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क्रिकेट से नफरत, कमरे में अकेलापन और डिप्रेशन… मंगेतर ने यूं बचाया ईशांत शर्मा का करियर

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क्रिकेट से नफरत, कमरे में अकेलापन और डिप्रेशन, मंगेतर ने बचाया ईशांत का करियर

Last Updated:September 18, 2026, 21:39 IST

Ishant Sharma recalls depression: ईशांत शर्मा ने बीती बातों को याद करते हुए कहा है कि 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जेम्स फॉकनर के एक ही ओवर में 30 रन लुटाने के बाद वह डिप्रेशन में चले गए थे. टीम इंडिया की उस हार के बाद वह लगातार 15 दिनों तक रोते रहे. इस कठिन समय में उनकी तत्कालीन मंगेतर प्रतिमा सिंह की सलाह और अटूट सपोर्ट ने उन्हें ढांढस बंधाया. प्रतिमा की सीख से प्रेरणा लेकर ईशांत ने शानदार वापसी की और भारत के लिए 100 से अधिक टेस्ट खेले.क्रिकेट से नफरत, कमरे में अकेलापन और डिप्रेशन, मंगेतर ने बचाया ईशांत का करियर Zoomईशांत शर्मा ने 13 साल पुराने वाक्ये को याद किया.

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसी शामें दर्ज हैं जिन्होंने खिलाड़ियों के करियर को एक नया मोड़ दिया. कुछ पल मैदान पर इतिहास रचते हैं, तो कुछ हार के वो घाव दे जाते हैं जो किसी खिलाड़ी को अंदर तक तोड़ देते हैं. ऐसा ही एक किस्सा तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा की जिंदगी में आया, जिसने उनके पूरे करियर और जीवन की दिशा बदल दी.

न्यूज18 इंडिया के खास कार्यक्रम ‘जज्बा’ में अपनी जिंदगी के इस सबसे मुश्किल अध्याय को साझा करते हुए ईशांत शर्मा (Ishant Sharma) ने बताया कि एक समय ऐसा आया था जब वह क्रिकेट की वजह से एक-दो दिन नहीं, बल्कि पूरे 15 दिनों तक लगातार रोते रहे थे. यह वाकया साल 2013 का है, जब भारत और ऑस्ट्रेलिया (IND vs AUS) के बीच एक बेहद रोमांचक मुकाबला खेला जा रहा था. मैच अपने अंतिम पड़ाव पर था और भारतीय टीम जीत के बेहद करीब दिख रही थी. ऑस्ट्रेलिया को जीत दर्ज करने के लिए आखिरी तीन ओवरों में 44 रनों की दरकार थी. मैदान पर दबाव चरम पर था और कप्तान ने भरोसा जताते हुए गेंद ईशांत शर्मा के हाथों में थमा दी.

ईशांत मैदान पर रन-अप लेने के लिए तैयार थे, लेकिन उस रात किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज जेम्स फॉकनर (James Faulkner) स्ट्राइक पर थे. ईशांत ने गेंदें फेंकना शुरू किया, लेकिन फॉकनर ने उनके एक ही ओवर में आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 30 रन बटोर लिए. जिस मैच को भारतीय टीम आसानी से जीतती हुई नजर आ रही थी, वह पलक झपकते ही हाथ से निकल गया. भारत वह मुकाबला हार गया और इस हार का सारा मलबे की तरह ईशांत शर्मा के कंधों पर आ गिरा.

हार के बाद का अंधेरा और 15 दिनों का दर्दईशांत शर्मा के लिए यह केवल एक मैच की हार नहीं थी, बल्कि उनके पेशेवर करियर का सबसे काला और दर्दनाक दिन बन गया था. मैच खत्म होने के बाद वह पूरी तरह टूट चुके थे. उन्हें लगा कि उनकी एक गलती ने पूरे देश की उम्मीदों और टीम इंडिया की मेहनत पर पानी फेर दिया है. इस वाकये के बाद ईशांत गहरे डिप्रेशन की चपेट में आ गए. क्रिकेट के प्रति उनका प्यार ही उनके लिए सबसे बड़े मानसिक तनाव का कारण बन गया था. वह खुद को कमरे में बंद कर लगातार 15 दिनों तक रोते रहे. हर पल उनके दिमाग में वही ओवर और फॉकनर के वो छक्के-चौके घूमते रहते थे.

जब जीवनसंगिनी बनीं सबसे बड़ी ताकतजब ईशांत निराशा के सबसे गहरे अंधेरे में डूब रहे थे, तब उनके जीवन में एक उम्मीद की किरण बनकर आईं उनकी तत्कालीन मंगेतर और अब पत्नी प्रतिमा सिंह. एक एथलीट होने के नाते प्रतिमा खेल के दबाव और उससे मिलने वाले दर्द को बखूबी समझती थीं. उन्होंने ईशांत को अकेले रोने के बजाय सच्चाई का सामना करने का साहस दिया. प्रतिमा ने ईशांत को संभालते हुए एक ऐसी बात कही जिसने उनके सोचने का जरिया ही बदल दिया. प्रतिमा ने उनसे साफ शब्दों में कहा, ‘क्रिकेट को सिर पर मत चढ़ाओ, जिंदगी बहुत बड़ी है. आज तुम्हारे पास दो रास्ते हैं या तो घर पर बैठकर अपनी किस्मत और उस एक ओवर पर रोते रहो, या फिर मैदान में वापस निकलकर इतनी कड़ी मेहनत करो कि यह हार भी तुम्हारे सामने छोटी पड़ जाए.’

कमबैक और 100 टेस्ट मैचों की महानतापत्नी प्रतिमा की इस कड़वी लेकिन सच्ची सलाह ने ईशांत के सोए हुए स्वाभिमान को जगा दिया. ईशांत ने रोना बंद किया और अपनी गलतियों से सीखकर खुद को दोबारा तराशने का फैसला किया. उन्होंने ट्रेनिंग ग्राउंड पर पसीना बहाना शुरू किया, अपनी गेंदबाजी की लेंथ और स्विंग पर काम किया और मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाया. मेहनत रंग लाई और ईशांत शर्मा ने मैदान पर एक नई ऊर्जा के साथ वापसी की. जो गेंदबाज कभी 30 रन देने के बाद डिप्रेशन में चला गया था, उसी ईशांत ने अपनी धारदार गेंदबाजी से दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाजों को खौफ में डाला. आगे चलकर ईशांत शर्मा ने न केवल अपनी जगह टीम में पक्की की, बल्कि भारत के लिए 100 से अधिक टेस्ट मैच खेलने वाले चुनिंदा और महान तेज गेंदबाजों की सूची में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों से दर्ज कराया.

About the AuthorKamlesh Raiचीफ सब एडिटर

कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…

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New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

September 18, 2026, 21:34 IST

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