ओ थारी की! 10 नगर निगमों में जोधपुर-भरतपुर-अजमेर-पाली का सबसे धांसू मेयर खेल, जो रचेगा जोड़-तोड़ का चक्रव्यूह वही कहलाएगा राजस्थान का चाणक्य?

Rajasthan municipal election mayor game: राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में वार्डों का फैसला हो चुका है. अब अगली बड़ी लड़ाई मेयर की कुर्सी को लेकर है. इस बार के चुनाव के बाद राज्य के 10 नगर निगमों में चार ऐसे निगम हैं, जहां मेयर चुनाव का गणित सबसे ज्यादा दिलचस्प हो गया है. ये चार शहर हैं- जोधपुर, भरतपुर, अजमेर और पाली. इन चारों जगहों की तस्वीर एक जैसी नहीं है. कहीं BJP और कांग्रेस बराबरी पर हैं, कहीं निर्दलीयों ने दोनों बड़े दलों को पीछे छोड़ दिया है. वहीं कहीं कांग्रेस सबसे बड़ा दल बनकर सामने आई है. ऐसे में अब पार्षदों के समर्थन का गणित अहम हो गया है. तो बिना देर किए जानते हैं सभी समीकरण.
जोधपुर में 44-44 का सबसे बड़ा पेच
जोधपुर नगर निगम में BJP और कांग्रेस ने 44-44 वार्ड जीते हैं. यानी दोनों दल एक ही संख्या पर खड़े हैं. यही वजह है कि यहां मेयर की कुर्सी का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है. अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि किस पार्टी के पास कितने पार्षद हैं. सवाल यह है कि बाकी पार्षदों का समर्थन किस तरफ जाता है. बराबरी की स्थिति में एक-एक पार्षद का रुख भी बोर्ड बनाने के गणित को प्रभावित कर सकता है. इसलिए जोधपुर में दोनों दलों की नजर समर्थन जुटाने वाले समीकरण पर रहेगी.
भरतपुर में निर्दलीयों का सबसे बड़ा खेल
भरतपुर में मेयर चुनाव का गणित और भी अलग है. यहां निर्दलीयों ने 36 वार्ड जीतकर सबसे ज्यादा संख्या हासिल की है. BJP के खाते में 20 सीटें आईं, जबकि कांग्रेस 7 वार्डों में जीत सकी. BSP और RLP को भी एक-एक सीट मिली है. यानी भरतपुर में निर्दलीय पार्षदों की संख्या BJP और कांग्रेस दोनों से ज्यादा है. ऐसे में मेयर की कुर्सी के लिए उनका समर्थन अहम हो सकता है. यहां चुनावी मुकाबला वार्ड जीतने के बाद खत्म नहीं हुआ है. अब बोर्ड बनाने के लिए समर्थन का नया दौर शुरू होगा.
अजमेर में कांग्रेस सबसे बड़े दल में
अजमेर नगर निगम में कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है. BJP ने 32 वार्ड जीते हैं. वहीं 11 सीटों पर निर्दलीय पार्षद विजयी हुए हैं. कांग्रेस के पास सबसे ज्यादा सीटें जरूर हैं, लेकिन मेयर चुनाव का पूरा गणित केवल सबसे बड़े दल के आधार पर तय नहीं होता. बाकी पार्षदों का समर्थन भी अहम हो सकता है. इसलिए अजमेर में भी अब नजर इस बात पर होगी कि बोर्ड बनाने के लिए जरूरी समर्थन किस तरफ जाता है.
पाली में भी समर्थन का गणित अहम
पाली नगर निगम में कांग्रेस ने 29 वार्ड जीते हैं. BJP के खाते में 21 सीटें आई हैं, जबकि 15 निर्दलीय पार्षद चुनाव जीते हैं. यहां कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है, लेकिन निर्दलीयों की संख्या भी कम नहीं है. ऐसे में मेयर चुनाव के दौरान इन पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है. पाली में भी वार्ड के नतीजों के बाद अब अगली तस्वीर समर्थन के समीकरण से साफ होगी. किस दल के साथ कितने पार्षद आते हैं, इसी से मेयर की कुर्सी का रास्ता तय होगा.
अब चारों जगह शुरू होगा असली खेल
जोधपुर, भरतपुर, अजमेर और पाली में मेयर चुनाव का गणित अलग-अलग है. जोधपुर में BJP-कांग्रेस बराबर हैं. भरतपुर में निर्दलीय सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं. अजमेर और पाली में कांग्रेस सबसे आगे है. यही वजह है कि इन चार नगर निगमों में मेयर की कुर्सी के लिए राजनीतिक दलों की रणनीति पर सबकी नजर रहेगी. किसे किसका समर्थन मिलता है और कौन बहुमत का आंकड़ा जुटाता है, यह आने वाले चरण में अहम होगा. यानी राजस्थान के शहरी चुनाव का अगला मुकाबला अब वार्डों का नहीं, बल्कि मेयर की कुर्सी का है. चार शहरों में अलग-अलग समीकरण हैं. ऐसे में जो दल अपने पक्ष में जरूरी समर्थन जुटाने में सफल रहता है, उसके लिए बोर्ड बनाने का रास्ता साफ हो सकता है. इसी जोड़-तोड़ के चक्रव्यूह ने चारों निगमों के मेयर चुनाव को सबसे ज्यादा चर्चा में ला दिया है.
बाकी 6 निगमों का क्या है हाल?
जोधपुर, भरतपुर, अजमेर और पाली के अलावा बाकी छह नगर निगमों में तस्वीर अभी तक साफ नजर आ रही है. जयपुर में BJP सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है. कोटा में BJP ने 55 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया. उदयपुर में 53 और भीलवाड़ा में 45 सीटों के साथ BJP ने स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. अलवर में भी BJP 28 सीटों के साथ सबसे आगे रही. वहीं बीकानेर में कांग्रेस ने 42 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया. यानी 10 नगर निगमों में जयपुर, कोटा, उदयपुर, अलवर और भीलवाड़ा का समीकरण BJP के पक्ष में रहा, जबकि बीकानेर कांग्रेस के खाते में गया. इनमें उदयपुर, कोटा और भीलवाड़ा में बहुमत का आंकड़ा साफ है, इसलिए यहां मेयर चुनाव का गणित उन चार निगमों जैसा पेचीदा नहीं है.



