Rajasthan

करौली के टाइपिंग जादूगर हैं 72 साल के देवी सिंह, 35 साल से युवाओं को दे रहे ट्रेनिंग

Last Updated:September 20, 2026, 11:06 IST

Typing Wizard Devi Singh Chahar Story: करौली का आगरा टाइपिंग सेंटर पिछले करीब 35 वर्षों से युवाओं को टाइपिंग का हुनर सिखा रहा है. वर्ष 1989 में शुरू हुए इस सेंटर की पहचान 72 वर्षीय देवी सिंह चाहर हैं, जिन्हें स्थानीय लोग टाइपिंग का जादूगर भी कहते हैं. चाहर का दावा है कि अब तक हजारों युवा उनसे टाइपिंग सीख चुके हैं और इनमें से कई सरकारी नौकरियों में चयनित हुए हैं. करौली के अलावा दिल्ली के गृह मंत्रालय और बेंगलुरु तक उनके सिखाए हुए युवा सेवाएं दे रहे हैं. सेंटर में टाइपिंग सिखाने के दौरान उंगलियों की सही मूवमेंट और की-बोर्ड पर उनकी स्थिति पर खास ध्यान दिया जाता है. सरकारी भर्ती परीक्षाओं के टाइपिंग टेस्ट की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी भी यहां पहुंचते हैं.

आज के डिजिटल दौर में कंप्यूटर और मोबाइल ने काम करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. सरकारी नौकरी हो या निजी क्षेत्र, कंप्यूटर की जानकारी के साथ अच्छी टाइपिंग स्पीड भी युवाओं के लिए बेहद जरूरी हो गई है, लेकिन करौली में एक ऐसी जगह है, जहां पिछले करीब 35 वर्षों से युवाओं की उंगलियों को की-बोर्ड पर चलने का हुनर सिखाया जा रहा है.

यह कोई आधुनिक लैब या बड़ा संस्थान नहीं, बल्कि शहर का पुराना आगरा टाइपिंग सेंटर है. वर्ष 1989 में शुरू हुए इस सेंटर की सबसे खास पहचान यहां की मशीनें या तकनीक नहीं, बल्कि यहां 72 साल की उम्र में भी टाइपिंग सिखाने वाले देवी सिंह चाहर हैं. स्थानीय लोग उन्हें टाइपिंग का जादूगर तक कहते हैं.

कई दशकों से लगातार टाइपिंग सीखा रहे देवी सिंह चाहर का दावा है कि उनके यहां से अब तक हजारों युवा टाइपिंग सीख चुके हैं. इनमें बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है, जिन्होंने आगे चलकर सरकारी नौकरियों में जगह बनाई. उनका कहना है कि करौली के कई सरकारी कार्यालयों में उनके सिखाए हुए लोग काम कर रहे हैं. यहां तक कि दिल्ली के गृह मंत्रालय और बेंगलुरु तक उनके द्वारा टाइपिंग सीख चुके युवा अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

Add as Preferred Source on Google

72 वर्षीय देवी सिंह चाहर बताते हैं कि 35 वर्षों के सफर में उनके पास टाइपिंग सीखने के लिए हजारों बच्चे आए. इनमें से बड़ी संख्या में युवाओं ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं में सफलता हासिल की और टाइपिंग के जरिए नौकरी की प्रक्रिया पूरी की. चाहर कहते हैं मेरे यहां से जितने बच्चे टाइपिंग सीखकर गए हैं, उनकी संख्या किसी कॉलेज के विद्यार्थियों जितनी होगी. करौली में शायद ही ऐसा कोई सरकारी दफ्तर होगा, जहां मेरे से टाइपिंग सीखने वाला कोई बच्चा काम नहीं कर रहा हो.

शहर के सबसे पुराने टाइपिंग सेंटर की सबसे खास बात यहां पढ़ाने का तरीका बताया जाता है. यहां आने वाले विद्यार्थियों के मुताबिक देवी सिंह चाहर शुरुआत में ही विद्यार्थियों की उंगलियों को की-बोर्ड पर सही जगह चलाने की आदत डालते हैं.

आगरा टाइपिंग सेंटर करौली के पुराने टाइपिंग सेंटरों में से एक है. यहां टाइपिंग सिखाने वाले देवी सिंह चाहर के पास कई दशकों का अनुभव है. यहाँ टाइपिंग सीखने वाले स्टूडेंट बताते हैं कि कई युवा बाहर से भी यहां टाइपिंग सीखने आते हैं. खासकर ऐसे अभ्यर्थी जो किसी सरकारी भर्ती परीक्षा के अन्य चरणों में सफल होने के बाद टाइपिंग टेस्ट की तैयारी करते हैं.

देवी सिंह चाहर बताते हैं कि उनका पूरा जोर विद्यार्थियों की उंगलियों की सही मूवमेंट पर रहता है. उनका कहना है कि यदि कोई बच्चा उनकी बताई हुई तकनीक को ठीक से समझ ले तो टाइपिंग सीखना मुश्किल नहीं रहता. वह विद्यार्थियों को केवल सॉफ्टवेयर के भरोसे नहीं छोड़ते, बल्कि टाइपिंग की बुनियादी तकनीक और उंगलियों की सही स्थिति पर ज्यादा ध्यान देते हैं.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|First Published :

September 20, 2026, 11:06 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj