काय को मर रहीं: ‘पार्वती’ गाने की इस लाइन को लगभग लोग गा रहे गलत | यहां जानें क्या है सही लिरिक्स

नई दिल्ली. इन दिनों फिल्म ‘हनुमान अंश’ के एक गाना ‘पार्वती’ इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉट्स और म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहा है. भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह से जुड़े इस पवित्र प्रसंग को जिस सादगी और भक्ति के साथ बुना गया है, उसने छोटे से लेकर बड़े तक सभी का दिल जीत लिया है. हालांकि, जैसे-जैसे यह गाना लोगों तक पहुंचा, इसके असली बोलों को लेकर कन्फ्यूजन भी बढ़ता गया. ऑनलाइन अपलोड की गई कई लिरिक्स फाइलों में शब्दों के गलत ट्रांसलेशन दिख रहे हैं.
‘काय को मर रही’ बनाम ‘काय खुमर रही’: क्या सही है और क्या गलत?ज्यादातर लोग इस गीत की लाइनें सुनकर अपनी समझ के हिसाब से उन्हें गलत गा रहे हैं. जब आप इसके लिरिक्स ऑनलाइन सर्च करेंगे, तो आपको दो मुख्य रूप से गलत वर्शन मिलेंगे:
गलत लिरिक्स 1: ‘काय जिद कर रही, काय को हुमर रही…’
गलत लिरिक्स 2: ‘काय जिद कर रहीं, काय को मर रहीं…’
ये दोनों लिरिक्स पूरी तरह से गलत हैं. ‘मर रही’ या ‘हुमर रही’ जैसे शब्दों का बुंदेली और अवधी बोलियों में कोई मतलब नहीं निकलता. इस गाने के सही और असली लिरिक्स हैं:
‘काय जिद कर रहीं? काय खुमर रहीं ऐसे वर के लाने?’
यहां, ‘खुमर’ शब्द का मतलब उस दिव्य ध्यान, जुनून या परमानंद से है जिसमें देवी पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने में लीन थीं. ‘काय खुमर रही’ का सीधा मतलब है: ‘आप ऐसे वर के लिए इतनी वैरागी या मग्न क्यों हो रही हैं?’
‘पार्वती’ गाने के पूरे और सही लिरिक्सअगर आप इस भक्ति गीत को सही और असली लिरिक्स के साथ गाना चाहते हैं, तो ये रहे असली शब्द:
शंभू, शिव शंभू भोलेनाथ!जब जिद पे आ गई पार्वती, पार्वती, पार्वती…समझाने पहुंचे सप्तऋषि, सप्तऋषि, सप्तऋषि…काय जिद कर रहीं?काय खुमर रहीं?काय जिद कर रहीं?काय खुमर रहीं ऐसे वर के लाने?जाके सीस पे गंगा और गले में डारे फिर रहे सांप,जाके सीस पे गंगा और गले में डारे फिर रहे सांप…इतने सीधे-साधे हैं, सब कहते ‘भोलेनाथ’, भोलेनाथ…
इस लाइन में सप्तऋषि उत्सुकता और प्यार से माता पार्वती से पूछते हैं कि वो शिव के लिए इतनी जिद में क्यों हैं, जिनके सिर पर गंगा और गले में सांप हैं.



