीन एकेडमिक की अध्यक्षता में आंतरिक समिति का गठन किया है. इसके साथ ही पुलिस भी अपने स्तर पर जांच कर रही है. रेजिडेंट डॉक्टरों की शिकायतों और समस्याओं की सुनवाई के लिए अलग समिति बनाई गई है. यह समिति रेजिडेंट्स की समस्याओं और शिकायतों पर सुनवाई करेगी. एम्स प्रशासन ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का भरोसा दिलाते हुए डॉक्टरों और छात्रों से संयम बनाए रखने तथा काम पर लौटने की अपील की है.
ओपीडी बंद, मरीजों की बढ़ी परेशानी
हड़ताल के कारण एम्स की ओपीडी सेवाएं प्रभावित हैं. अस्पताल पहुंच रहे मरीजों और उनके परिजनों को इलाज को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन की ओर से एनाउंसमेंट कर ओपीडी बंद होने की जानकारी दी जा रही है. ऑपरेशन समेत अन्य सेवाओं पर भी आंदोलन का असर बताया गया है. परिसर में व्हीलचेयर और स्ट्रेचर लगाकर प्रवेश मार्ग बंद किए जाने से मरीजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है. गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज और उनके परिजन उपचार को लेकर परेशान नजर आए.
जांच रिपोर्ट के बाद साफ होगी मौत की वजह
फिलहाल पुलिस और एम्स की आंतरिक समिति दोनों अपने-अपने स्तर पर मामले की जांच कर रही हैं. मौके से मिले इंजेक्शन और सिरिंज समेत अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी. दूसरी ओर रेजिडेंट डॉक्टर अपनी मांगों और निष्पक्ष जांच को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं. अब पुलिस जांच, आंतरिक समिति की रिपोर्ट और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर है.



