वोटिंग से पहले पार्षदों की बाड़ेबंदी पर बवाल, धमकी और अपहरण के आरोपों से सियासत गर्म

जयपुर. राजस्थान में नगर निकाय चुनाव अब उस निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए हैं, जहां पार्षदों के वोट से मेयर, सभापति और चेयरमैन पदों की तस्वीर साफ होगी. मतदान से ठीक पहले कई निकायों में पार्षदों की बाड़ेबंदी, उनके अचानक संपर्क से बाहर होने, परिवारों को परेशान करने, धमकी देने और दबाव बनाने के आरोपों ने सियासी माहौल गरमा दिया है. कांग्रेस ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े 46 मामलों की शिकायतें जिला प्रशासन के सामने रखने का दावा किया है. पार्टी का आरोप है कि उसके पार्षदों को दूसरे पक्ष के प्रत्याशियों के समर्थन में मतदान के लिए दबाव में लिया जा रहा है. कुछ मामलों में पुलिस तक शिकायत पहुंची है, जबकि कुछ जगह पार्षदों के परिजनों ने भी विरोध दर्ज कराया है.
हनुमानगढ़ के संगरिया से लेकर सूरतगढ़, जालोर, श्रीगंगानगर, खंडार और बामनवास तक बाड़ेबंदी और पार्षदों को लेकर विवाद सामने आने की बात कही गई है. संगरिया में तो मामला अंतरराज्यीय पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया, जबकि श्रीगंगानगर में एक निर्दलीय पार्षद ने गैंगस्टर के नाम से धमकी भरा कॉल आने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई है. दूसरी ओर, जिन मामलों में आरोप लगाए गए हैं, उनमें पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी. मतदान से पहले इन घटनाओं ने पार्षदों की सुरक्षा और स्वतंत्र मतदान को लेकर बहस तेज कर दी है.
संगरिया में पंजाब तक पहुंचा विवाद
हनुमानगढ़ जिले की संगरिया नगरपालिका में अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले पार्षदों की बाड़ेबंदी को लेकर विवाद सामने आया. कांग्रेस की ओर से अपने पार्षदों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई. इसी दौरान दो पार्षद ओमप्रकाश स्वामी और साहिल स्वामी के अपहरण का मामला दर्ज होने के बाद पंजाब पुलिस उनके बारे में जानकारी जुटाने संगरिया पहुंची. पुलिस के बाड़ेबंदी स्थल पर पहुंचने के बाद विधायक अभिमन्यु पूनिया और पुलिसकर्मियों के बीच बहस की स्थिति बनी. विधायक ने भाजपा पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया. वहीं दोनों पार्षदों ने खुद के अपहरण से इनकार करते हुए कहा कि वे अपनी इच्छा से पंजाब गए थे. मामले को लेकर थाने के बाहर धरना-प्रदर्शन भी हुआ. स्थानीय लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई का विरोध किया. पूरे घटनाक्रम ने संगरिया के स्थानीय विवाद को अंतरराज्यीय पुलिस कार्रवाई से जोड़ दिया.
सूरतगढ़ में पार्षद के लापता होने की चर्चा
सूरतगढ़ नगर परिषद में सभापति पद को लेकर मुकाबला सुशील गुप्ता और कांग्रेस के भरत नागदा के बीच बताया जा रहा है. यहां पार्षदों की संख्या को देखते हुए हर वोट महत्वपूर्ण है. कांग्रेस की बाड़ेबंदी से कुछ पार्षदों के गायब होने की अफवाह सामने आई, जिसे कांग्रेस प्रत्याशी भरत नागदा ने खारिज किया. इसी बीच वार्ड 43 के कांग्रेस पार्षद कृष्ण कुमार के बीकानेर से लौटते समय संदिग्ध परिस्थितियों में संपर्क से बाहर होने की बात सामने आई. उनके परिजनों और वार्डवासियों ने सूरतगढ़ डीएसपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. परिषद के संख्यात्मक समीकरण को लेकर भी यहां मुकाबला अहम है. दिए गए इनपुट के मुताबिक 35 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के पास 16-16 पार्षद हैं, जबकि एक स्वतंत्र और दो निर्दलीय पार्षद बताए गए हैं. ऐसे समीकरण में एक-एक वोट की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है.
जालोर में धमकी और प्रलोभन के आरोप
जालोर में जन अभियोग निराकरण समिति के पूर्व अध्यक्ष पुखराज पारासर ने कांग्रेस बोर्ड बनने का दावा किया है. उन्होंने कांग्रेस के 19 पार्षदों के एकजुट होने और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया. कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया है कि उसके पार्षदों और उनके परिवारों पर दूसरे पक्ष के प्रत्याशी के समर्थन में मतदान करने का दबाव बनाया जा रहा है. घरों के बाहर रेकी करने, फोन पर धमकी देने और पैसों का प्रलोभन देने जैसी शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है. कांग्रेस ने इन मामलों की शिकायत जिला प्रशासन के सामने रखने की बात कही है. जालोर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे जाने की जानकारी भी दी गई है. हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.
श्रीगंगानगर में गैंगस्टर के नाम से धमकी का आरोप
श्रीगंगानगर नगर परिषद सभापति चुनाव में भी विवाद सामने आया है. निर्दलीय पार्षद हेमराज चौधरी ने आरोप लगाया कि उन्हें गैंगस्टर के नाम से फोन कर निर्दलीय उम्मीदवार संजय मुंदड़ा के पक्ष में मतदान करने के लिए धमकाया गया. हेमराज चौधरी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है. शिकायत में संजय मुंदड़ा के अलावा व्यवसायी अशोक चांडक और कॉलोनाइजर मुकेश शाह के नाम भी सामने आए हैं. पुलिस मामले की जांच कर रही है और कॉल तथा धमकी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है. श्रीगंगानगर में भाजपा के अजय दावड़ा और भाजपा के बागी निर्दलीय उम्मीदवार संजय मुंदड़ा के बीच मुकाबला बताया गया है. ऐसे में धमकी के आरोपों ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है.
अमलगढ़ क्षेत्र में कांग्रेस समर्थित पार्षदों को परेशान का आरोप
अमलगढ़ क्षेत्र में कांग्रेस समर्थित पार्षदों और उनके परिवारों को परेशान करने तथा धमकाने के आरोप लगाए गए हैं. कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जयपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक को शिकायत सौंपने की बात कही है. शिकायत में कई स्थानीय राजनीतिक लोगों और कार्यकर्ताओं के नाम शामिल किए गए हैं. खंडार में भाजपा पार्षद मानेंद्र की पत्नी और पिता की ओर से पार्षद को जबरन बाड़ेबंदी में रखने का आरोप लगाया गया. वहीं बामनवास विधायक और कांग्रेस जिलाध्यक्ष इंदिरा मीणा की ओर से पुलिस को ज्ञापन देकर बाली से निर्दलीय पार्षद को गायब किए जाने का आरोप लगाया गया. इन मामलों में भी आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद स्पष्ट होगी.
मतदान से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
निकाय चुनाव में मेयर, सभापति और चेयरमैन के पदों के लिए पार्षदों का समर्थन निर्णायक होता है. यही वजह है कि मतदान से पहले दोनों प्रमुख दलों की ओर से पार्षदों को एकजुट रखने के प्रयास तेज हुए हैं. बाड़ेबंदी इसी रणनीति का हिस्सा है, लेकिन जब पार्षदों के संपर्क से बाहर होने या परिवारों पर दबाव के आरोप सामने आते हैं तो विवाद बढ़ जाता है. अब मतदान से पहले सबसे बड़ा सवाल पार्षदों की सुरक्षा और स्वतंत्र रूप से मतदान करने का है. प्रशासन और पुलिस के सामने भी इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती है. मतदान के बाद ही यह साफ होगा कि बाड़ेबंदी, आरोपों और राजनीतिक खींचतान के बीच किस निकाय में बोर्ड का गणित किस तरफ जाता है.



