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ट्रंप का ऑफर ठुकराकर पुराने दुश्मन से किम जोंग उन ने मिलाया हाथ क्या है प्लानिंग?

Last Updated:September 02, 2026, 15:24 IST

North Korea Resumes Ties with Vietnam: उत्तर कोरिया अब अपनी आइसोलेशन पॉलिसी से बाहर निकल आ रहा है और नए-नए देशों से डिप्लोमेटिक रिश्ते सामान्य करने में जुटा हुआ है. रूस और चीन के बाद अब उत्तर कोरिया अब वियतनाम से भी अपने ऐतिहासिक रिश्तों का हवाला देकर इसे ठीक कर रहा है. वो भी तब, जब वो ट्रंप के नरम पड़े तेवर को पूरी तरह नजरअंदाज कर चुका है.

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ट्रंप का ऑफर ठुकराकर 'पुराने दुश्मन' से किम जोंग उन ने मिलाया हाथZoomउत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन.

उत्तर कोरिया और वियतनाम के बीच दशकों पुराना कूटनीतिक रिश्ता एक बार फिर से अपनी पुरानी गर्मजोशी और सक्रियता की राह पर लौट रहा है. वियतनाम के 81वें राष्ट्रीय दिवस के पावन अवसर पर उत्तर कोरियाई सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन ने वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम को एक विशेष पत्र भेजा है. इस संदेश के जरिए किम ने दोनों देशों के बीच पारंपरिक दोस्ती, आपसी विश्वास और द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया है. उत्तर कोरिया की आधिकारिक समाचार एजेंसी केसीएनए की ओर से जारी इस पत्र ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों का ध्यान एक बार फिर प्योंगयांग और हनोई के बीच गहरे होते संबंधों की ओर आकर्षित किया है.

किम जोंग-उन ने अपने इस संदेश में इस बात पर विशेष जोर दिया कि पिछले साल अक्टूबर में प्योंगयांग में राष्ट्रपति तो लाम के ऐतिहासिक दौरे के दौरान जिन समझौतों और सहमतियों पर मुहर लगी थी. यह नया कदम उसी भावना को आगे बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम है. जानकारों का मानना है कि उत्तर कोरिया और वियतनाम अब अपने पुराने और ऐतिहासिक रिश्तों को पुनर्जीवित करने के लिए बेहद सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ रहे हैं.

2025 से बढ़े हैं नॉर्थ कोरिया-वियतनाम के रिश्ते

अक्टूबर 2025 में राष्ट्रपति तो लाम की उत्तर कोरियाई यात्रा इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुई थी, क्योंकि यह पिछले 18 वर्षों में किसी भी शीर्ष वियतनामी नेता की पहली प्योंगयांग यात्रा थी. इस उच्च स्तरीय मुलाकात ने दोनों देशों के बीच बंद पड़े संवाद के दरवाजों को खोल दिया, जिसके बाद से लगातार कूटनीतिक आदान-प्रदान में तेजी देखने को मिली है. इस साल मई के महीने में वियतनाम के विदेश मंत्री ले होआई चुंग ने उत्तर कोरिया का आधिकारिक दौरा किया और अपनी समकक्ष चो सोन-हुई के साथ द्विपक्षीय हितों के तमाम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. इसके ठीक बाद जून में दोनों देशों के सुरक्षा मंत्रियों की प्योंगयांग में एक अहम बैठक संपन्न हुई, जिसमें मुख्य रूप से सार्वजनिक सुरक्षा, आंतरिक कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में आपसी तालमेल को मजबूत करने पर मंथन किया गया.

भरोसेमंद दोस्ती बनाने में जुटे दोनों देश

उत्तर कोरिया और वियतनाम के बीच संबंधों की जड़ें काफी गहरी और ऐतिहासिक हैं. वैचारिक समानताओं और मुश्किल दौर में एक-दूसरे का साथ देने के कारण दोनों देशों के बीच पुराना राजनीतिक आत्मीय रिश्ता रहा है. हालांकि बदलते वैश्विक समीकरणों और क्षेत्रीय परिस्थितियों के चलते पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क थोड़ा सीमित जरूर हो गया था, लेकिन अब प्योंगयांग और हनोई दोनों ही इस रिश्ते के रणनीतिक महत्व को नए सिरे से समझ रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति को मजबूत करने और कूटनीतिक अलगाव से उबरने के लिए उत्तर कोरिया इन पुराने और भरोसेमंद मित्रों के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है. कुल मिलाकर, किम जोंग-उन का यह पत्र यह साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में उत्तर कोरिया और वियतनाम के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा के मोर्चे पर सहयोग और अधिक प्रगाढ़ होने वाला है.

अमेरिका-वियतनाम के रिश्ते

अमेरिका और वियतनाम के बीच रिश्ते उतार-चढ़ाव से भरे हुए हैं. लंबे समय तक फ्रांसीसी उपनिवेश रहने के बाद वियतनाम ने 1945 में हो ची मिन्ह के नेतृत्व में आजादी की घोषणा की. 1954 के जेनेवा समझौते के बाद देश अस्थायी रूप से दो भागों में बंट गया- उत्तर में साम्यवादी सरकार (हो ची मिन्ह) और दक्षिण में गैर-साम्यवादी सरकार. अमेरिका ने दक्षिण वियतनाम को साम्यवाद के प्रसार से बचाने के लिए समर्थन देना शुरू किया. उत्तर वियतनाम और वियत कांग सोवियत संघ और चीन से सहायता ले रहे थे. 1964 के टोंकिन की खाड़ी की घटना के बाद अमेरिका ने बड़े पैमाने पर सैन्य हस्तक्षेप शुरू किया. यहां अमेरिका की सेना आई और भारी बमबारी हुई. युद्ध बेहद क्रूर साबित हुआ और दोनों तरफ भारी जनहानि हुई. अमेरिकी जनता में युद्ध विरोध बढ़ा, जिसके चलते बड़े प्रदर्शन हुए. 1973 में पेरिस शांति समझौते के बाद अमेरिकी सेनाएं वापस लौट गईं. लंबे समय तक दोनों में रिश्ते नहीं रहे लेकिन 1990 के दशक में बिल क्लिंटन के प्रयासों के बाद दोनों देशों में रिश्ते सामान्य हो गए. ऐसे में अब दुश्मनी पुरानी हो चुकी है और दोनों दोस्त हैं.

About the AuthorPrateeti Pandey

में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…

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September 02, 2026, 15:24 IST

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