क्या होता है Y क्रोमोसोम? मर्दों में हो रहा गायब, क्या सीधे कैंसर को दे रहा दावत

हमारा शरीर छोटी-छोटी कोशिकाओं यानी सेल्स से बना है. ये कोशिकाएं जैसे-जैसे पुरानी होती जाती हैं, मरती जाती है और शरीर में नई कोशिकाएं बनती जाती हैं. लेकिन जब ये कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा बढ़ती चली जाती हैं और मरने के बजाए शरीर में गांठ के तौर पर इकट्ठी होती जाती हैं, यही कैंसर बन जाती हैं. अभी तक शराब, सिगरेट, प्रदूषण और कई ऐसी स्थिति हैं, जिसे कैंसर के लिए जिम्मेदार माना जाता है. लेकिन वैज्ञानिक अब एक ऐसे जैविक बदलाव पर ध्यान दे रहे हैं जो उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों के शरीर में चुपचाप होता है. ये है Y क्रोमोसोम का धीरे-धीरे गायब होना.
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया कि पुरुषों की कुछ कोशिकाओं से Y क्रोमोसोम का खो जाना कैंसर विकसित होने के लिए असरदार माहौल बना सकता है. यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे कैंसर बनने के शुरुआती संकेतों को समझने में मदद मिल सकती है.
Y क्रोमोसोम क्या है और इसका शरीर में क्या काम है?
मानव शरीर की हर कोशिका में क्रोमोसोम होते हैं, जो हमारे आनुवंशिक निर्देशों को संभालते हैं. महिलाओं में XX और पुरुषों में XY क्रोमोसोम होते हैं. Y क्रोमोसोम पुरुषों में पाया जाने वाला सेक्स क्रोमोसोम है जो पुरुष विकास, प्रजनन क्षमता और कई जैविक प्रक्रियाओं से जुड़ा होता है. हालांकि लंबे समय तक वैज्ञानिक ये मान रहे थे कि Y क्रोमोसोम का काम मुख्य रूप से प्रजनन तक सीमित है. लेकिन पिछले कुछ सालों में हुए रिसर्च बताते हैं कि यह इम्यूनिटी सिस्टम, शरीर में इनफ्लेमेशन की प्रक्रिया और कई दूसरी बीमारियों के जोखिम को भी प्रभावित कर सकता है.
उम्र बढ़ने पर पुरुषों की कोशिकाओं में क्या बदलाव आते हैं?
जैसे-जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ती है, शरीर की कुछ कोशिकाएं Y क्रोमोसोम खोने लगती हैं. इसे वैज्ञानिक भाषा में “लॉस ऑफ वाई क्रोमोसोम” या LOY कहा जाता है. यह कोई दुर्लभ घटना नहीं है. अक्सर 65 के पार की उम्र वाले पुरुषों में रक्त कोशिकाओं के एक हिस्से में Y क्रोमोसोम गायब पाया गया है. उम्र बढ़ने के साथ इसकी संभावना और बढ़ती जाती है. अब तक इसे सिर्फ उम्र से जुड़ा एक सामान्य जैविक बदलाव माना जाता था. लेकिन नई स्टडी इस बोर इशारा कर रही हैं कि इसका संबंध कैंसर से भी हो सकता है.
नए अध्ययन में क्या चौंकाने वाली बात सामने आई?
यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के वैज्ञानिकों ने 405 पुरुषों के लगभग 1,000 टिशू सेंपलों का विश्लेषण किया. उन्होंने 11 प्रमुख मानव अंगों से लिए गए नमूनों की जांच की और 43 लाख से अधिक कोशिका केंद्रकों का अध्ययन किया. शोधकर्ताओं ने देखा कि Y क्रोमोसोम का नुकसान सिर्फ कैंसर कोशिकाओं में नहीं था, बल्कि कई बार उन ऊतकों में भी पाया गया जो देखने में पूरी तरह सामान्य लग रहे थे. यही इस अध्ययन की सबसे बड़ी खोज मानी जा रही है.
Y क्रोमोसोम और कैंसर के बीच क्या संबंध हो सकता है?शोधकर्ताओं के अनुसार, कैंसर के आसपास मौजूद सामान्य दिखने वाले ऊतकों में भी Y क्रोमोसोम की कमी देखी गई. इसका मतलब है कि कैंसर बनने की प्रक्रिया शायद उस क्षेत्र में पहले से शुरू हो चुकी थी, भले ही कोशिकाएं अभी सामान्य दिखाई दे रही हों. यानी जहां शरीर में जहां Y क्रोमोसोम की कमी हो रही है, वह अभी भले ही सामान्य दिख रहा है, लेकिन अंदरुनी तौर पर उसमें आनुवंशिक बदलाव शुरू हो चुके हैं. ये कैंसर की जल्द पहचान करने में बहुत ही अहम खोज हो सकती है.
ये वैसा ही है कि जैसे खेत में खड़ी फसल ऊपर से हरी-भरी नजर आ रही है, लेकिन मिट्टी के भीतर कोई बीमारी फैलना शुरू कर चुकी है. वैज्ञानिकों का मानना है कि Y क्रोमोसोम का नुकसान ऐसे ही छिपे हुए जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने में मदद कर सकता है. यानी जैसे-जैसे कोशिकाएं कैंसर की ओर बढ़ रही थीं, Y क्रोमोसोम का नुकसान भी बढ़ रहा था.
किन कैंसरों में यह प्रभाव ज्यादा देखा गया?
अध्ययन में विशेष रूप से कोलन कैंसर, रेक्टल कैंसर, इसोफेगल (भोजन नली) कैंसर, पैंक्रियाटिक कैंसर और फेफड़ों का कैंसर के आसपास के ऊतकों में Y क्रोमोसोम का नुकसान अधिक पाया गया. इस रिसर्च में सामने आई ये फाइंडिंग भविष्य में कैंसर स्क्रीनिंग और बायोप्सी की सटीकता बढ़ाने में उपयोगी हो सकता है.
Y क्रोमोसोम और इम्यून सिस्टम का संबंध
इससे पहले भी वैज्ञानिकों ने पाया था कि Y क्रोमोसोम की कमी कैंसर कोशिकाओं को प्रतिरक्षा प्रणाली से बचने में मदद कर सकती है. सामान्यतः हमारा इम्यूनिटी सिस्टम असामान्य कोशिकाओं को पहचान कर नष्ट करने की कोशिश करता रहता है. लेकिन अगर Y क्रोमोसोम का नुकसान इम्यूनिटी को कमजोर करता है, तो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने का मौका मिल सकता है. यही वजह हो सकती है कि कुछ अध्ययनों में Y क्रोमोसोम के नुकसान को अधिक मृत्यु दर से जोड़ा गया है.
पुरुषों में कैंसर के मामले ज्यादा क्यों देखे जाते हैं?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) के आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में पुरुषों में कैंसर के मामले महिलाओं की तुलना में ज्यादा आते हैं. इसके कई कारण जिम्मेदार हैं जैसे ज्यादा स्मोकिंग, शराब, हेल्थ स्क्रीनिंग में देरी और जैविक या आनुवांशिक अंतर. अब ये नई रिसर्च Y क्रोमोसोम के तौर पर एक नया खतरा जोड़ती है. हालांकि वैज्ञानिक अभी यह नहीं कह रहे कि Y क्रोमोसोम का गायब होना सीधे कैंसर का कारण है. लेकिन यह कैंसर बनने के अनुकूल वातावरण का संकेत जरूर हो सकता है.
भारत में कैंसर की स्थिति
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम (NCRP) के अनुसार भारत में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोत्तरी देखी जा रही है. ICMR की हालिया रिपोर्टों के अनुसार भारत में हर वर्ष लाखों नए कैंसर मामले सामने आते हैं. पुरुषों में फेफड़ों, मुख, भोजन नली और कोलोरेक्टल कैंसर प्रमुख हैं. देर से पहचान होने के कारण कई मामलों में इलाज चुनौतीपूर्ण हो जाता है. विशेषज्ञ लगातार इस बात पर जोर देते हैं कि शुरुआती पहचान कैंसर से बचाव की सबसे प्रभावी रणनीतियों में से एक है. यानी कैंसर की पहचान जितना जल्दी होगी, उसका इलाज उतना ही प्रभावी और तेजी से होगा.
क्या भविष्य में कैंसर की पहचान पहले संभव होगी?
यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना का यह अध्ययन पुरुषों में कैंसर के पीछे छिपे एक महत्वपूर्ण जैविक संकेत की ओर इशारा करता है. उम्र बढ़ने के साथ Y क्रोमोसोम का नुकसान सिर्फ एक सामान्य आनुवंशिक बदलाव नहीं हो सकता, बल्कि यह कैंसर बनने से पहले के जोखिम वाले वातावरण का संकेत भी हो सकता है. हालांकि अभी ये सिर्फ रिसर्च के आंकड़े हैं. लेकिन अगर इसे पुख्ता तरीके से कैंसर की पहचान और स्क्रीनिंग से जोड़ा जाए तो ये काफी मददगार साबित हो सकता है.



