खाकी का मानवीय चेहरा; अनाथ बच्चियों के मसीहा बने 104 एनकाउंटर करने वाले IPS डॉ. अनिल कुमार

Last Updated:September 29, 2026, 16:05 IST
Story Of IPS Dr. Anil Kumar : आजमगढ़ में हत्याकांड के बाद अनाथ हुई दो बच्चियों के लिए IPS डॉ. अनिल कुमार ने अपनी एक महीने की सैलरी की FD कराई. आजमगढ़ पुलिस ने भी एक दिन का वेतन देने का फैसला किया. अपराध के खिलाफ कार्रवाई के चलते उन्हें ‘एक्शन ऑन द स्पॉट’ के लिए भी जाना जाता है. लेकिन आजमगढ़ की घटना के बाद उनकी चर्चा एक अलग वजह से हो रही है. दो बच्चियों के सामने जब परिवार का सहारा नहीं रहा तो उन्होंने उनके भविष्य के लिए अपनी एक महीने की तनख्वाह देने का फैसला किया.
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अपराधियों पर सख्त एक्शन के लिए चर्चित IPS का दिखा अलग अंदाज, दो अनाथ बच्चियों के भविष्य के लिए देंगे एक महीने की सैलरी
झुंझुनूं. पुलिस की वर्दी को आमतौर पर सख्ती, अपराधियों पर कार्रवाई और कानून का डर दिखाने से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन झुंझुनूं जिले के अलसीसर की रामू की ढाणी से निकले यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी डॉ. अनिल कुमार की एक पहल ने उनकी पहचान का दूसरा पहलू भी सामने ला दिया है. आजमगढ़ में एक दर्दनाक हत्याकांड के बाद अनाथ हुईं दो मासूम बच्चियों के भविष्य के लिए उन्होंने मदद का हाथ बढ़ाया है. डॉ. अनिल कुमार ने बच्चियों के नाम अपनी एक महीने की सैलरी की एफडी कराने की घोषणा की है. उनकी इस पहल के बाद आजमगढ़ पुलिस के जवान भी आगे आए और बच्चियों की मदद के लिए एक दिन का वेतन देने का फैसला किया.
यह मामला आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में हुई गोलीबारी और हत्या की घटना से जुड़ा है. इस घटना में परिवार की दो मासूम बच्चियां अपने माता-पिता का साया खो बैठीं. ऐसे समय में जब बच्चियों के सामने आगे की जिंदगी और पढ़ाई का सवाल खड़ा हुआ, तब आजमगढ़ के एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने पुलिस अधिकारी की ड्यूटी से आगे बढ़कर उनके भविष्य की चिंता की.
अपराध के खिलाफ सख्त पहचान, अब बच्चियों के लिए संवेदनशील पहलडॉ. अनिल कुमार की पहचान उत्तर प्रदेश पुलिस में तेज कार्रवाई करने वाले अधिकारी के रूप में रही है. साल 2025 में सामने आए आंकड़ों के अनुसार उनके करीब आठ साल के सेवाकाल में 104 एनकाउंटर का आंकड़ा सामने आया था. अपराध के खिलाफ कार्रवाई के चलते उन्हें ‘एक्शन ऑन द स्पॉट’ के लिए भी जाना जाता है. लेकिन आजमगढ़ की घटना के बाद उनकी चर्चा एक अलग वजह से हो रही है. दो बच्चियों के सामने जब परिवार का सहारा नहीं रहा तो उन्होंने उनके भविष्य के लिए अपनी एक महीने की तनख्वाह देने का फैसला किया. यह रकम बच्चियों के नाम एफडी के रूप में जमा कराने की बात कही गई है. इस फैसले के बाद आजमगढ़ पुलिस के जवानों ने भी बच्चियों की मदद के लिए आगे आने का निर्णय लिया. पुलिसकर्मी अपने एक दिन का वेतन बच्चियों के लिए देने की बात कह चुके हैं. इस तरह एक अधिकारी की पहल के बाद पुलिस महकमे के दूसरे कर्मचारी भी इस मदद में शामिल हो गए.
एक घटना ने बच्चियों से छीन लिया परिवारआजमगढ़ के शंभूपुर गांव में हुई घटना के बाद दोनों बच्चियां अनाथ हो गईं. पुलिस कार्रवाई के दौरान बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था. इस पूरी घटना ने उनके परिवार को बुरी तरह तोड़ दिया. एक तरफ पुलिस मामले की जांच और कार्रवाई में जुटी रही, वहीं दूसरी तरफ इन बच्चियों के आगे की जिंदगी का सवाल भी खड़ा हो गया. ऐसे हालात में डॉ. अनिल कुमार ने बच्चियों के भविष्य के लिए व्यक्तिगत तौर पर मदद करने का फैसला किया. उन्होंने अपनी एक महीने की सैलरी एफडी के लिए देने की घोषणा की. उनके इस कदम का असर पुलिस महकमे में भी दिखाई दिया और जवानों ने एक दिन का वेतन देने का निर्णय लिया.
झुंझुनूं के छोटे से गांव से यूपी पुलिस तक का सफर
डॉ. अनिल कुमार मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनूं जिले के अलसीसर क्षेत्र की रामू की ढाणी के रहने वाले हैं. वह यूपी कैडर के 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. पुलिस सेवा में आने से पहले उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई की और डॉक्टर के तौर पर भी काम किया. इसके बाद सिविल सेवा की तैयारी की और पुलिस सेवा में आने का रास्ता चुना. उनका पुलिस करियर अपराध के खिलाफ कार्रवाई के लिए चर्चा में रहा है. साल 2025 में उनके आठ साल के सेवाकाल में 104 एनकाउंटर का आंकड़ा सामने आने की खबरें प्रकाशित हुई थीं. इसी वजह से उनकी पहचान एक सख्त पुलिस अधिकारी के तौर पर बनी. लेकिन आजमगढ़ की दो बच्चियों के मामले में उनका अलग रूप देखने को मिला. अपराधी के खिलाफ कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारी ने यहां उन बच्चियों के बारे में सोचा, जिनका इस घटना से पूरा परिवार उजड़ गया. एक महीने की सैलरी बच्चियों के नाम एफडी कराने का फैसला आर्थिक मदद से आगे एक भरोसा देने की कोशिश भी है कि मुश्किल समय में उनके साथ खड़े होने वाले लोग मौजूद हैं.
झुंझुनू से लेकर आजमगढ़ तक चर्चाडॉ. अनिल कुमार की इस पहल के बाद झुंझुनूं से लेकर आजमगढ़ तक उनकी चर्चा हो रही है. एक तरफ उनकी पहचान अपराध के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने वाले आईपीएस अधिकारी की है, वहीं दूसरी तरफ इस घटना ने उनकी मानवीय सोच भी सामने रखी है. बच्चियों के नाम उनकी एक महीने की सैलरी की एफडी और आजमगढ़ पुलिसकर्मियों की एक दिन की सैलरी की मदद अब उनके भविष्य के लिए सहारा बनेगी.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Jhunjhunu,Jhunjhunu,Rajasthan
First Published :
September 29, 2026, 16:03 IST



