Mirabai Story: माउंट आबू की इस झोपड़ी में 12 साल रहीं मीराबाई, पर्यटकों के लिए बन चुकी है खास पहचान

Last Updated:October 19, 2026, 06:17 IST
Religious Heritage of Sirohi: राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित माउंट आबू के अचलगढ़ क्षेत्र का मीराबाई से जुड़ा एक ऐसा स्थान है, जहां भक्ति और वैराग्य की लोककथाएं आज भी प्रचलित हैं. मान्यता है कि अचलगढ़ किले के पास पहाड़ी पर बनी एक झोपड़ी में भक्त शिरोमणि मीराबाई ने 12 वर्षों तक भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और तपस्या की थी. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, महाराणा कुंभा के महल का वैभव छोड़कर उन्होंने एकांत में भक्ति का मार्ग चुना. झोपड़ी के पास स्थित सावन-भादो कुंड को लेकर भी लोककथा प्रचलित है कि इसका निर्माण कृष्ण विरह में मीराबाई के आंसुओं से हुआ था. आज भी यह स्थान मीराबाई की झोपड़ी के नाम से पहचाना जाता है. यहां मीराबाई की मूर्ति के साथ अचलगढ़ किले के अवशेष और प्राचीन धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं.
सिरोही. भगवान श्री कृष्ण की अनन्य भक्त और मारवाड़ की मीराबाई का सिरोही के हिल स्टेशन आबूराज (माउंट आबू) से भी नाता है. यहां एक पहाड़ी पर बनी झोपड़ी में रहकर उन्होंने कई वर्षों तक तपस्या कर भगवान कृष्ण की भक्ति की थी. राजस्थान के प्रसिद्ध पर्वतीय पर्यटन स्थल आबूराज से करीब 7 किलोमीटर दूर स्थित अचलगढ क्षेत्र में पहाड़ी पर बने अचलगढ़ के किले के पास ही एक झोपड़ी बनी हुई है.
माना जाता है कि इसी स्थान पर भक्त शिरोमणि मीराबाई ने 12 वर्षों तक भक्ति की थी. स्थानीय रहवासी दिलीप भाई ने बताया कि पास में ही महाराणा कुम्भा का महल होने और कुम्भा के पड़पोते से ही मीराबाई का विवाह हुआ था. इसके बावजूद यहां उन्होंने महल का वैभव छोड़कर एक झोपड़ी में रहकर भगवान की भक्ति की. इस वजह से आज भी इस स्थान को मीराबाई की झोपड़ी के नाम से पहचाना जाता है.
मीराबाई के आंसुओं से बना है कुंड
एक अन्य लोककथा के अनुसार इस झोपड़ी के पास बना सावन भादो कुंड भी मीराबाई के आंसुओं से बना था. भगवान श्रीकृष्ण के विरह में मीराबाई के बहाए आंसुओं से इस कुंड का निर्माण हुआ. अचलगढ़ और सिरोही क्षेत्र की लोकसंस्कृति में मीराबाई की भक्ति का उल्लेख मारवाड़ी लोकगीतों में भी मिलता है. ‘आंकड़े री झोपड़ी छोड़ो मीराबाई हो’ जैसे लोकभजन उनके वैराग्य और भगवान कृष्ण के प्रति अटूट समर्पण को दर्शाता है. इन गीतों में राजमहल के वैभव और एकांत में बिताए जाने वाले भक्तिमय जीवन के बीच का अंतर दिखाया गया है.
इस स्थल का इतिहास के साथ धार्मिक महत्व भी है
माउंट आबू के अचलगढ़ की पहाड़ी पर बनी इस झोपड़ी का ऐतिहासिक महत्व होने के साथ धार्मिक महत्व भी है. वर्तमान में इस झोपड़ी में मीराबाई की मूर्ति विराजमान है. इसके अलावा पास में अचलगढ़ के किले के अवशेष, मां चामुंडा माता और मां काली के प्राचीन मंदिर है. इस स्थान के दर्शन करने के लिए दूरदराज से भक्त यहां आते हैं.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Sirohi,Rajasthan
First Published :
October 19, 2026, 06:17 IST



