छोटे से गांव डाबरा से बिहार के मुख्य सचिव तक, अब NTA की परीक्षा व्यवस्था सुधारेंगे अमृतलाल मीणा

Last Updated:September 15, 2026, 20:13 IST
Story Of IAS Amritlal Meena : एक छोटे से गांव से निकलकर पहले बिहार की ब्यूरोक्रेसी के शीर्ष पद तक पहुंचना और अब देश की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित राष्ट्रीय स्तर की टास्क फोर्स का हिस्सा बनना करौली के लिए भी गौरव की बात है. IAS अमृतलाल मीणा का मूलरूप से करौली के डाबरा गांव के निवासी है उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से हुई. पढ़े उनकी संघर्ष और सफलता की कहानी.
राजस्थान के करौली जिले के छोटे से गांव डाबरा से निकलकर बिहार की ब्यूरोक्रेसी के शीर्ष पद तक पहुंचने वाले वरिष्ठ IAS अधिकारी अमृतलाल मीणा अब एक और बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. बिहार के मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें देश की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित हाई पावर टास्क फोर्स में शामिल किया गया है.
यह टास्क फोर्स नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करेगी. इस छह सदस्यीय इस टास्क फोर्स की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी कर रहे हैं. वहीं करौली के रिटायर्ड IASअमृतलाल मीणा को इसमें लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट के तौर पर शामिल किया गया है.
खास बात यह है कि जिस अधिकारी ने करीब 4 दशक तक प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं, वही अब देश की प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को बेहतर बनाने में अपनी विशेषज्ञता देंगे. अमृतलाल मीणा 1989 बैच के बिहार कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं. वे अगस्त 2024 से अगस्त 2025 तक बिहार के मुख्य सचिव रहे. इससे पहले वे केंद्रीय कोयला मंत्रालय में सचिव और केंद्र सरकार में लॉजिस्टिक्स से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर भी काम कर चुके हैं.
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अमृतलाल मीणा का मूलरूप से करौली के डाबरा गांव से निवासी है. उनके परिवार के मुताबिक, शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से हुई. इसके बाद पढ़ाई के लिए वे गंगापुर सिटी चले गए. परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया. उनके छोटे भाई और पीडब्ल्यूडी विभाग में XEN शरद कुमार के मुताबिक, अमृतलाल मीणा शुरू से ही पढ़ाई में बेहद प्रतिभाशाली थे. पढ़ाई के प्रति उनकी लगन ऐसी थी कि आर्थिक परेशानियां भी उनके लक्ष्य के रास्ते में बाधा नहीं बन सकीं.
अमृतलाल मीणा ने जयपुर के MNIT से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और फिर पहले ही प्रयास में IAS बनने का सपना पूरा कर लिया. वर्ष 1989 में वे IAS बन गए और उन्हें बिहार कैडर मिला. इसके बाद बिहार के अलग-अलग जिलों और विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हुए वे प्रशासन के शीर्ष पदों तक पहुंचे. अगस्त 2024 में उन्हें बिहार का मुख्य सचिव बनाया गया.
मुख्य सचिव के पद से अगस्त 2025 में सेवानिवृत्त होने के बाद अमृतलाल मीणा का प्रशासनिक अनुभव खत्म नहीं हुआ. अब केंद्र सरकार ने उन्हें NTA की छह सदस्यीय विशेषज्ञ टास्क फोर्स में शामिल किया है, जिसका उद्देश्य देश की परीक्षा व्यवस्था में बड़े स्तर पर सुधारों का रोडमैप तैयार करना है.
अमृतलाल मीणा का अपने पैतृक गांव से लगाव आज भी बना हुआ है. परिवार के मुताबिक, करौली के डाबरा गांव में स्थित लोकदेवता क्षेत्रपाल बाबा में उनकी गहरी आस्था है. जब भी वे गांव आते हैं तो क्षेत्रपाल बाबा के मंदिर में दर्शन करना नहीं भूलते. करौली के एक छोटे से गांव से निकलकर पहले बिहार की ब्यूरोक्रेसी के शीर्ष पद तक पहुंचना और अब देश की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित राष्ट्रीय स्तर की टास्क फोर्स का हिस्सा बनना करौली के लिए भी गौरव की बात है.
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September 15, 2026, 20:13 IST



